2026

कन्या संक्रान्ति 2026

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मुख्य विवरण

दिल्ली के लिए

कन्या संक्रांति

कन्या संक्रांति पर सूर्य सिंह से कन्या राशि में प्रवेश करते हैं। पूर्वी और उत्तर भारत में यह दिन विश्वकर्मा पूजा के रूप में सबसे ज़्यादा जाना जाता है। सौर कैलेंडर में यहीं से आश्विन (असू) महीना शुरू होता है।

विश्वकर्मा पूजा

देवताओं के शिल्पी भगवान विश्वकर्मा की पूजा ज़्यादातर क्षेत्रों में कन्या संक्रांति के दिन होती है, इसीलिए इसकी तारीख लगभग स्थिर रहती है। बिहार, झारखंड, बंगाल, ओडिशा, असम और दिल्ली-एनसीआर के कारखानों, वर्कशॉप और दफ़्तरों में मशीनों, औज़ारों और गाड़ियों की सफ़ाई करके पूजा होती है और उस दिन काम बंद रहता है। बंगाल और बिहार के कुछ हिस्सों में पतंग भी उड़ाई जाती है। विस्तार विश्वकर्मा पूजा पृष्ठ पर है।

कन्यागत सूर्य और श्राद्ध

धर्मशास्त्र में सूर्य के कन्या राशि में रहने का समय पितरों के लिए खास माना गया है, और पितृ पक्ष आम तौर पर इसी के आसपास पड़ता है। इसलिए कन्या संक्रांति पर स्नान के बाद पितरों के नाम से तर्पण, अन्न-दान और ब्राह्मण भोजन की परंपरा भी है।

पुण्य काल

यह षडशीति संक्रांति है, जिसमें संक्रमण के बाद का समय पुण्य माना जाता है; समय इस पृष्ठ पर दिया गया है। इस समय सूर्य को अर्घ्य देकर अन्न, वस्त्र और फल दान करें।

क्षेत्रीय नाम

तमिलनाडु में पुरट्टासि महीना शुरू होता है, जिसके शनिवार विष्णु (पेरुमाल) को समर्पित होते हैं; केरल में कन्नी। पंजाब-हिमाचल में यह असू की संगरांद है। हर महीने की संक्रांति की सूची अलग पृष्ठ पर देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विश्वकर्मा पूजा कन्या संक्रांति पर ही क्यों होती है?
ज़्यादातर क्षेत्रों में विश्वकर्मा पूजा सौर गणना से, सूर्य के कन्या राशि में प्रवेश के दिन मनाई जाती है, इसलिए इसकी तारीख लगभग हर साल एक जैसी रहती है।
कन्या संक्रांति का पितरों से क्या संबंध है?
सूर्य के कन्या राशि में रहने का समय श्राद्ध के लिए विशेष माना गया है और पितृ पक्ष आम तौर पर इसी के आसपास आता है।
कन्या संक्रांति का पुण्य काल कब होता है?
यह षडशीति संक्रांति है, इसलिए संक्रमण के बाद का समय पुण्य होता है; समय इस पृष्ठ पर है।
कन्या संक्रांति से कौन सा महीना शुरू होता है?
सौर कैलेंडर में आश्विन; तमिल में पुरट्टासि और मलयालम में कन्नी।

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