चैत्र नवरात्रि पारण
नवरात्रि पारण यानी नौ दिन के व्रत को विधि से खोलना। धर्मशास्त्र के अनुसार चैत्र नवरात्रि का पारण नवमी तिथि समाप्त होने के बाद, दशमी तिथि में किया जाता है। इसी दिन कलश और जौ (जवारे) का विसर्जन भी होता है।
किस तिथि को
चैत्र शुक्ल दशमी। यहाँ नियम यह है कि नवमी पूरी हो जाए और दशमी शुरू हो जाए, तब व्रत खोला जाए; इसलिए इस पृष्ठ पर दशमी के आरंभ का समय दिया गया है। जिन घरों में नवमी के दिन ही हवन और कन्या पूजन के बाद व्रत खोलने की रीत है, वे अपनी परंपरा निभा सकते हैं। दोनों तरीके उत्तर भारत में प्रचलित हैं।
कलश और जवारे का विसर्जन
- सुबह स्नान करके माँ की पूजा करें और जय अम्बे गौरी की आरती करें।
- पूजा में हुई किसी भूल के लिए क्षमा माँगें और देवी से अपने स्थान पर लौटने की प्रार्थना करें।
- कलश के जल को आम के पत्तों से पूरे घर में छिड़कें; बचा जल तुलसी या किसी पौधे में डाल दें।
- कलश पर रखा नारियल प्रसाद के रूप में बाँटें।
- जौ के जवारे कुछ घर के लोगों में बाँटे जाते हैं; कई लोग इन्हें तिजोरी या पर्स में रखते हैं, बाकी को नदी, तालाब या गमले में विसर्जित करें।
कलश की स्थापना कैसे हुई थी, यह कलश स्थापना विधि में देखें।
व्रत कैसे खोलें
नौ दिन फलाहार के बाद पेट को एकदम भारी भोजन न दें। पहले माँ को भोग लगाएँ, फिर हलवा-पूरी-चने का प्रसाद या सादा सात्विक भोजन लें। प्याज़-लहसुन का प्रयोग कई घरों में पारण के दिन भी नहीं होता। व्रत में क्या खाया जा सकता है, इसके लिए नवरात्रि व्रत का खान-पान देखें, और पूरे पर्व का कैलेंडर नवरात्रि पृष्ठ पर है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
चैत्र नवरात्रि का पारण कब करें?
क्या नवमी को व्रत खोल सकते हैं?
कलश के नारियल का क्या करें?
जवारे (जौ) का क्या करें?
पारण में पहले क्या खाएँ?
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