- ॐ तारिण्यै नमः
- ॐ तरळायै नमः
- ॐ तन्व्यै नमः
- ॐ तारायै नमः
- ॐ तरुणवल्लर्यै नमः
- ॐ ताररूपायै नमः
- ॐ तर्यै नमः
- ॐ श्यामायै नमः
- ॐ तनुक्षीणपयोधरायै नमः
- ॐ तुरीयायै नमः
- ॐ तरुणायै नमः
- ॐ तीव्रगमनायै नमः
- ॐ नीलवाहिन्यै नमः
- ॐ उग्रतारायै नमः
- ॐ जयायै नमः
- ॐ चंड्यै नमः
- ॐ श्रीमदेकजटाशिरायै नमः
- ॐ तरुण्यै नमः
- ॐ शांभव्यै नमः
- ॐ छिन्नफालायै नमः
- ॐ भद्रदायिन्यै नमः
- ॐ उग्रायै नमः
- ॐ उग्रप्रभायै नमः
- ॐ नीलायै नमः
- ॐ कृष्णायै नमः
- ॐ नीलसरस्वत्यै नमः
- ॐ द्वितीयायै नमः
- ॐ शोभनायै नमः
- ॐ नित्यायै नमः
- ॐ नवीनायै नमः
- ॐ नित्यभीषणायै नमः
- ॐ चंडिकायै नमः
- ॐ विजयाराध्यायै नमः
- ॐ देव्यै नमः
- ॐ गगनवाहिन्यै नमः
- ॐ अट्टहासायै नमः
- ॐ कराळास्यायै नमः
- ॐ चरास्यायै नमः
- ॐ ईशपूजितायै नमः
- ॐ सगुणायै नमः
- ॐ असगुणायै नमः
- ॐ आराध्यायै नमः
- ॐ हरींद्रादिप्रपूजितायै नमः
- ॐ रक्तप्रियायै नमः
- ॐ रक्ताक्ष्यै नमः
- ॐ रुधिरास्यविभूषितायै नमः
- ॐ बलिप्रियायै नमः
- ॐ बलिरतायै नमः
- ॐ दुर्गायै नमः
- ॐ बलवत्यै नमः
- ॐ बलायै नमः
- ॐ बलप्रियायै नमः
- ॐ बलरत्यै नमः
- ॐ बलरामप्रपूजितायै नमः
- ॐ अर्धकेशेश्वर्यै नमः
- ॐ केशायै नमः
- ॐ केशवायै नमः
- ॐ स्रग्विभूषितायै नमः
- ॐ पद्ममालायै नमः
- ॐ पद्माक्ष्यै नमः
- ॐ कामाख्यायै नमः
- ॐ गिरिनंदिन्यै नमः
- ॐ दक्षिणायै नमः
- ॐ दक्षायै नमः
- ॐ दक्षजायै नमः
- ॐ दक्षिणेरतायै नमः
- ॐ वज्रपुष्पप्रियायै नमः
- ॐ रक्तप्रियायै नमः
- ॐ कुसुमभूषितायै नमः
- ॐ माहेश्वर्यै नमः
- ॐ महादेवप्रियायै नमः
- ॐ पन्नगभूषितायै नमः
- ॐ इडायै नमः
- ॐ पिंगळायै नमः
- ॐ सुषुम्नाप्राणरूपिण्यै नमः
- ॐ गांधार्यै नमः
- ॐ पंचम्यै नमः
- ॐ पंचाननादिपरिपूजितायै नमः
- ॐ तथ्यविद्यायै नमः
- ॐ तथ्यरूपायै नमः
- ॐ तथ्यमार्गानुसारिण्यै नमः
- ॐ तत्त्वरूपायै नमः
- ॐ तत्त्वप्रियायै नमः
- ॐ तत्त्वज्ञानात्मिकायै नमः
- ॐ अनघायै नमः
- ॐ तांडवाचारसंतुष्टायै नमः
- ॐ तांडवप्रियकारिण्यै नमः
- ॐ तालनादरतायै नमः
- ॐ क्रूरतापिन्यै नमः
- ॐ तरणिप्रभायै नमः
- ॐ त्रपायुक्तायै नमः
- ॐ त्रपामुक्तायै नमः
- ॐ तर्पितायै नमः
- ॐ तृप्तिकारिण्यै नमः
- ॐ तारुण्यभावसंतुष्टायै नमः
- ॐ शक्तिभक्तानुरागिण्यै नमः
- ॐ शिवासक्तायै नमः
- ॐ शिवरत्यै नमः
- ॐ शिवभक्तिपरायणायै नमः
- ॐ ताम्रद्युत्यै नमः
- ॐ ताम्ररागायै नमः
- ॐ ताम्रपात्रप्रभोजिन्यै नमः
- ॐ बलभद्रप्रेमरतायै नमः
- ॐ बलिभुजे नमः
- ॐ बलिकल्पन्यै नमः
- ॐ रामप्रियायै नमः
- ॐ रामशक्त्यै नमः
- ॐ रामरूपानुकारिणी नमः
|| इति श्री ताराम्बा अष्टोत्तर शतनामावळि संपूर्णं ||
अर्थ
श्री तारा देवी अष्टोत्तर शतनामावली देवी तारा के 108 पवित्र नामों का संग्रह है, जो दस महाविद्याओं में से दूसरी हैं। 'तारा' शब्द का अर्थ 'तारा' या 'जो संसार सागर से पार उतारती है' होता है। यह स्तोत्र माँ तारा देवी के विभिन्न दिव्य गुणों, रूपों और शक्तियों का वर्णन करता है। तारा देवी को ज्ञान, वाणी और मोक्ष प्रदान करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। इस नामावली का पाठ भक्तों को माँ की कृपा प्राप्त करने, बाधाओं को दूर करने और आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने में सहायक होता है।
