श्री श्यामला सहस्रनाम स्तोत्रं
सर्वशृंगारशोभाढ्यां तुंगपीनपयोधरां |
गंगाधरप्रियां देवीं मातंगीं नौमि संततं || 1 ||
श्रीमद्वैकुंठनिलयं श्रीपतिं सिद्धसेवितं |
कदाचित्स्वप्रियं लक्ष्मीर्नारायणमपृच्छत || 2 ||
लक्ष्मीरुवाच |
किं जप्यं परमं नॄणां भोगमोक्षफलप्रदं |
सर्ववश्यकरं चैव सर्वैश्वर्यप्रदायकं || 3 ||
सर्वरक्षाकरं चैव सर्वत्र विजयप्रदं |
ब्रह्मज्ञानप्रदं पुंसां तन्मे ब्रूहि जनार्दन || 4 ||
भगवानुवाच |
नामसारस्तवं पुण्यं पठेन्नित्यं प्रयत्नतः |
तेन प्रीता श्यामलांबा त्वद्वशं कुरुते जगत् || 5 ||
तंत्रेषु ललितादीनां शक्तीनां नामकोशतः |
सारमुद्धृत्य रचितो नामसारस्तवो ह्ययं || 6 ||
नामसारस्तवं मह्यं दत्तवान् परमेश्वरः |
तव नामसहस्रं तत् श्यामलाया वदाम्यहं || 7 ||
अस्य श्रीश्यामलापरमेश्वरीनामसाहस्रस्तोत्रमाला मंत्रस्य, सदाशिव ऋषिः, अनुष्टुप्छंदः, श्रीराजराजेश्वरी श्यामला परमेश्वरी देवता, चतुर्विधपुरुषार्थसिद्ध्यर्थे नामपारायणे विनियोगः |
ध्यानं |
ध्यायेऽहं रत्नपीठे शुककलपठितं शृण्वतीं श्यामगात्रीं
न्यस्तैकांघ्रिं सरोजे शशिशकलधरां वल्लकीं वादयंतीं |
कल्हाराबद्धमौलिं नियमितलसच्चूलिकां रक्तवस्त्रां
मातंगीं भूषितांगीं मधुमदमुदितां चित्रकोद्भासिफालां ||
लमित्यादि पंचपूजां कुर्यात् |
अथ स्तोत्रं |
ॐ सौभाग्यलक्ष्मीः सौंदर्यनिधिः समरसप्रिया |
सर्वकल्याणनिलया सर्वेशी सर्वमंगळा || 1 ||
सर्ववश्यकरी सर्वा सर्वमंगळदायिनी |
सर्वविद्यादानदक्षा संगीतोपनिषत्प्रिया || 2 ||
सर्वभूतहृदावासा सर्वगीर्वाणपूजिता |
समृद्धा संगमुदिता सर्वलोकैकसंश्रया || 3 ||
सप्तकोटिमहामंत्रस्वरूपा सर्वसाक्षिणी |
सर्वांगसुंदरी सर्वगता सत्यस्वरूपिणी || 4 ||
समा समयसंवेद्या समयज्ञा सदाशिवा |
संगीतरसिका सर्वकलामयशुकप्रिया || 5 ||
चंदनालेपदिग्धांगी सच्चिदानंदरूपिणी |
कदंबवाटीनिलया कमलाकांतसेविता || 6 ||
कटाक्षोत्पन्नकंदर्पा कटाक्षितमहेश्वरा |
कल्याणी कमलासेव्या कल्याणाचलवासिनी || 7 ||
कांता कंदर्पजननी करुणारससागरा |
कलिदोषहरा काम्या कामदा कामवर्धिनी || 8 ||
कदंबकलिकोत्तंसा कदंबकुसुमप्रिया |
कदंबमूलरसिका कामाक्षी कमलानना || 9 ||
कंबुकंठी कलालापा कमलासनपूजिता |
कात्यायनी केलिपरा कमलाक्षसहोदरी || 10 ||
कमलाक्षी कलारूपा कोकाकारकुचद्वया |
कोकिला कोकिलारावा कुमारजननी शिवा || 11 ||
सर्वज्ञा संततोन्मत्ता सर्वैश्वर्यप्रदायिनी |
सुधाप्रिया सुराराध्या सुकेशी सुरसुंदरी || 12 ||
शोभना शुभदा शुद्धा शुद्धचित्तैकवासिनी |
वेदवेद्या वेदमयी विद्याधरगणार्चिता || 13 ||
वेदांतसारा विश्वेशी विश्वरूपा विरूपिणी |
विरूपाक्षप्रिया विद्या विंध्याचलनिवासिनी || 14 ||
वीणावादविनोदज्ञा वीणागानविशारदा |
वीणावती बिंदुरूपा ब्रह्माणी ब्रह्मरूपिणी || 15 ||
पार्वती परमाऽचिंत्या पराशक्तिः परात्परा |
परानंदा परेशानी परविद्या परापरा || 16 ||
भक्तप्रिया भक्तिगम्या भक्तानां परमा गतिः |
भव्या भवप्रिया भीरुर्भवसागरतारिणी || 17 ||
