2026

हरियाली तीज 2026

…

मुख्य विवरण

दिल्ली के लिए

हरियाली तीज

हरियाली तीज सावन के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाने वाला सुहाग और सावन की हरियाली का त्योहार है। सुहागिनें और कुँवारी लड़कियाँ शिव-पार्वती की पूजा करती हैं, हरे कपड़े और चूड़ियाँ पहनती हैं, मेहंदी लगाती हैं और झूला झूलती हैं। इसे छोटी तीज या श्रावणी तीज भी कहते हैं।

क्या है और क्यों मनाते हैं

मान्यता है कि लंबे तप के बाद इसी दिन माता पार्वती को भगवान शिव पति रूप में मिले थे। इसलिए यह दिन दांपत्य के प्रेम और सौभाग्य से जुड़ा है। विवाहित महिलाएँ पति की लंबी उम्र और घर की खुशहाली के लिए, और कुँवारी लड़कियाँ अच्छे वर के लिए व्रत रखती हैं। पूरी कथा हरियाली तीज व्रत कथा में पढ़ें।

किस तिथि को

श्रावण शुक्ल तृतीया, जो सूर्योदय के समय हो। शुक्ल पक्ष होने से पूर्णिमांत और अमांत, दोनों पंचांगों में यह सावन ही कहलाता है। यह नाग पंचमी से दो दिन पहले पड़ती है।

कैसे मनाते हैं

  • नई ब्याही बेटी को मायके से सिंधारा भेजा जाता है: घेवर, मेहंदी, चूड़ियाँ, बिंदी, लहरिया या हरी साड़ी और मिठाई।
  • महिलाएँ सोलह श्रृंगार करके शिव-पार्वती की मिट्टी या धातु की प्रतिमा की पूजा करती हैं और कथा सुनती हैं।
  • पेड़ों पर झूले पड़ते हैं, सावन के गीत गाए जाते हैं। राजस्थान, खासकर जयपुर में तीज माता की सवारी निकलती है।
  • कई महिलाएँ निर्जल या फलाहार व्रत रखती हैं, कई केवल पूजा करती हैं; अपने घर की परंपरा मानें।

तीन तीजों का अंतर

उत्तर भारत में तीन तीज मनाई जाती हैं। सावन शुक्ल तृतीया को हरियाली तीज, भाद्रपद कृष्ण तृतीया को कजरी तीज और भाद्रपद शुक्ल तृतीया को हरतालिका तीज। सावन के बाकी नियम सावन मास लेख में हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हरियाली तीज किस तिथि को है?
श्रावण शुक्ल तृतीया को। चुने हुए साल की तारीख इसी पृष्ठ पर ऊपर दी गई है।
हरियाली तीज पर किसकी पूजा होती है?
भगवान शिव और माता पार्वती की, जिन्हें इस दिन तीज माता के रूप में भी पूजा जाता है।
सिंधारा क्या होता है?
मायके से बेटी को भेजा जाने वाला तोहफ़ा, जिसमें घेवर, मेहंदी, चूड़ियाँ, श्रृंगार का सामान और कपड़े होते हैं।
क्या कुँवारी लड़कियाँ हरियाली तीज का व्रत रख सकती हैं?
हाँ, अच्छे वर की कामना से कुँवारी लड़कियाँ भी यह व्रत और शिव-पार्वती की पूजा करती हैं।
हरियाली तीज और हरतालिका तीज में क्या अंतर है?
हरियाली तीज सावन शुक्ल तृतीया को झूलों और श्रृंगार के उत्सव के रूप में मनाई जाती है, जबकि हरतालिका तीज भाद्रपद शुक्ल तृतीया को कठोर निर्जल व्रत और रात्रि जागरण के साथ होती है।

टिप्पणियाँ

टिप्पणी लिखने के लिए लॉगिन करें

टिप्पणियाँ लोड हो रही हैं...