- ॐ नारशिंहाय नमः
- ॐ महासिंहाय नमः
- ॐ दिव्य सिंहाय नमः
- ॐ महाबलाय नमः
- ॐ उग्र सिंहाय नमः
- ॐ महादेवाय नमः
- ॐ स्तंभजाय नमः
- ॐ उग्रलोचनाय नमः
- ॐ रौद्राय नमः
- ॐ सर्वाद्भुताय नमः
- ॐ श्रीमात्रे नमः
- ॐ योगनंदाय नमः
- ॐ त्रिविक्रमाय नमः
- ॐ हरये नमः
- ॐ कोलाहलाय नमः
- ॐ चक्रिणे नमः
- ॐ विजयिने नमः
- ॐ जय वर्धनाय नमः
- ॐ पंचासनाय नमः
- ॐ परब्रह्मय नमः
- ॐ अघोराय नमः
- ॐ घोरविक्रमाय नमः
- ॐ ज्वलन्मुखाय नमः
- ॐ ज्वालामालिने नमः
- ॐ महा ज्वालाय नमः
- ॐ महा प्रभवे नमः
- ॐ निटलाक्षाय नमः
- ॐ सहस्राक्षाय नमः
- ॐ दुर्निरीक्षाय नमः
- ॐ प्रतापनाय नमः
- ॐ महादंष्ट्रायुधाय नमः
- ॐ प्रज्ञाय नमः
- ॐ चंडकोपाय नमः
- ॐ सदाशिवाय नमः
- ॐ हिरण्यकशिपु ध्वंसिने नमः
- ॐ दैत्यदान भंजनाय नमः
- ॐ गुणभद्राय नमः
- ॐ महाभद्राय नमः
- ॐ बलभद्राय नमः
- ॐ सुभद्राय नमः
- ॐ कराळाय नमः
- ॐ विकराळाय नमः
- ॐ विकर्त्रे नमः
- ॐ सर्वकर्तृकाय नमः
- ॐ शिंशुमा राय नमः
- ॐ त्रिलोकात्मने नमः
- ॐ ईशाय नमः
- ॐ सर्वेश्वराय नमः
- ॐ विभवे नमः
- ॐ भैरवाडंबराय नमः
- ॐ दिव्याय नमः
- ॐ अच्युताय नमः
- ॐ कवि माधवाय नमः
- ॐ अधोक्षजाय नमः
- ॐ अक्षराय नमः
- ॐ शर्वाय नमः
- ॐ वनमालिने नमः
- ॐ वरप्रदाय नमः
- ॐ विश्वंभराय नमः
- ॐ अध्भुताय नमः
- ॐ भव्याय नमः
- ॐ श्री विष्णवे नमः
- ॐ पुरुषोत्तमाय नमः
- ॐ अनघास्त्राय नमः
- ॐ नखास्त्राय नमः
- ॐ सूर्य ज्योतिषे नमः
- ॐ सुरेश्वराय नमः
- ॐ सहस्रबाहवे नमः
- ॐ सर्वज्ञाय नमः
- ॐ सर्वसिद्धिप्रदायकाय नमः
- ॐ वज्र दंष्ट्राय नमः
- ॐ वज्रनखाय नमः
- ॐ महानंदाय नमः
- ॐ परंतपाय नमः
- ॐ सर्वमंत्रैकरूपाय नमः
- ॐ सर्वमंत्र विदारणाय नमः
- ॐ सर्वतंत्रात्मकाय नमः
- ॐ अव्यक्ताय नमः
- ॐ सु व्यक्ताय नमः
- ॐ भक्तवत्सलाय नमः
- ॐ वैशाख शुक्ल भूतोत्धाय नमः
- ॐ शरणागतवत्सलाय नमः
- ॐ उदारकीर्तये नमः
- ॐ पुण्यात्मने नमः
- ॐ महात्मने नमः
- ॐ चंड विक्रमाय नमः
- ॐ वेदत्रय प्र पूज्याय नमः
- ॐ भगवते नमः
- ॐ परमेश्वराय नमः
- ॐ श्रीवत्सां काय नमः
- ॐ श्रीनिवासाय नमः
- ॐ जगद्व्यापिने नमः
- ॐ जगन्मयाय नमः
- ॐ जगत्पालाय नमः
- ॐ जगन्नाथाय नमः
- ॐ महाकायाय नमः
- ॐ द्विरूपभृते नमः
- ॐ परमात्मने नमः
- ॐ परंज्योतिषे नमः
- ॐ निर्गुणाय नमः
- ॐ नृकेसरिणे नमः
- ॐ परतत्त्वाय नमः
- ॐ परंधामाय नमः
- ॐ सच्चिदानंदविग्रहाय नमः
- ॐ लक्ष्मीनृशिंहाय नमः
- ॐ सर्वात्मने नमः
- ॐ धीराय नमः
- ॐ प्रह्लाद पालकाय नमः
इति श्री लक्ष्मी नरसिंह अष्टोत्तर शतनामावळि संपूर्णं
अर्थ
श्री लक्ष्मीनरसिंह अष्टोत्तर शतनामावलि भगवान नरसिंह और आदिशक्ति देवी लक्ष्मी के संयुक्त स्वरूप को समर्पित 108 पवित्र नामों का स्तोत्र है। यह नामावलि भक्तों के लिए दिव्य शक्ति और सुरक्षा प्राप्त करने का एक शक्तिशाली साधन है। भगवान विष्णु के उग्र अवतार, नरसिंह, दुष्ट शक्तियों का नाश कर धर्म की रक्षा करते हैं, जबकि देवी लक्ष्मी धन, समृद्धि और शुभता प्रदान करती हैं। यह अष्टोत्तर इन दोनों दिव्य तत्वों के समन्वय का प्रतिनिधित्व करता है, जो जीवन के सभी क्षेत्रों में संतुलित आशीर्वाद प्रदान करता है।
