- ॐ महामायायै नमः
- ॐ महाविद्यायै नमः
- ॐ महायोगायै नमः
- ॐ महोत्कटायै नमः
- ॐ माहेश्वर्यै नमः
- ॐ कुमार्यै नमः
- ॐ ब्रह्माण्यै नमः
- ॐ ब्रह्मरूपिण्यै नमः
- ॐ वागीश्वर्यै नमः
- ॐ योगरूपायै नमः
- ॐ योगिन्यै नमः
- ॐ कोटिसेवितायै नमः
- ॐ जयायै नमः
- ॐ विजयायै नमः
- ॐ कौमार्यै नमः
- ॐ सर्वमंगळायै नमः
- ॐ पिंगळायै नमः
- ॐ विलास्यै नमः
- ॐ ज्वालिन्यै नमः
- ॐ ज्वालरूपिण्यै नमः
- ॐ ईश्वर्यै नमः
- ॐ क्रूरसंहार्यै नमः
- ॐ कुलमार्गप्रदायिन्यै नमः
- ॐ वैष्णव्यै नमः
- ॐ सुभगाकार्यै नमः
- ॐ सुकुल्यायै नमः
- ॐ कुलपूजितायै नमः
- ॐ वामांगायै नमः
- ॐ वामचारायै नमः
- ॐ वामदेवप्रियायै नमः
- ॐ डाकिन्यै नमः
- ॐ योगिनीरूपायै नमः
- ॐ भूतेश्यै नमः
- ॐ भूतनायिकायै नमः
- ॐ पद्मावत्यै नमः
- ॐ पद्मनेत्रायै नमः
- ॐ प्रबुद्धायै नमः
- ॐ सरस्वत्यै नमः
- ॐ भूचर्यै नमः
- ॐ खेचर्यै नमः
- ॐ मायायै नमः
- ॐ मातंग्यै नमः
- ॐ भुवनेश्वर्यै नमः
- ॐ कांतायै नमः
- ॐ पतिव्रतायै नमः
- ॐ साक्ष्यै नमः
- ॐ सुचक्षवे नमः
- ॐ कुंडवासिन्यै नमः
- ॐ उमायै नमः
- ॐ कुमार्यै नमः
- ॐ लोकेश्यै नमः
- ॐ सुकेश्यै नमः
- ॐ पद्मरागिण्यै नमः
- ॐ इंद्राण्यै नमः
- ॐ ब्रह्मचंडाल्यै नमः
- ॐ चंडिकायै नमः
- ॐ वायुवल्लभायै नमः
- ॐ सर्वधातुमयीमूर्त्यै नमः
- ॐ जलरूपायै नमः
- ॐ जलोदर्यै नमः
- ॐ आकाश्यै नमः
- ॐ रणगायै नमः
- ॐ नृकपालविभूषणायै नमः
- ॐ नर्मदायै नमः
- ॐ मोक्षदायै नमः
- ॐ कामधर्मार्थदायिन्यै नमः
- ॐ गायत्र्यै नमः
- ॐ सावित्र्यै नमः
- ॐ त्रिसंध्यायै नमः
- ॐ तीर्थगामिन्यै नमः
- ॐ अष्टम्यै नमः
- ॐ नवम्यै नमः
- ॐ दशम्यै नमः
- ॐ एकादश्यै नमः
- ॐ पौर्णमास्यै नमः
- ॐ कुहूरूपायै नमः
- ॐ तिथिमूर्तिस्वरूपिण्यै नमः
- ॐ सुरारिनाशकार्यै नमः
- ॐ उग्ररूपायै नमः
- ॐ वत्सलायै नमः
- ॐ अनलायै नमः
- ॐ अर्धमात्रायै नमः
- ॐ अरुणायै नमः
- ॐ पीतलोचनायै नमः
- ॐ लज्जायै नमः
- ॐ सरस्वत्यै नमः
- ॐ विद्यायै नमः
- ॐ भवान्यै नमः
- ॐ पापनाशिन्यै नमः
- ॐ नागपाशधरायै नमः
- ॐ मूर्त्यै नमः
- ॐ अगाधायै नमः
- ॐ धृतकुंडलायै नमः
- ॐ क्षतरूप्यै नमः
- ॐ क्षयकर्यै नमः
- ॐ तेजस्विन्यै नमः
- ॐ शुचिस्मितायै नमः
- ॐ अव्यक्तायै नमः
- ॐ व्यक्तलोकायै नमः
- ॐ शंभुरूपायै नमः
- ॐ मनस्विन्यै नमः
- ॐ मातंग्यै नमः
- ॐ मत्तमातंग्यै नमः
- ॐ महादेवप्रियायै नमः
- ॐ दैत्यहन्त्र्यै नमः
- ॐ वाराह्यै नमः
- ॐ सर्वशास्त्रमय्यै नमः
- ॐ शुभायै नमः
|| इति श्री भुवनेश्वरी अष्टोत्तर शतनामावळि संपूर्णं ||
अर्थ
श्री भुवनेश्वरी अष्टोत्तरशतनामवलिः देवी भुवनेश्वरी के 108 पवित्र नामों का संग्रह है। दशमहाविद्याओं में चौथी, श्री भुवनेश्वरी समस्त ब्रह्मांड की अधिष्ठात्री देवी हैं, जो सृष्टि, स्थिति और संहार की मूल शक्ति हैं। 'भुवनेशी' का अर्थ है समस्त भुवनों की स्वामिनी, यानी इस ब्रह्मांड की रानी। यह नामावली उनके विभिन्न रूपों, गुणों और शक्तियों का विस्तृत वर्णन करती है। इस स्तोत्र का भक्तिपूर्वक पाठ करने से भक्तों को शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उत्थान प्राप्त होता है।
