आषाढ़ अमावस्या
आषाढ़ अमावस्या क्या है
आषाढ़ अमावस्या बरसात के मौसम की दहलीज़ पर आने वाली अमावस्या है। गाँवों में इसे हलहारिणी अमावस्या भी कहते हैं, क्योंकि खरीफ़ की बुवाई से पहले किसान इस दिन हल, बैल और खेती के औज़ारों की पूजा करते हैं। साथ ही यह पितरों के तर्पण, स्नान और दान का भी दिन है।
किस तिथि को
पूर्णिमांत पंचांग में यह आषाढ़ कृष्ण अमावस्या है; अमांत पंचांग में इसी दिन को ज्येष्ठ अमावस्या कहा जाता है। सामान्यतः जिस दिन सूर्योदय के समय अमावस्या हो, उसी दिन स्नान-दान किया जाता है।
कैसे मनाते हैं
- हल और बैल की पूजा: उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान के किसान परिवार हल को धोकर रोली-चावल लगाते हैं, बैलों को नहलाकर गुड़ और रोटी खिलाते हैं और अच्छी बारिश की प्रार्थना करते हैं।
- स्नान और तर्पण: नदी या घर पर स्नान के बाद पितरों के लिए तिल-जल अर्पित किया जाता है।
- पेड़ लगाना: बरसात शुरू होने के कारण कई परिवार इस दिन पीपल, बरगद, नीम या आम का पौधा लगाते हैं।
- दान: अन्न, छाता, वस्त्र और बीज का दान इस मौसम के अनुरूप माना जाता है।
आगे क्या आता है
इस अमावस्या के अगले दिन आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा से आषाढ़ गुप्त नवरात्रि शुरू होती है, जिसमें साधक देवी की गुप्त उपासना करते हैं। दूसरे दिन, यानी आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को पुरी की जगन्नाथ रथयात्रा निकलती है। कुछ ही दिनों बाद देवशयनी एकादशी से चातुर्मास का आरंभ होता है, जिसके बाद विवाह जैसे मांगलिक काम चार महीने के लिए रुक जाते हैं। इसलिए जिन परिवारों में शुभ काम बाकी हों, वे आषाढ़ अमावस्या के आस-पास से ही तैयारी तेज़ कर देते हैं।
अमावस्या पर क्या करें और क्या टालें, यह अमावस्या के नियम में पढ़ें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आषाढ़ अमावस्या को हलहारिणी अमावस्या क्यों कहते हैं?
आषाढ़ अमावस्या के बाद कौन सी नवरात्रि शुरू होती है?
अमांत पंचांग में इसे क्या कहते हैं?
इस दिन कौन सा पेड़ लगाना अच्छा माना जाता है?
क्या आषाढ़ अमावस्या पर पितरों का तर्पण करते हैं?
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