2026

आमलकी एकादशी 2026

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मुख्य विवरण

दिल्ली के लिए

आमलकी एकादशी

आमलकी एकादशी क्या है

आमलकी एकादशी पर आँवले के पेड़ की पूजा होती है, क्योंकि मान्यता है कि आँवले में भगवान विष्णु का वास है। होली से कुछ दिन पहले आने वाली यह एकादशी काशी में रंगभरी एकादशी के नाम से भी प्रसिद्ध है।

किस तिथि को आती है

यह फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी है। शुक्ल पक्ष होने से पूर्णिमांत और अमांत दोनों में महीना फाल्गुन ही है। व्रत सूर्योदय-व्यापिनी एकादशी पर होता है।

आँवले के पेड़ की पूजा

सुबह स्नान के बाद आँवले के पेड़ के नीचे जगह साफ करें। पेड़ की जड़ में जल चढ़ाएँ, रोली, चावल, फूल और धूप-दीप से पूजा करें और पेड़ की परिक्रमा करें, कई लोग कच्चा सूत भी लपेटते हैं। पेड़ के पास कलश रखकर विष्णु (परशुराम) की पूजा का विधान भी है। पेड़ पास न हो तो आँवले का फल भगवान को चढ़ाकर पूजा करें, और व्रत खोलने के बाद आँवले का दान करें।

कथा संक्षेप में

वैदिश नगर में राजा चैत्ररथ के राज्य में सब लोग आमलकी एकादशी पर आँवले के नीचे पूजा और रात भर जागरण करते थे। एक भूखा शिकारी वहाँ छिपकर बैठा रहा और कथा सुनता रहा। इस अनजाने व्रत से अगले जन्म में वह राजा वसुरथ बना। एक बार जंगल में म्लेच्छों ने उस पर हमला किया तो उसके शरीर से एक दिव्य शक्ति प्रकट हुई और उसने सबको मार गिराया।

काशी की रंगभरी एकादशी

काशी में मान्यता है कि इसी दिन बाबा विश्वनाथ माता गौरा का गौना कराकर लाते हैं। मंदिर में बाबा की पालकी निकलती है और गुलाल उड़ाकर होली की शुरुआत होती है। देखें काशी विश्वनाथ मंदिर और होली। सामान्य कथा एकादशी व्रत कथा में है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आमलकी एकादशी कब है?
फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी को, होली से लगभग चार दिन पहले।
इस दिन आँवले की पूजा क्यों होती है?
मान्यता है कि आँवले के पेड़ में भगवान विष्णु का वास है, इसलिए जड़ में जल चढ़ाकर, परिक्रमा करके और सूत लपेटकर पूजा की जाती है।
आँवले का पेड़ पास न हो तो क्या करें?
आँवले का फल भगवान विष्णु को चढ़ाकर पूजा करें और व्रत के बाद आँवले का दान करें।
रंगभरी एकादशी क्या है?
काशी में आमलकी एकादशी को रंगभरी एकादशी कहते हैं, जब बाबा विश्वनाथ के गौरा का गौना लाने की परंपरा में गुलाल उड़ाकर होली शुरू होती है।
क्या इस दिन आँवला खा सकते हैं?
हाँ, फलाहार में आँवला लिया जा सकता है और पारण में भी आँवले का प्रयोग शुभ माना जाता है।

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