श्रावण अमावस्या (हरियाली अमावस्या)
हरियाली अमावस्या क्या है
सावन की अमावस्या को उत्तर भारत में हरियाली अमावस्या कहा जाता है। बारिश से धरती हरी हो चुकी होती है, इसलिए यह दिन प्रकृति, पेड़-पौधों और भगवान शिव की पूजा का है। लोग पौधे लगाते हैं, शिवलिंग पर जल चढ़ाते हैं और पितरों के लिए तर्पण-दान करते हैं।
किस तिथि को
पूर्णिमांत पंचांग में यह श्रावण कृष्ण अमावस्या है, यानी सावन महीने के ठीक बीच में आती है: पहले पंद्रह दिन बीत चुके होते हैं और अगले दिन से सावन का शुक्ल पक्ष शुरू होता है। अमांत पंचांग में यही दिन आषाढ़ अमावस्या कहलाता है, क्योंकि वहाँ सावन इसके बाद शुरू होता है। स्नान-दान के लिए सूर्योदय वाली अमावस्या ली जाती है।
कैसे मनाते हैं
- वृक्षारोपण: पीपल, बरगद, नीम, आँवला, बेल और तुलसी लगाने की परंपरा है। कई जगह इसे पेड़ों का त्योहार ही माना जाता है।
- शिव पूजा: सावन होने से शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और धतूरा चढ़ाया जाता है। क्या चढ़ाएं और क्या नहीं, यह शिवलिंग पर क्या चढ़ाएं में है।
- पितृ तर्पण और दान: नदी स्नान के बाद तिल-जल से तर्पण, और अन्न-वस्त्र का दान।
- महिलाओं की तैयारी: तीन दिन बाद हरियाली तीज आती है, इसलिए इसी समय से झूले पड़ने लगते हैं, मेहंदी लगती है और मायके से सिंधारा आने की तैयारी होती है।
क्षेत्रीय परंपराएँ
राजस्थान के उदयपुर में फतहसागर और सहेलियों की बाड़ी के पास हरियाली अमावस्या का प्रसिद्ध मेला लगता है। मथुरा-वृंदावन के मंदिरों में ठाकुर जी को हरे वस्त्र पहनाकर हरियाली श्रृंगार किया जाता है। मध्य प्रदेश और राजस्थान के किसान इस दिन खेती के औज़ारों की पूजा भी करते हैं।
पूरे सावन के नियम सावन मास: व्रत और जलाभिषेक में पढ़ें, और शाम की पूजा के बाद ॐ जय शिव ओंकारा आरती गाएं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
हरियाली अमावस्या किस महीने में आती है?
हरियाली अमावस्या पर कौन सा पेड़ लगाएं?
हरियाली अमावस्या और हरियाली तीज में क्या संबंध है?
क्या इस दिन शिव पूजा करनी चाहिए?
हरियाली अमावस्या का मेला कहाँ लगता है?
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