अनंत चतुर्दशी
अनंत चतुर्दशी भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी को मनाई जाती है। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा होती है और चौदह गाँठों वाला अनंत सूत्र बाँधा जाता है। गणेश उत्सव का विसर्जन भी इसी दिन होता है।
क्या है और क्यों मनाते हैं
"अनंत" यानी जिसका कोई अंत नहीं, भगवान विष्णु का वह रूप जो शेषनाग पर विराजमान है। कथा के अनुसार पांडवों के वनवास के समय श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को यह व्रत बताया था। सुशीला और कौण्डिन्य ऋषि की कथा इस व्रत के साथ सुनी जाती है, जिसमें अनंत सूत्र का अपमान करने पर कष्ट और फिर व्रत से सुख लौटने की बात आती है। पूरी कथा अनंत चतुर्दशी व्रत कथा में पढ़ें।
किस तिथि को
भाद्रपद मास, शुक्ल पक्ष, चतुर्दशी। जिस दिन सूर्योदय के समय चतुर्दशी हो, वही दिन व्रत के लिए लिया जाता है। शुक्ल पक्ष होने के कारण पूर्णिमांत और अमांत में महीने का नाम एक ही है।
पूजा कैसे होती है
- सुबह स्नान के बाद चौकी पर कलश और कुश से बने शेषनाग पर विष्णु जी की स्थापना।
- कुमकुम या हल्दी से रंगे कच्चे सूत में चौदह गाँठें लगाकर अनंत सूत्र बनाया जाता है और पूजा में चढ़ाया जाता है।
- पूजा के बाद पुरुष दाहिनी और स्त्रियाँ बाईं बाँह पर अनंत बाँधते हैं।
- प्रसाद में पूड़ी, खीर या मालपुआ बनता है; कई घरों में बिना नमक का भोजन एक बार किया जाता है।
क्षेत्रीय परंपराएँ
महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और अब उत्तर भारत के शहरों में दस दिन के गणपति इसी दिन विसर्जित होते हैं, देखें गणेश स्थापना और विसर्जन। बिहार और पूर्वांचल में अनंत पूजा परिवार का बड़ा व्रत है। अगले ही दिन से पितृ पक्ष शुरू होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अनंत चतुर्दशी किस तिथि को होती है?
अनंत सूत्र में कितनी गाँठें होती हैं?
अनंत सूत्र किस हाथ में बाँधें?
अनंत चतुर्दशी पर किसकी पूजा होती है?
अनंत चतुर्दशी व्रत में क्या खाएं?
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