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1। ॐ श्री कृष्णाय नमः
2। ॐ कमलानाथाय नमः
3। ॐ वासुदेवाय नमः
4। ॐ सनातनाय नमः
5। ॐ वसुदेवात्मजाय नमः
6। ॐ पुण्याय नमः
7। ॐ लीलामानुषविग्रहाय नमः
8। ॐ श्रीवत्सकौस्तुभधराय नमः
9। ॐ यशोदावत्सलाय नमः
10। ॐ हरये नमः
11। ॐ चतुर्भुजात्तचक्रासिगदाशंखाद्यायुधाय नमः
12। ॐ देवकीनंदनाय नमः
13। ॐ श्रीशाय नमः
14। ॐ नंदगोपप्रियात्मजाय नमः
15। ॐ यमुनावेगसंहारिणे नमः
16। ॐ बलभद्रप्रियानुजाय नमः
17। ॐ पूतनाजीवितहराय नमः
18। ॐ शकटासुरभंजनाय नमः
19। ॐ नंदव्रजजनानंदिने नमः
20। ॐ सच्चिदानंदविग्रहाय नमः
21। ॐ नवनीतविलिप्तांगाय नमः
22। ॐ नवनीतनटाय नमः
23। ॐ अनघाय नमः
24। ॐ नवनीतनवाहारिणे नमः
25। ॐ मुचुकुंदप्रसादकाय नमः
26। ॐ षोडशस्त्रीसहस्रेशाय नमः
27। ॐ त्रिभंगिने नमः
28। ॐ मधुराकृतये नमः
29। ॐ शुकवागमृताब्धींदवे नमः
30। ॐ गोविंदाय नमः
31। ॐ योगिनांपतये नमः
32। ॐ वत्सवाटचराय नमः
33। ॐ अनंताय नमः
34। ॐ धेनुकासुरभंजनाय नमः
35। ॐ तृणीकृततृणावर्ताय नमः
36। ॐ यमलार्जुनभंजनाय नमः
37। ॐ उत्तालतालभेत्रे नमः
38। ॐ गोपगोपीश्वराय नमः
39। ॐ योगिने नमः
40। ॐ कोटिसूर्यसमप्रभाय नमः
41। ॐ इलापतये नमः
42। ॐ परंज्योतिषे नमः
43। ॐ यादवेंद्राय नमः
44। ॐ यदूद्वहाय नमः
45। ॐ वनमालिने नमः
46। ॐ पीतवासिने नमः
47। ॐ पारिजातापहारकाय नमः
48। ॐ गोवर्धनाचलोद्धर्त्रे नमः
49। ॐ गोपालाय नमः
50। ॐ सर्वपालकाय नमः
51। ॐ अजाय नमः
52। ॐ निरंजनाय नमः
53। ॐ कामजनकाय नमः
54। ॐ कंजलोचनाय नमः
55। ॐ मधुघ्ने नमः
56। ॐ मधुरानाथाय नमः
57। ॐ द्वारकानायकाय नमः
58। ॐ बलिने नमः
59। ॐ बृंदावनांतसंचारिणे नमः
60। ॐ तुलसीदामभूषणाय नमः
61। ॐ स्यमंतकमणिहर्त्रे नमः
62। ॐ नरनारायणात्मकाय नमः
63। ॐ कुब्जाकृष्णांबरधराय नमः
64। ॐ मायिने नमः
65। ॐ परमपूरुषाय नमः
66। ॐ मुष्टिकासुरचाणूरमल्लयुद्धविशारदाय नमः
67। ॐ संसारवैरिणे नमः
68। ॐ कंसारये नमः
69। ॐ मुरारये नमः
70। ॐ नरकांतकाय नमः
71। ॐ अनादिब्रह्मचारिणे नमः
72। ॐ कृष्णाव्यसनकर्षकाय नमः
73। ॐ शिशुपालशिरच्छेत्रे नमः
74। ॐ दुर्योधनकुलांतकाय नमः
75। ॐ विदुराक्रूरवरदाय नमः
76। ॐ विश्वरूपप्रदर्शकाय नमः
77। ॐ सत्यवाचे नमः
78। ॐ सत्यसंकल्पाय नमः
79। ॐ सत्यभामारताय नमः
80। ॐ जयिने नमः
81। ॐ सुभद्रापूर्वजाय नमः
82। ॐ जिष्णवे नमः
83। ॐ भीष्ममुक्तिप्रदायकाय नमः
84। ॐ जगद्गुरुवे नमः
85। ॐ जगन्नाथाय नमः
86। ॐ वेणुनादविशारदाय नमः
87। ॐ वृषभासुरविध्वंसिने नमः
88। ॐ बाणासुरकरांतकाय नमः
89। ॐ युधिष्टिरप्रतिष्ठात्रे नमः
90। ॐ बर्हिबर्हावतंसकाय नमः
91। ॐ पार्थसारथये नमः
92। ॐ अव्यक्ताय नमः
93। ॐ गीतामृतमहोदध्ये नमः
94। ॐ काळीयफणिमाणिक्यरंजितश्रीपदांबुजाय नमः
95। ॐ दामोदराय नमः
96। ॐ यज्ञभोक्त्रे नमः
97। ॐ दानवेंद्रविनाशकाय नमः
98। ॐ नारायणाय नमः
99। ॐ परब्रह्मणे नमः
100। ॐ पन्नगाशनवाहनाय नमः
101। ॐ जलक्रीडासमासक्तगोपीवस्त्रापहारकाय नमः
102। ॐ पुण्यश्लोकाय नमः
103। ॐ तीर्थपादाय नमः
104। ॐ वेदवेद्याय नमः
105। ॐ दयानिधये नमः
106। ॐ सर्वतीर्थात्मकाय नमः
107। ॐ सर्वग्रहरूपिणे नमः
108। ॐ परात्पराय नमः ||इति श्री कृष्ण अष्टोत्तरशतनामवळिः||
अर्थ