प्रत्येक नाम देवी की असीम शक्ति, ज्ञान और करुणा को दर्शाता है। 'महामाया' का अर्थ है वह महान शक्ति जो ब्रह्मांड का निर्माण और नियंत्रण करती है, भक्तों को माया के बंधन से मुक्त करती है। 'महाविद्या' परम ज्ञान का स्वरूप है, जो अज्ञानता को दूर कर ज्ञान का प्रकाश प्रदान करती है। 'माहेश्वरी', 'ब्रह्माणी', और 'वैष्णवी' जैसे नाम त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) की शक्ति के रूप में देवी की सर्वव्यापकता को सूचित करते हैं। 'योगरूपा' और 'योगिनी' नाम देवी को योग की मूलभूत शक्ति और योगियों की इष्टदेवी के रूप में दर्शाते हैं।
इस नामावली में 'जया', 'विजया', और 'सर्वमंगला' नाम विजय, सफलता और सभी शुभता प्रदान करने की उनकी क्षमता को उजागर करते हैं। 'पिंगला', 'विलासी', 'ज्वालिनी', 'ज्वालरूपिणी' जैसे नाम देवी के तेजस्वी और प्रकाशमान स्वरूप का वर्णन करते हैं। 'क्रूरसंहारी' का अर्थ है दुष्ट शक्तियों और बाधाओं का नाश करने वाली देवी। 'भूतेशी' और 'भूतनायिका' नाम समस्त भूतगणों पर उनके अधिकार को इंगित करते हैं, जो उनके रक्षात्मक गुण को दर्शाता है।
'पद्मावती' और 'सरस्वती' नाम धन, समृद्धि और ज्ञान की प्रदात्री के रूप में देवी के गुणों को दर्शाते हैं। 'वामांगा', 'वामाचारा', 'वामदेवप्रिया' जैसे नाम तांत्रिक परंपराओं में देवी के महत्व को सूचित करते हैं। इन नामों के माध्यम से भक्त देवी के विभिन्न गुणों का मनन कर सकते हैं और उनके साथ गहरा आध्यात्मिक संबंध स्थापित कर सकते हैं, जिससे जीवन के सभी क्षेत्रों में देवी की कृपा प्राप्त होती है।
लाभ (Benefits):
- मानसिक शांति और स्थिरता: देवी के 108 पवित्र नामों का निरंतर जाप करने से मन की चिंताएँ और तनाव दूर होते हैं, जिससे आंतरिक शांति और मानसिक स्थिरता प्राप्त होती है।
- ज्ञान और बुद्धि: 'महाविद्या' और 'सरस्वती' के रूप में देवी भक्तों को अज्ञानता से मुक्ति दिलाती हैं और ज्ञान, बुद्धि तथा निर्णय लेने की स्पष्टता प्रदान करती हैं।
- समृद्धि और ऐश्वर्य: 'पद्मावती' के रूप में देवी धन, समृद्धि और ऐश्वर्य प्रदान करती हैं, जिससे जीवन में सुख, संतोष और भौतिक कल्याण बढ़ता है।
- शत्रु बाधा निवारण और सुरक्षा: 'क्रूरसंहारी' और 'भूतेशी' के रूप में देवी सभी दुष्ट शक्तियों, शत्रुओं और नकारात्मक प्रभावों से भक्तों की रक्षा करती हैं और उन्हें विजय प्रदान करती हैं।
- आध्यात्मिक प्रगति और मोक्ष: इस नामावली का नियमित पाठ देवी के साथ गहरा संबंध स्थापित करने, आध्यात्मिक प्रगति प्राप्त करने और अंततः मोक्ष मार्ग पर आगे बढ़ने में सहायक है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्री भुवनेश्वरी अष्टोत्तरशतनामवलिः क्या है?
इस नामावली का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
श्री भुवनेश्वरी अष्टोत्तरशतनामवलिः के पाठ के क्या लाभ हैं?
इस नामावली का पाठ कौन कर सकता है?
इस नामावली का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
श्री भुवनेश्वरी अष्टोत्तरशतनामवलिः का उद्गम क्या है?
टिप्पणियाँ
टिप्पणी लिखने के लिए लॉगिन करें
टिप्पणियाँ लोड हो रही हैं...
