मार्गशीर्ष (अगहन) अमावस्या
मार्गशीर्ष अमावस्या क्या है
मार्गशीर्ष अमावस्या, जिसे गाँवों में अगहन की अमावस्या कहते हैं, उस महीने की अमावस्या है जिसके बारे में श्रीकृष्ण ने गीता में कहा है: महीनों में मैं मार्गशीर्ष हूँ। इसलिए यह दिन भगवान विष्णु-कृष्ण की पूजा, पितरों के तर्पण, नदी स्नान और दान के लिए विशेष माना जाता है। ठंड शुरू हो चुकी होती है, इसलिए गर्म कपड़े और कंबल दान करने की परंपरा भी इसी अमावस्या से जुड़ी है।
किस तिथि को
पूर्णिमांत पंचांग में यह मार्गशीर्ष कृष्ण अमावस्या है, जो दीपावली के लगभग एक महीने बाद आती है। अमांत पंचांग में इसे कार्तिक अमावस्या कहा जाता है, इसलिए दक्षिण भारत के कैलेंडर में नाम अलग दिख सकता है। स्नान-दान के लिए सूर्योदय के समय की अमावस्या ली जाती है।
कैसे मनाते हैं
- भोर में स्नान करके सूर्य को अर्घ्य और विष्णु सहस्रनाम या गीता के किसी अध्याय का पाठ।
- पितरों के लिए तिल-जल से तर्पण; कई परिवार इस दिन पितृ शांति के लिए ब्राह्मण भोजन कराते हैं।
- कंबल, ऊनी कपड़े, गुड़, तिल और अन्न का दान।
- शाम को तुलसी और पीपल के नीचे दीपक।
- पूर्वांचल और बिहार में इस समय धान की नई फ़सल घर आती है, इसलिए कई परिवार नए चावल का कुछ अंश पितरों और गाय के नाम निकालकर ही उपयोग शुरू करते हैं।
इसी पक्ष के पर्व
पूर्णिमांत गणना में इसी कृष्ण पक्ष की अष्टमी को कालभैरव जयंती और एकादशी को उत्पन्ना एकादशी आती है। अमावस्या के बाद शुरू होने वाले शुक्ल पक्ष में विवाह पंचमी और गीता जयंती जैसे बड़े पर्व हैं। अगहन महीने के नियम और महत्व मार्गशीर्ष मास का महत्व में विस्तार से पढ़ें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मार्गशीर्ष अमावस्या को अगहन अमावस्या क्यों कहते हैं?
अमांत पंचांग में इसे क्या कहते हैं?
मार्गशीर्ष अमावस्या पर क्या दान करें?
इस दिन किसकी पूजा करें?
मार्गशीर्ष मास इतना पवित्र क्यों माना जाता है?
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