- ॐ श्री महामत्तमातङ्गिन्यै नमः
- ॐ श्री सिद्धिरूपायै नमः
- ॐ श्री योगिन्यै नमः
- ॐ श्री भद्रकाल्यै नमः
- ॐ श्री रमायै नमः
- ॐ श्री भवान्यै नमः
- ॐ श्री भयप्रीतिदायै नमः
- ॐ श्री भूतियुक्तायै नमः
- ॐ श्री भवाराधितायै नमः
- ॐ श्री भूतिसम्पत्तिकर्यै नमः
- ॐ श्री जनाधीशमात्रे नमः
- ॐ श्री धनागारदृष्ट्यै नमः
- ॐ श्री धनेशार्चितायै नमः
- ॐ श्री धीवरायै नमः
- ॐ श्री धीवराङ्ग्यै नमः
- ॐ श्री प्रकृष्टायै नमः
- ॐ श्री प्रभारूपिण्यै नमः
- ॐ श्री कामरूपायै नमः
- ॐ श्री प्रहृष्टायै नमः
- ॐ श्री महाकीर्तिदायै नमः
- ॐ श्री कर्णनाल्यै नमः
- ॐ श्री काल्यै नमः
- ॐ श्री भगाघोररूपायै नमः
- ॐ श्री भगाङ्ग्यै नमः
- ॐ श्री भगावाह्यै नमः
- ॐ श्री भगप्रीतिदायै नमः
- ॐ श्री भिमरूपायै नमः
- ॐ श्री भवानीमहाकौशिक्यै नमः
- ॐ श्री कोशपूर्णायै नमः
- ॐ श्री किशोर्यै नमः
- ॐ श्री किशोरप्रियानन्दईहायै नमः
- ॐ श्री महाकारणायै नमः
- ॐ श्री कारणायै नमः
- ॐ श्री कर्मशीलायै नमः
- ॐ श्री कपाल्यै नमः
- ॐ श्री प्रसिद्धायै नमः
- ॐ श्री महासिद्धखण्डायै नमः
- ॐ श्री मकारप्रियायै नमः
- ॐ श्री मानरूपायै नमः
- ॐ श्री महेश्यै नमः
- ॐ श्री महोल्लासिन्यै नमः
- ॐ श्री लास्यलीलालयाङ्ग्यै नमः
- ॐ श्री क्षमायै नमः
- ॐ श्री क्षेमशीलायै नमः
- ॐ श्री क्षपाकारिण्यै नमः
- ॐ श्री अक्षयप्रीतिदाभूतियुक्ताभवान्यै नमः
- ॐ श्री भवाराधिताभूतिसत्यात्मिकायै नमः
- ॐ श्री प्रभोद्भासितायै नमः
- ॐ श्री भानुभास्वत्करायै नमः
- ॐ श्री चलत्कुण्डलायै नमः
- ॐ श्री कामिनीकान्तयुक्तायै नमः
- ॐ श्री कपालाऽचलायै नमः
- ॐ श्री कालकोद्धारिण्यै नमः
- ॐ श्री कदम्बप्रियायै नमः
- ॐ श्री कोटर्यै नमः
- ॐ श्री कोटदेहायै नमः
- ॐ श्री क्रमायै नमः
- ॐ श्री कीर्तिदायै नमः
- ॐ श्री कर्णरूपायै नमः
- ॐ श्री काक्ष्म्यै नमः
- ॐ श्री क्षमाङ्यै नमः
- ॐ श्री क्षयप्रेमरूपायै नमः
- ॐ श्री क्षपायै नमः
- ॐ श्री क्षयाक्षायै नमः
- ॐ श्री क्षयाह्वायै नमः
- ॐ श्री क्षयप्रान्तरायै नमः
- ॐ श्री क्षवत्कामिन्यै नमः
- ॐ श्री क्षारिण्यै नमः
- ॐ श्री क्षीरपूषायै नमः
- ॐ श्री शिवाङ्ग्यै नमः
- ॐ श्री शाकम्भर्यै नमः
- ॐ श्री शाकदेहायै नमः
- ॐ श्री महाशाकयज्ञायै नमः
- ॐ श्री फलप्राशकायै नमः
- ॐ श्री शकाह्वाशकाख्याशकायै नमः
- ॐ श्री शकाक्षान्तरोषायै नमः
- ॐ श्री सुरोषायै नमः
- ॐ श्री सुरेखायै नमः
- ॐ श्री महाशेषयज्ञोपवीतप्रियायै नमः
- ॐ श्री जयन्तीजयाजाग्रतीयोग्यरूपायै नमः
- ॐ श्री जयाङ्गायै नमः
- ॐ श्री जपध्यानसन्तुष्टसंज्ञायै नमः
- ॐ श्री जयप्राणरूपायै नमः
- ॐ श्री जयस्वर्णदेहायै नमः
- ॐ श्री जयज्वालिन्यै नमः
- ॐ श्री यामिन्यै नमः
- ॐ श्री याम्यरूपायै नमः
