2026

चैत्र नवरात्रि: सिद्धिदात्री पूजा 2026

शुक्रवार, मार्च 27, 2026

मुख्य विवरण

दिल्ली के लिए

चैत्र नवरात्रि: सिद्धिदात्री पूजा और राम नवमी

चैत्र नवरात्रि की नवमी को माँ सिद्धिदात्री की पूजा होती है, और यही दिन श्रीराम का जन्मदिन, राम नवमी भी है। इसलिए इस दिन घरों में एक साथ देवी का हवन, कन्या पूजन और दोपहर में राम जन्मोत्सव मनाया जाता है।

माँ सिद्धिदात्री

सिद्धिदात्री नवदुर्गा का नौवाँ और अंतिम रूप हैं। वे कमल पर बैठती हैं, वाहन सिंह है और चार हाथों में चक्र, गदा, शंख और कमल हैं। मान्यता है कि अणिमा, महिमा जैसी आठों सिद्धियाँ इन्हीं की कृपा से मिलती हैं, और इन्हीं की कृपा से शिव का आधा शरीर देवी का हुआ, जिससे वे अर्धनारीश्वर कहलाए। ध्यान श्लोक है:

सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।
सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥

नवमी को माँ को तिल का भोग लगाने की परंपरा है, साथ में हलवा-पूरी-चना भी चढ़ता है।

राम नवमी

वाल्मीकि रामायण के अनुसार श्रीराम का जन्म चैत्र शुक्ल नवमी को, पुनर्वसु नक्षत्र और कर्क लग्न में, ठीक दोपहर के समय हुआ था। इसलिए राम नवमी में मध्याह्न का समय निर्णायक है। कभी ऐसा होता है कि सूर्योदय वाली नवमी (सिद्धिदात्री पूजा) और मध्याह्न वाली नवमी (राम नवमी) अलग-अलग दिन पड़ें; ऐसे में दोनों पृष्ठों की तिथि देख लें। दोपहर में रामलला का पालना सजाया जाता है, पंचामृत से अभिषेक होता है और "भए प्रगट कृपाला" गाया जाता है। अयोध्या में सरयू स्नान और जन्मोत्सव का बड़ा आयोजन होता है। पूजा का क्रम राम नवमी पूजा विधि में और आरती श्री रामचंद्र जी की आरती में है।

हवन और कन्या पूजन

जो परिवार नवमी को व्रत पूरा करते हैं, वे सुबह हवन करके नौ कन्याओं का पूजन करते हैं; विधि कन्या पूजन में देखें। व्रत खोलने का नियम नवरात्रि पारण पृष्ठ पर है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सिद्धिदात्री पूजा और राम नवमी क्या एक ही दिन हैं?
आम तौर पर हाँ, दोनों चैत्र शुक्ल नवमी को होते हैं। पर देवी पूजा सूर्योदय वाली तिथि से और राम नवमी मध्याह्न वाली तिथि से तय होती है, इसलिए कभी-कभी एक दिन का अंतर आ जाता है।
माँ सिद्धिदात्री को क्या भोग लगाएँ?
नवमी को तिल का भोग लगाने की परंपरा है। साथ में हलवा, पूरी और काले चने भी चढ़ाए जाते हैं।
राम जन्म का समय क्या माना जाता है?
वाल्मीकि रामायण के अनुसार श्रीराम का जन्म दोपहर (मध्याह्न) में हुआ था, इसलिए जन्मोत्सव उसी समय मनाया जाता है।
क्या नवमी को कन्या पूजन कर सकते हैं?
हाँ, बहुत से परिवार नवमी को हवन के बाद कन्या पूजन करके ही व्रत पूरा करते हैं।
राम नवमी पर क्या करें?
सुबह व्रत का संकल्प लें, दोपहर में रामलला का अभिषेक, पालना झुलाना और आरती करें, और रामचरितमानस का बालकांड या रामरक्षा स्तोत्र पढ़ें।

टिप्पणियाँ

टिप्पणी लिखने के लिए लॉगिन करें

टिप्पणियाँ लोड हो रही हैं...