इस नामावलि का प्रत्येक नाम भगवान नरसिंह के अनंत गुणों, शक्तियों और दिव्य लीलाओं का वर्णन करता है। 'ॐ नारसिंहाय नमः' जैसे मूल मंत्र से शुरू होकर, 'महासिंहाय नमः', 'दिव्य सिंहाय नमः' जैसे नाम उनके सिंह रूप की महिमा और दिव्यता को उजागर करते हैं। 'उग्र सिंहाय नमः', 'उग्रलोचनाय नमः', 'रौद्राय नमः' जैसे नाम दुष्टों को दंडित करने वाले उनके भयानक रूप को दर्शाते हैं, जबकि 'स्तंभजाय नमः' उनके खंभे से प्रकट होने के अनूठे अवतार की याद दिलाता है। 'हिरण्यकशिपु ध्वंसिने नमः' और 'दैत्यदान भंजनाय नमः' नाम भक्तों की रक्षा और दुष्ट शक्तियों के विनाश के प्रति उनके संकल्प को स्पष्ट करते हैं।
इस स्तोत्र में 'श्रीमात्रे नमः' नाम देवी लक्ष्मी की उपस्थिति और करुणा को इंगित करता है, जो यह दर्शाता है कि यह केवल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि समृद्धि और शुभ आशीर्वाद भी प्रदान करता है। 'त्रिविक्रमाय नमः', 'हरये नमः' जैसे नाम इस बात पर जोर देते हैं कि भगवान नरसिंह विष्णु के अन्य अवतारों के साथ एक ही दिव्य सार रखते हैं। 'ज्वलन्मुखाय नमः', 'ज्वालामालिने नमः' नाम उनके अग्निमुख और ज्वालामाला का वर्णन करते हैं, जो उनकी असाधारण शक्ति का प्रतीक है। अंत में, 'गुणभद्राय नमः', 'महाभद्राय नमः', 'बलभद्राय नमः' जैसे नाम उनके शुभ, शक्तिशाली और कल्याणकारी गुणों की प्रशंसा करते हैं, जो भक्तों को सदा शुभ प्रदान करने की उनकी क्षमता को दर्शाते हैं।
इस अष्टोत्तर शतनामावलि का पाठ करने से भक्त मानसिक शांति, साहस और आध्यात्मिक उत्थान प्राप्त करते हैं। यह भगवान के अनंत गुणों का स्मरण करने और उनकी दिव्य कृपा के पात्र बनने का एक सरल और प्रभावी तरीका है। नियमित रूप से इस नामावलि का पाठ करने से व्यक्ति जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए आंतरिक शक्ति प्राप्त करता है और लक्ष्मी-नरसिंह के आशीर्वाद से भौतिक और आध्यात्मिक समृद्धि का अनुभव करता है।
लाभ (Benefits):
- संपूर्ण सुरक्षा: भगवान नरसिंह का उग्र रूप सभी दुष्ट शक्तियों, शत्रुओं और नकारात्मक प्रभावों से भक्तों की रक्षा करता है, भय को दूर करता है।
- धन और समृद्धि: देवी लक्ष्मी की कृपा से, इस नामावलि का पाठ करने वालों को वित्तीय स्थिरता, समृद्धि और जीवन में शुभ घटनाएँ प्राप्त होती हैं।
- साहस और आत्मविश्वास: नरसिंह की शक्ति का आह्वान करने से, भक्तों को चुनौतियों का सामना करने के लिए आवश्यक साहस, आत्मविश्वास और मानसिक दृढ़ता प्राप्त होती है।
- ऋणों से मुक्ति: आर्थिक कठिनाइयों और ऋणों से पीड़ित लोग इस स्तोत्र का पाठ करने से राहत पा सकते हैं और बेहतर आर्थिक स्थिति प्राप्त कर सकते हैं।
- आध्यात्मिक उत्थान: नियमित पाठ मन को शुद्ध करता है, आध्यात्मिक प्रगति में सहायता करता है और भगवान के साथ गहरा संबंध स्थापित करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्री लक्ष्मीनरसिंह अष्टोत्तर शतनामावलि क्या है?
इस स्तोत्र का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
श्री लक्ष्मीनरसिंह अष्टोत्तर शतनामावलि के प्रमुख लाभ क्या हैं?
इस नामावलि का पाठ किसे करना चाहिए?
इस स्तोत्र का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
श्री लक्ष्मीनरसिंह अष्टोत्तर शतनामावलि का उद्गम क्या है?
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