श्री कृष्ण अष्टोत्तर शतनामावलि भगवान श्री कृष्ण के 108 पवित्र नामों का एक संग्रह है। यह नामावलि भक्तों को कृष्ण के दिव्य स्वरूप, उनकी लीलाओं और महिमा का स्मरण करने का एक श्रेष्ठ माध्यम है। प्रत्येक नाम कृष्ण के अनंत गुणों, रूपों और कार्यों को महिमामंडित करता है, और भक्तों को आध्यात्मिक उन्नति की ओर ले जाता है। यह केवल नामों की एक सूची नहीं, बल्कि भगवान के साथ एक गहरा संबंध स्थापित करने वाला दिव्य सेतु है।
इस नामावलि का जप करने से केवल कृष्ण का स्मरण ही नहीं होता, बल्कि उनकी सर्वव्यापकता और सर्वशक्तिमानता का भी अनुभव होता है। कृष्ण परब्रह्म स्वरूप हैं, जो सृष्टि, स्थिति और संहार के कारण हैं। उनके नामों का उच्चारण करने से हमारा मन शुद्ध होता है, नकारात्मक भावनाएँ दूर होती हैं और हमें दिव्य शक्ति के साथ संबंध स्थापित करने में मदद मिलती है। यह पवित्र नामावलि भक्तों के हृदय में अचल भक्ति और श्रद्धा को जागृत करती है।
इस नामावलि में श्री कृष्ण के अवतार की महिमा, उनकी बाल लीलाएँ, गोपिकाओं की भक्ति, धर्म की स्थापना के लिए किए गए कार्य, भगवद्गीता के माध्यम से दिया गया ज्ञानोपदेश और जगद्गुरु के रूप का सुंदर वर्णन किया गया है। प्रत्येक नाम कृष्ण के एक विशिष्ट गुण को उजागर करता है – उनकी दया, अतुलनीय प्रेम, असीम ज्ञान, अचल शक्ति, अति सुंदर रूप और भक्तों की रक्षा करने की क्षमता। उदाहरण के लिए, 'लीलामानुषविग्रहाय' का अर्थ है जिन्होंने मानव रूप में लीलाएं कीं, 'सच्चिदानंदविग्रहाय' का अर्थ है जो सत्-चित्-आनंद स्वरूप हैं, और 'नवनीत नटाय' का अर्थ है माखन चुराने वाले बालक की लीलाओं का वर्णन करता है।
इन पवित्र नामों का निरंतर भक्ति और श्रद्धा से जप करने से भक्त भगवान कृष्ण की कृपा दृष्टि का पात्र बनता है। यह मन को शांति प्रदान करता है, भय को दूर करता है, जन्म-जन्मांतर के पापों का क्षय करता है और भक्ति की शक्ति को बढ़ाता है। कृष्ण के साथ व्यक्तिगत संबंध स्थापित करने का यह एक अत्यंत प्रभावी मार्ग है, जो भक्त को “सच्चिदानंद विग्रह” कृष्ण के समीप ले जाता है।
लाभ (Benefits):
- मानसिक शांति: नामस्मरण से मन एकाग्र होता है, चिंताएँ दूर होती हैं और आंतरिक शांति तथा सुकून प्राप्त होता है।
- भय निवारण: कृष्ण की सुरक्षा के आश्वासन से सभी भय, चिंताएँ और नकारात्मक शक्तियाँ दूर हो जाती हैं, जिससे आत्मविश्वास बढ़ता है।
- पाप क्षय: भगवान के नामस्मरण से अनजाने में किए गए पापों का नाश होता है और आत्मा शुद्ध होकर आध्यात्मिक पवित्रता प्राप्त करती है।
- भक्ति वृद्धि: कृष्ण के साथ भक्ति का संबंध मजबूत होता है, जिससे आध्यात्मिक प्रगति होती है और मोक्ष मार्ग के करीब पहुँचने में सहायता मिलती है।
- शुभ फल: घर में या मंदिर में इन नामों का भक्तिपूर्वक जप करने से आर्थिक उन्नति, उत्तम स्वास्थ्य, आनंदमय जीवन और सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्री कृष्ण अष्टोत्तर शतनामावलि क्या है?
इस नामावलि का जप कब और कैसे करना चाहिए?
श्री कृष्ण अष्टोत्तर शतनामावलि के जप से क्या लाभ मिलते हैं?
इस नामावलि का जप कौन कर सकता है?
इस नामावलि का जप कितनी बार करना चाहिए?
श्री कृष्ण अष्टोत्तर शतनामावलि का उद्गम कहाँ से हुआ है?
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