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श्री दामोदर अष्टोत्तर शतनामावळि

संपादन: अद्यतन
अष्टोत्तरश्री कृष्ण
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1। ॐ विष्णवे नमः
2। ॐ लक्ष्मीपतये नमः
3। ॐ कृष्णाय नमः
4। ॐ वैकुंठाय नमः
5। ॐ गरुडध्वजाय नमः
6। ॐ परब्रह्मणे नमः
7। ॐ जगन्नाथाय नमः
8। ॐ वासुदेवाय नमः
9। ॐ त्रिविक्रमाय नमः
10। ॐ हंसाय नमः 
11। ॐ शुभप्रदाय नमः
12। ॐ माधवाय नमः
13। ॐ पद्मनाभाय नमः
14। ॐ हृषीकेशाय नमः
15। ॐ सनातनाय नमः
16। ॐ नारायणाय नमः
17। ॐ मधुरापतये नमः
18। ॐ तार्क्ष्यवाहनाय नमः
19। ॐ दैत्यांतकाय नमः
20। ॐ शिंशुमाराय नमः
21। ॐ पुंडरीकाक्षाय नमः
22। ॐ स्थितिकर्त्रे नमः
23। ॐ परात्पराय नमः
24। ॐ वनमालिने नमः
25। ॐ यज्ञरूपाय नमः
26। ॐ चक्ररूपाय नमः
27। ॐ गदाधाराय नमः
28। ॐ केशवाय नमः
29। ॐ माधवाय नमः
30। ॐ भूतवासाय नमः
31। ॐ समुद्रमथनाय नमः
32। ॐ हरये नमः
33। ॐ गोविंदाय नमः
34। ॐ ब्रह्मजनकाय नमः
35। ॐ कैटभासुरमर्दनाय नमः
36। ॐ श्रीकराय नमः
37। ॐ कामजनकाय नमः
38। ॐ शेषशायिने नमः
39। ॐ चतुर्भुजाय नमः
40। ॐ पांचजन्यधराय नमः
41। ॐ श्रीमते नमः
42। ॐ शार्ङ्गपाणये नमः
43। ॐ जनार्दनाय नमः
44। ॐ पीतांबरधराय नमः
45। ॐ देवाय नमः
46। ॐ सूर्यचंद्रलोचनाय नमः
47। ॐ मत्स्यरूपाय नमः
48। ॐ कूर्मतनवे नमः
49। ॐ क्रोडरूपाय नमः
50। ॐ हृषीकेशाय नमः 
51। ॐ वामनाय नमः
52। ॐ भार्गवाय नमः
53। ॐ रामाय नमः
54। ॐ हलिने नमः
55। ॐ कल्किने नमः
56। ॐ हयाननाय नमः
57। ॐ विश्वंभराय नमः
58। ॐ आदिदेवाय नमः
59। ॐ श्रीधराय नमः
60। ॐ कपिलाय नमः
61। ॐ धृवाय नमः
62। ॐ दत्तात्रेयाय नमः
63। ॐ अच्युताय नमः
64। ॐ अनंताय नमः
65। ॐ मुकुंदाय नमः
66। ॐ रथवाहनाय नमः
67। ॐ धन्वंतरये नमः
68। ॐ श्रीनिवासाय नमः
69। ॐ प्रद्युम्नाय नमः
70। ॐ पुरुषोत्तमाय नमः
71। ॐ श्रीवत्सकौस्तुभधराय नमः
72। ॐ मुरारातये नमः
73। ॐ अधोक्षजाय नमः
74। ॐ ऋषभाय नमः
75। ॐ मोहिनीरूपधराय नमः
76। ॐ संकर्षणाय नमः
77। ॐ पृधवे नमः
78। ॐ क्षीराब्दिशायिने नमः
79। ॐ भूतात्मने नमः
80। ॐ अनिरुद्धाय नमः
81। ॐ भक्तवत्सलाय नमः
82। ॐ नारायणाय नमः
83। ॐ गजेंद्रवरदाय नमः
84। ॐ त्रिधाम्ने नमः
85। ॐ प्रह्लाद परिपालनाय नमः
86। ॐ श्वेतद्वीपवासिने नमः
87। ॐ अव्ययाय नमः
88। ॐ सूर्यमंडलमध्यगाय नमः
89। ॐ आदिमध्यांतरहिताय नमः
90। ॐ भगवते नमः
91। ॐ शंकरप्रियाय नमः
92। ॐ नीलतनवे नमः
93। ॐ धराकांताय नमः
94। ॐ वेदात्मने नमः
95। ॐ बादरायणाय नमः
96। ॐ भागीरथीजन्मभूपादपद्माय नमः
97। ॐ सतांप्रभवे नमः
98। ॐ प्राशंवे नमः
99। ॐ विभवे नमः
100। ॐ घनश्यामाय नमः
101। ॐ जगत्कारणाय नमः
102। ॐ प्रियाय नमः
103। ॐ दशावताराय नमः
104। ॐ शांतात्मने नमः
105। ॐ लीलामानुषविग्रहाय नमः
106। ॐ दामोदराय नमः
107। ॐ विराड्रूपाय नमः
108। ॐ भूतभव्यभवत्प्रभवे नमः ||इति श्री दामोदर अष्टोत्तर शतनामावळि संपूर्णं  ||