देवी तारा का प्रत्येक नाम उनकी अनंत शक्ति और करुणा को दर्शाता है। 'ॐ तारिण्यै नमः' यह दर्शाता है कि माँ भक्तों को सभी संकटों से पार करती हैं, जबकि 'ॐ नीलसरस्वत्यै नमः' ज्ञान और बुद्धि की देवी सरस्वती के नीले रूप को इंगित करता है। 'ॐ उग्रतारायै नमः' नाम उनके उग्र स्वरूप को प्रतिबिंबित करता है, जो दुष्ट शक्तियों का नाश कर धर्म की रक्षा करता है। 'तुरीयायै' नाम यह बताता है कि वे जाग्रत, स्वप्न और सुषुप्ति जैसी तीन अवस्थाओं से परे तुरीयावस्था का स्वरूप हैं, जो आध्यात्मिक मुक्ति का प्रतीक है।
यह अष्टोत्तर शतनामावली देवी तारा के सौम्य और उग्र दोनों स्वरूपों की आराधना करती है। वे 'तरुणवल्लरी' के समान सदैव युवा और आकर्षक हैं, लेकिन साथ ही 'करालास्यायै' के समान भयानक मुख वाली होकर दुष्टों का संहार करती हैं। भक्त उन्हें 'ईशपूजिता' (ईश्वर द्वारा पूजित) और 'शांभवी' (शंभु की पत्नी) के रूप में पूजते हैं। इन नामों के जाप से मन शुद्ध होता है, नकारात्मक ऊर्जाएं दूर होती हैं और आध्यात्मिक प्रगति संभव होती है। तारा देवी केवल संकटों से उबारने वाली ही नहीं, बल्कि भक्तों को सही मार्ग दिखाकर ज्ञानोदय की ओर ले जाने वाली मार्गदर्शक भी हैं।
देवी तारा को कालचक्र की अधिष्ठात्री देवी भी माना जाता है। उनके 'नित्यायै' और 'नवीन्यायै' नाम यह दर्शाते हैं कि वे सनातन होते हुए भी प्रत्येक क्षण नए रूप में प्रकट होती हैं। यह नामावली केवल देवी की स्तुति ही नहीं करती, बल्कि साधक को संसार की नश्वरता से परे दिव्य चेतना तक पहुँचने के लिए प्रेरित करती है। देवी तारा के दिव्य नामों का भक्तिपूर्वक पाठ करने से भक्तों को आंतरिक शक्ति, साहस और निर्भयता प्राप्त होती है। यह भौतिक और आध्यात्मिक दोनों क्षेत्रों में सफलता दिलाता है।
लाभ (Benefits):
- संकटों से मुक्ति: तारा देवी अपने भक्तों को सभी प्रकार के कष्टों, भय और दुर्भाग्य से बचाती हैं।
- ज्ञान और बुद्धि में वृद्धि: 'नीलसरस्वती' रूप में देवी तारा की आराधना करने से ज्ञान, वाणी की शक्ति और शिक्षा में प्रगति प्राप्त होती है।
- नकारात्मक शक्तियों का नाश: उनका उग्र स्वरूप बुरी शक्तियों, जादू-टोना और शत्रुओं के प्रभाव से सुरक्षा प्रदान करता है।
- मोक्ष और आध्यात्मिक उन्नति: माँ तारा देवी आध्यात्मिक मार्ग पर चलने वालों को ज्ञानोदय और मोक्ष प्राप्त करने में सहायता करती हैं।
- आत्मविश्वास और साहस: इस नामावली का पाठ करने से भक्तों को अडिग आत्मविश्वास और किसी भी चुनौती का सामना करने का साहस प्राप्त होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्री तारा देवि अष्टोत्तर शतनामावळि क्या है?
इस नामावली का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
श्री तारा अष्टोत्तर शतनामावली के पाठ से क्या प्रमुख लाभ मिलते हैं?
इस नामावली का पाठ कौन कर सकता है?
इस स्तोत्र का कितनी बार पाठ करना चाहिए?
श्री तारा अष्टोत्तर शतनामावली का मूल क्या है?
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