ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पहले का वह समय है जो सूर्योदय से लगभग 96 मिनट पहले शुरू होकर 48 मिनट पहले ख़त्म होता है, यानी रात का चौदहवाँ मुहूर्त। अभिजित मुहूर्त दिन के पंद्रह मुहूर्तों में आठवाँ है, जो स्थानीय दोपहर (सूर्योदय और सूर्यास्त के ठीक बीच) के आसपास पड़ता है। पहला समय पूजा, जप और पढ़ाई के लिए और दूसरा किसी भी शुभ काम के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।
मुहूर्त: 48 मिनट की इकाई
पंचांग में दिन और रात को मिलाकर (अहोरात्र) तीस मुहूर्तों में बाँटा जाता है। चौबीस घंटे को तीस से भाग दें तो एक मुहूर्त औसतन 48 मिनट का होता है। इसमें पंद्रह मुहूर्त दिन के (सूर्योदय से सूर्यास्त) और पंद्रह रात के (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) होते हैं।
पर दिन और रात बराबर नहीं होते। जून में दिल्ली में दिन लगभग चौदह घंटे का होता है, तो दिन का एक मुहूर्त 56 मिनट के आसपास बनता है, जबकि रात का मुहूर्त छोटा हो जाता है। दिसंबर में उल्टा होता है। इसलिए 48 मिनट एक औसत है, असली मुहूर्त हर दिन और हर शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त से निकाला जाता है।
| शब्द | मतलब |
|---|---|
| मुहूर्त | दिन या रात का पंद्रहवाँ भाग (औसत 48 मिनट) |
| घटी (घड़ी) | मुहूर्त का आधा, औसत 24 मिनट |
| प्रहर | दिन या रात का चौथाई भाग, औसत 3 घंटे |
ब्रह्म मुहूर्त: कब और क्यों
रात के पंद्रह मुहूर्तों में चौदहवें का नाम "ब्रह्म" है। इसके बाद आख़िरी मुहूर्त आता है और फिर सूर्योदय। यानी ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से दो मुहूर्त पहले शुरू होता है और एक मुहूर्त पहले ख़त्म हो जाता है। आम बोलचाल में लोग सूर्योदय से पहले के पूरे डेढ़ घंटे को ब्रह्म मुहूर्त कह देते हैं, और यह भी चल जाता है।
हिसाब का उदाहरण
मान लीजिए किसी दिन सूर्योदय सुबह 6:00 बजे है और रात का मुहूर्त 48 मिनट का है:
- ब्रह्म मुहूर्त की शुरुआत: 6:00 से 96 मिनट पहले, यानी 4:24 बजे
- ब्रह्म मुहूर्त का अंत: 6:00 से 48 मिनट पहले, यानी 5:12 बजे
सर्दियों में रातें लंबी होती हैं, तो रात का मुहूर्त 48 से ज़्यादा मिनट का होगा और ब्रह्म मुहूर्त थोड़ा पहले शुरू होगा। गर्मियों में यह सूर्योदय के और पास आ जाता है।
मनुस्मृति में कहा गया है: "ब्राह्मे मुहूर्ते बुध्येत धर्मार्थौ चानुचिन्तयेत्", यानी ब्रह्म मुहूर्त में जागें और धर्म और अर्थ, दोनों का विचार करें। इस समय घर शांत रहता है, फ़ोन और शोर नहीं होता, इसलिए परंपरा में इसे इन कामों के लिए चुना गया:
- जागकर हथेलियाँ देखना और "कराग्रे वसते लक्ष्मीः" का स्मरण
- संध्या वंदन, गायत्री मंत्र का जप और ध्यान
- विद्यार्थियों के लिए याद करने वाली पढ़ाई