अर्थ

श्री दामोदर अष्टोत्तर शतनामावली भगवान विष्णु के दामोदर रूप को समर्पित 108 पवित्र नामों का संग्रह है। "दामोदर" शब्द भगवान श्रीकृष्ण के उस दिव्य लीला को दर्शाता है, जब उनकी माता यशोदा ने उन्हें प्रेमवश रस्सी से बांध दिया था। यह लीला इस बात का प्रतीक है कि अनंत और सर्वशक्तिमान परमेश्वर भी अपने भक्तों के शुद्ध प्रेम के बंधन में बंध जाते हैं। प्रत्येक नाम उनके दिव्य गुणों, अवतारों, करुणा, सृष्टि के संरक्षण और भक्तों पर उनकी असीम कृपा को दर्शाता है। यह नामावली केवल स्तुति नहीं, बल्कि भगवान की अनंत महिमा का ध्यान करने का एक शक्तिशाली माध्यम है।

इन पवित्र नामों का जाप करने से मन विनम्रता से भर जाता है, पापों का नाश होता है और आत्मा में शांति, ज्ञान तथा भक्ति की वृद्धि होती है। भगवान विष्णु का दामोदर स्वरूप भक्त के जीवन में अनुशासन, भक्ति और धर्म के मार्ग का पालन करने के लिए प्रेरणा देता है। ये नाम बताते हैं कि कैसे भगवान ब्रह्मांड के निर्माता, पालक और संहारक के रूप में कार्य करते हैं। मत्स्य, कूर्म, वराह, राम, कृष्ण और कल्कि जैसे उनके विभिन्न अवतारों की दिव्य शक्ति का अनुभव इस नामावली के माध्यम से किया जा सकता है।

प्रत्येक नाम भगवान के एक विशिष्ट गुण, लीला या स्वरूप को स्मरण कराता है। उदाहरण के लिए, 'ॐ विष्णवे नमः' का अर्थ है सर्वव्यापी भगवान को नमस्कार, 'ॐ लक्ष्मीपतये नमः' का अर्थ है धन की देवी लक्ष्मी के पति को नमस्कार, 'ॐ कृष्णाय नमः' का अर्थ है श्याम वर्ण या आकर्षक श्रीकृष्ण को नमस्कार। इस प्रकार, प्रत्येक नाम भगवान की अनंत महिमा को प्रकट करता है और भक्त को आध्यात्मिक उत्थान की ओर ले जाता है।

कार्तिक मास में या किसी भी शुभ दिन पर इस नामावली का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह पापों को दूर करता है और उच्च आध्यात्मिक चेतना को जागृत करता है। प्रत्येक नाम का उच्चारण दिव्य आशीर्वाद, आध्यात्मिक शक्ति और ईश्वर की निकटता प्रदान करता है। यह नामावली भक्त और परम सत्ता के बीच शाश्वत बंधन की याद दिलाते हुए एक ध्यान के रूप में कार्य करती है, जो भक्त के हृदय में शांति, करुणा और आनंद भर देती है।

लाभ (Benefits):

  • पाप मुक्ति: इन नामों का श्रद्धापूर्वक जाप करने से जाने-अनजाने में किए गए पापों का नाश होता है और मन शुद्ध होता है।
  • आध्यात्मिक उन्नति: दामोदर के नाम का स्मरण आध्यात्मिक चेतना को बढ़ाता है और भक्त को भगवान के करीब लाता है।
  • मानसिक शांति: नियमित जाप से मन शांत होता है, दुख और चिंताओं से मुक्ति मिलती है तथा आंतरिक शांति प्राप्त होती है।
  • भक्ति में वृद्धि: भगवान के गुणों का स्मरण करने से भक्ति भावना मजबूत होती है और ईश्वरीय प्रेम बढ़ता है।
  • इच्छाओं की पूर्ति: शुद्ध हृदय से इस नामावली का पाठ करने से भक्तों की सद्भावनाएं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं, ऐसी मान्यता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्री दामोदर अष्टोत्तर शतनामावली क्या है?
यह भगवान विष्णु के दामोदर स्वरूप को समर्पित 108 पवित्र नामों का संग्रह है। "दामोदर" शब्द श्रीकृष्ण की उस लीला को दर्शाता है जब उन्हें माता यशोदा ने प्रेमवश रस्सी से बांध दिया था, जो भक्तों के प्रति भगवान के प्रेम और उनके बंधन को दिखाता है।
इस नामावली का पाठ कब करना चाहिए?
इस नामावली का पाठ कार्तिक मास में या किसी भी शुभ दिन पर करना अत्यंत मंगलकारी माना जाता है। इसे प्रतिदिन नियमित रूप से जपने से आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होते हैं।
श्री दामोदर अष्टोत्तर शतनामावली के पाठ से क्या लाभ होते हैं?
इसके पाठ से पापों का नाश होता है, मन को शांति मिलती है, भक्ति बढ़ती है और आध्यात्मिक चेतना जागृत होती है। यह भगवान की निकटता का अनुभव करने में सहायक है।
कौन इस नामावली का पाठ कर सकता है?
किसी भी आयु या लिंग का व्यक्ति शुद्ध मन और भक्ति के साथ इस नामावली का पाठ कर सकता है। भगवान में विश्वास रखने वाला कोई भी भक्त इसे पढ़कर लाभ प्राप्त कर सकता है।
इस नामावली का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
सामान्यतः अष्टोत्तर शतनामावली का पाठ एक माला (108 बार) किया जाता है। हालाँकि, भक्त अपनी सुविधा के अनुसार दिन में एक या अधिक बार इसका पाठ कर सकते हैं।
श्री दामोदर अष्टोत्तर शतनामावली का स्रोत क्या है?
यह नामावली हिंदू धर्म के पुराणों और स्तोत्रों का हिस्सा है। यह भगवान विष्णु की महिमा का गुणगान करने वाले कई प्राचीन ग्रंथों में वर्णित है।

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