- ॐ श्री जगन्मातृरूपायै नमः
- ॐ श्री जगद्रक्षणायै नमः
- ॐ श्री स्वधावौषडन्तायै नमः
- ॐ श्री विलम्बाविलम्बायै नमः
- ॐ श्री षडङ्गायै नमः
- ॐ श्री महालम्बरूपासिहस्ताप्दाहारिण्यै नमः
- ॐ श्री महामङ्गलायै नमः
- ॐ श्री मङ्गलप्रेमकीर्त्यै नमः
- ॐ श्री निशुम्भक्षिदायै नमः
- ॐ श्री शुम्भदर्पत्वहायै नमः
- आनन्दबीजादिस्वरूपायै नमः
- ॐ श्री मुक्तिस्वरूपायै नमः
- ॐ श्री चण्डमुण्डापदायै नमः
- ॐ श्री मुख्यचण्डायै नमः
- ॐ श्री प्रचण्डाऽप्रचण्डायै नमः
- ॐ श्री महाचण्डवेगायै नमः
- ॐ श्री चलच्चामरायै नमः
- ॐ श्री चामराचन्द्रकीर्त्यै नमः
- ॐ श्री सुचामिकरायै नमः
- ॐ श्री चित्रभूषोज्ज्वलाङ्ग्यै नमः
- ॐ श्री सुसङ्गीतगीतायै नमः
|| श्री मातंगि अप्टोत्तर शतनामावळि समाप्तं ||
अर्थ
श्री मातंगी अष्टोत्तरशतनामावली दश महाविद्याओं में से एक, देवी मातंगी के 108 पवित्र नामों का स्तोत्र है। मातंगी देवी को सरस्वती का तांत्रिक रूप माना जाता है, जो वाणी, संगीत, कला, ज्ञान और राजसी शक्ति की अधिष्ठात्री देवी हैं। यह नामावली भक्तों को देवी के संपूर्ण स्वरूप को जानने और उनकी दिव्य शक्ति से जुड़ने का एक अत्यंत शक्तिशाली माध्यम है। इस नामावली का भक्तिपूर्वक पाठ करने से भक्त मातंगी देवी की कृपा प्राप्त करते हैं और जीवन में सफलता व समृद्धि पाते हैं।
इस अष्टोत्तरशतनामावली का प्रत्येक नाम मातंगी देवी के विभिन्न गुणों, शक्तियों और दिव्य स्वरूपों का वर्णन करता है। इन नामों का भक्तिपूर्वक स्मरण करने से मन शुद्ध होता है, आंतरिक शक्ति बढ़ती है और देवी के साथ आध्यात्मिक संबंध स्थापित करने में सहायता मिलती है। यह केवल नामों का संग्रह नहीं, बल्कि देवी के संपूर्ण स्वरूप को जानने का एक साधन है। मातंगी देवी अपने भक्तों को वाक् सिद्धि, ज्ञान, कलात्मक कौशल और बाधाओं से मुक्ति प्रदान करती हैं, ऐसा माना जाता है।
स्तोत्र में आने वाले कुछ प्रमुख नाम मातंगी देवी के विविध स्वरूपों को उजागर करते हैं: "ॐ श्री महामत्तमातङ्गिण्यै नमः" का अर्थ है अत्यंत प्रबल और आनंदमयी मातंगी देवी। "ॐ श्री सिद्धिरूपायै नमः" सभी सिद्धियों को प्रदान करने वाली देवी को इंगित करता है। "ॐ श्री योगिन्यै नमः" योग शक्तियों की अधिष्ठात्री देवी योगिनी का दर्शन कराता है। "ॐ श्री भद्रकाल्यै नमः" नाम मंगलकारी काली रूप वाली देवी, जो दुष्ट शक्तियों का नाश करती हैं, उनकी स्तुति करता है। "ॐ श्री रमायै नमः" और "ॐ श्री भवान्यै नमः" जैसे नाम मातंगी के अन्य देवियों जैसे लक्ष्मी और भवानी के साथ संबंध को दर्शाते हैं, उनकी समृद्धि और संरक्षणात्मक गुणों का बखान करते हैं।
