गणेश जयंती
गणेश जयंती माघ शुक्ल चतुर्थी को मनाई जाती है और मान्यता है कि इसी दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था। इसे माघी गणेश जयंती, तिलकुंद चतुर्थी या वरद चतुर्थी भी कहते हैं, और इस दिन तिल से बनी चीज़ों का भोग विशेष है।
क्या है और क्यों मनाते हैं
गणेश जी के जन्म की कथा शिव पुराण में है: माता पार्वती ने अपने उबटन से एक बालक बनाकर उसे द्वार पर बिठाया, शिव जी को रोकने पर उसका सिर कटा और फिर हाथी का सिर लगाकर उसे गणों का अधिपति बनाया गया। गणेश पुराण की परंपरा में माघ शुक्ल चतुर्थी को उनका जन्मदिन माना गया है। भाद्रपद की गणेश चतुर्थी से इसे अलग समझें; वह बड़ा सार्वजनिक उत्सव है, जबकि माघ की जयंती ज़्यादातर घरों और मंदिरों में शांत भाव से मनती है। महाराष्ट्र में इसका चलन सबसे अधिक है, पर उत्तर भारत के गणेश मंदिरों में भी पूजा होती है।
किस तिथि को
माघ शुक्ल चतुर्थी, यानी बसंत पंचमी से एक दिन पहले। इसे माघ कृष्ण पक्ष की सकट चौथ से न मिलाएँ, जो चंद्र अर्घ्य वाला व्रत है। जयंती के लिए सूर्योदय पर चतुर्थी वाला दिन लिया जाता है और पूजा दोपहर (मध्याह्न) में करना अच्छा माना जाता है।
पूजा कैसे करें
- गणेश जी को लाल फूल, दूर्वा की 21 गाँठें, सिंदूर और जनेऊ चढ़ाएँ।
- भोग में तिल के लड्डू, तिलकुट और मोदक।
- गणेश चालीसा का पाठ और जय गणेश देवा आरती।
- भाद्रपद चतुर्थी की तरह इस दिन भी चंद्र दर्शन से बचने की बात कही जाती है।
हर महीने की चतुर्थी के व्रत के लिए संकष्टी चतुर्थी कैलेंडर देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गणेश जयंती कब होती है?
गणेश जयंती और गणेश चतुर्थी में क्या अंतर है?
गणेश जयंती पर क्या भोग लगाएँ?
क्या गणेश जयंती पर चाँद देखना मना है?
गणेश जयंती और सकट चौथ एक ही हैं क्या?
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