- स्नान करके सूर्योदय के समय सूर्य को अर्घ्य देने की तैयारी
ब्रह्म मुहूर्त में उठने की आदत
जो लोग देर रात तक जागते हैं, उनके लिए एकदम से चार बजे उठना मुश्किल होता है। बेहतर है कि हर हफ़्ते जागने का समय पंद्रह-बीस मिनट पहले करें और रात का खाना जल्दी खा लें। शुरुआत में ब्रह्म मुहूर्त में केवल पाँच-दस मिनट का जप या ध्यान भी काफ़ी है; नियमितता लंबी पूजा से ज़्यादा मायने रखती है।
अभिजित मुहूर्त
दिन के पंद्रह मुहूर्तों में आठवाँ "अभिजित" (जिसे "विधि" मुहूर्त भी कहा गया है) है। सात मुहूर्त इससे पहले और सात बाद में होते हैं, इसलिए यह ठीक दिन के बीच, स्थानीय दोपहर के दोनों ओर फैला रहता है। "अभिजित" का अर्थ है जो सब पर विजय दिलाए। मान्यता है कि यह मुहूर्त बहुत से दोषों को काट देता है, इसलिए जब कोई और अच्छा मुहूर्त न मिल रहा हो तो पंडित इसे सुझाते हैं।
हिसाब का उदाहरण
सूर्योदय 6:00 और सूर्यास्त 18:00 हो, तो दिन 12 घंटे का है और एक मुहूर्त 48 मिनट का:
- सात मुहूर्त बीतने में 7 × 48 = 336 मिनट, यानी 5 घंटे 36 मिनट लगेंगे।
- अभिजित की शुरुआत: 6:00 + 5:36 = 11:36 बजे
- अभिजित का अंत: 11:36 + 48 मिनट = 12:24 बजे
- इसका बीच ठीक 12:00 है, जो उस दिन की स्थानीय दोपहर है।
ध्यान दें कि स्थानीय दोपहर घड़ी के 12 बजे के बराबर हो, ज़रूरी नहीं। दिल्ली में यह मौसम के हिसाब से लगभग 12:05 से 12:35 के बीच पड़ती है, जबकि पूर्वी भारत में इससे पहले। तुलसीदास जी ने रामचरितमानस में श्रीराम के जन्म का समय मध्य दिवस बताया है, इसलिए राम नवमी की पूजा इसी मध्याह्न के आसपास होती है।
बुधवार का अपवाद
मुहूर्त ग्रंथों की परंपरा में बुधवार के दिन अभिजित मुहूर्त को शुभ कामों के लिए नहीं लिया जाता। उस दिन किसी नए काम के लिए दूसरा समय चुनें, जैसे शुभ चौघड़िया या पंचांग में दिया कोई अन्य शुभ योग। इसके अलावा कुछ पंडित दक्षिण दिशा की यात्रा के लिए भी अभिजित से बचने की सलाह देते हैं।
एक और बात: अभिजित नाम का एक नक्षत्र भी है (उत्तराषाढ़ा और श्रवण के बीच), जिसका इस मुहूर्त से कोई सीधा संबंध नहीं है। नाम एक होने से लोग अक्सर दोनों को मिला देते हैं।
आज के मुहूर्त कहाँ देखें
हर दिन का ब्रह्म मुहूर्त और अभिजित मुहूर्त आपके शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त से बदलता है, इसलिए किसी एक तय समय पर भरोसा न करें। आज के पंचांग में आपके शहर के हिसाब से दोनों समय, सूर्योदय-सूर्यास्त और दूसरे शुभ-अशुभ काल एक साथ दिखते हैं।
अभिजित मुहूर्त अक्सर राहुकाल से टकरा जाता है, खासकर उन दिनों में जब राहुकाल दोपहर में होता है। ऐसे में ज़्यादातर पंडित राहुकाल वाले हिस्से को छोड़ने की सलाह देते हैं। इसकी जानकारी राहुकाल क्या है में है, और दिन को आठ हिस्सों में बाँटने वाली दूसरी पद्धति चौघड़िया में समझाई गई है।