आगे बढ़ते हुए, "ॐ श्री भूतिसम्पत्तिकर्यै नमः" नाम ऐश्वर्य और धन-संपत्ति प्रदान करने वाली देवी का वर्णन करता है। "ॐ श्री जनाधीशमात्रे नमः" लोगों और शासकों की माता के रूप में मातंगी की स्तुति करता है। "ॐ श्री धनागारदृष्ट्यै नमः" उन्हें धन के भंडार प्रदान करने वाली दृष्टि वाली के रूप में पहचानता है। "ॐ श्री धीवरायै नमः" और "ॐ श्री धीवराङ्ग्यै नमः" जैसे नाम बुद्धिमानों और ज्ञान के अन्वेषकों के प्रति उनके अनुग्रह को दर्शाते हैं। "ॐ श्री कामरूपायै नमः" उन्हें इच्छानुसार रूप धारण करने वाली और इच्छाओं को पूर्ण करने वाली के रूप में पूजता है। अंततः, "ॐ श्री महाकीर्तिदायै नमः" नाम उन्हें महान कीर्ति और यश प्रदान करने वाली के रूप में स्तुति करता है।
इस नामावली का निरंतर पाठ भक्तों को दिव्य अनुग्रह प्रदान करता है। मातंगी देवी के इन 108 नामों का निरंतर जप करने से भक्तों की सभी इच्छाएँ पूरी होती हैं और वे आध्यात्मिक तथा लौकिक दोनों स्तरों पर उन्नति प्राप्त करते हैं। मातंगी देवी की कृपा से जीवन सुगम होता है, बाधाएँ दूर होती हैं और अंततः मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह मन को शांति, शरीर को शक्ति और आत्मा को उत्थान प्रदान करने वाला एक पवित्र स्तोत्र है।
प्रयोजन (Benefits):
- वाक् सिद्धि और कला में निपुणता: मातंगी देवी वाणी और कलाओं की देवी हैं, अतः इस नामावली का पाठ करने से वाक्पटुता, संगीत, नृत्य और अन्य कलाओं में विशेषज्ञता प्राप्त होती है।
- ज्ञान और बुद्धि का विकास: देवी की कृपा से अध्ययन में रुचि बढ़ती है, ज्ञानार्जन आसान होता है और बुद्धि तीव्र होती है, प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता मिलती है।
- धन और समृद्धि: "धनागारदृष्ट्यै नमः" और "भूतिसम्पत्तिकर्यै नमः" जैसे नाम इंगित करते हैं कि इस नामावली के पाठ से आर्थिक स्थिति सुधरती है और समृद्धि प्राप्त होती है।
- शत्रु विजय और सुरक्षा: भद्रकाली रूप के नाम दर्शाते हैं कि दुष्ट शक्तियों और शत्रुओं से रक्षा मिलती है, जीवन में आने वाली बाधाएँ दूर होती हैं।
- आकर्षण शक्ति और राजसी गुण: मातंगी देवी राजविद्या की अधिष्ठात्री देवी हैं, इस नामावली का पाठ करने से समाज में सम्मान, आकर्षण शक्ति और नेतृत्व के गुण विकसित होते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्री मातंगी अष्टोत्तरशतनामावली क्या है?
इस स्तोत्र का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
श्री मातंगी अष्टोत्तरशतनामावली के पाठ के क्या लाभ हैं?
इस स्तोत्र का पाठ किसे करना चाहिए?
इस स्तोत्र का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
इस स्तोत्र का उद्गम या स्रोत क्या है?
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