भयघ्नी भावुका भव्या भामिनी भक्तपालिनी |
भेदशून्या भेदहंत्री भावना मुनिभाविता || 18 ||
माया महेश्वरी मान्या मातंगी मलयालया |
महनीया मदोन्मत्ता मंत्रिणी मंत्रनायिका || 19 ||
महानंदा मनोगम्या मतंगकुलमंडना |
मनोज्ञा मानिनी माध्वी सिंधुमध्यकृतालया || 20 ||
मधुप्रीता नीलकचा माध्वीरसमदालसा |
पूर्णचंद्राभवदना पूर्णा पुण्यफलप्रदा || 21 ||
पुलोमजार्चिता पूज्या पुरुषार्थप्रदायिनी |
नारायणी नादरूपा नादब्रह्मस्वरूपिणी || 22 ||
नित्या नवनवाकारा नित्यानंदा निराकुला |
निटिलाक्षप्रिया नेत्री नीलेंदीवरलोचना || 23 ||
तमालकोमलाकारा तरुणी तनुमध्यमा |
तटित्पिशंगवसना तटित्कोटिसमद्युतिः || 24 ||
मधुरा मंगळा मेध्या मधुपानप्रिया सखी |
चित्कला चारुवदना सुखरूपा सुखप्रदा || 25 ||
कूटस्था कौलिनी कूर्मपीठस्था कुटिलालका |
शांता शांतिमती शांतिः श्यामला श्यामलाकृतिः || 26 ||
शंखिनी शंकरी शैवी शंखकुंडलमंडिता |
कुंददंता कोमलांगी कुमारी कुलयोगिनी || 27 ||
निगर्भयोगिनीसेव्या निरंतररतिप्रिया |
शिवदूती शिवकरी जटिला जगदाश्रया || 28 ||
शांभवी योगिनिलया परचैतन्यरूपिणी |
दहराकाशनिलया दंडिनीपरिपूजिता || 29 ||
संपत्करीगजारूढा सांद्रानंदा सुरेश्वरी |
चंपकोद्भासितकचा चंद्रशेखरवल्लभा || 30 ||
चारुरूपा चारुदती चंद्रिका शंभुमोहिनी |
विमला विदुषी वाणी कमला कमलासना || 31 ||
करुणापूर्णहृदया कामेशी कंबुकंधरा |
राजराजेश्वरी राजमातंगी राजवल्लभा || 32 ||
सचिवा सचिवेशानी सचिवत्वप्रदायिनी |
पंचबाणार्चिता बाला पंचमी परदेवता || 33 ||
उमा महेश्वरी गौरी संगीतज्ञा सरस्वती |
कविप्रिया काव्यकला कलौ सिद्धिप्रदायिनी || 34 ||
ललितामंत्रिणी रम्या ललिताराज्यपालिनी |
ललितासेवनपरा ललिताज्ञावशंवदा || 35 ||
ललिताकार्यचतुरा ललिताभक्तपालिनी |
ललितार्धासनारूढा लावण्यरसशेवधिः || 36 ||
रंजनी लालितशुका लसच्चूलीवरान्विता |
रागिणी रमणी रामा रती रतिसुखप्रदा || 37 ||
भोगदा भोग्यदा भूमिप्रदा भूषणशालिनी |
पुण्यलभ्या पुण्यकीर्तिः पुरंदरपुरेश्वरी || 38 ||
भूमानंदा भूतिकरी क्लींकारी क्लिन्नरूपिणी |
भानुमंडलमध्यस्था भामिनी भारती धृतिः || 39 ||
नारायणार्चिता नाथा नादिनी नादरूपिणी |
पंचकोणस्थिता लक्ष्मीः पुराणी पुररूपिणी || 40 ||
चक्रस्थिता चक्ररूपा चक्रिणी चक्रनायिका |
षट्चक्रमंडलांतःस्था ब्रह्मचक्रनिवासिनी || 41 ||
अंतरभ्यर्चनप्रीता बहिरर्चनलोलुपा |
पंचाशत्पीठमध्यस्था मातृकावर्णरूपिणी || 42 ||
महादेवी महाशक्तिः महामाया महामतिः |
महारूपा महादीप्तिः महालावण्यशालिनी || 43 ||
माहेंद्री मदिरादृप्ता मदिरासिंधुवासिनी |
मदिरामोदवदना मदिरापानमंथरा || 44 ||
दुरितघ्नी दुःखहंत्री दूती दूतरतिप्रिया |
वीरसेव्या विघ्नहरा योगिनी गणसेविता || 45 ||
निजवीणारवानंदनिमीलितविलोचना |
वज्रेश्वरी वश्यकरी सर्वचित्तविमोहिनी || 46 ||
शबरी शंबराराध्या शांबरी सामसंस्तुता |
त्रिपुरामंत्रजपिनी त्रिपुरार्चनतत्परा || 47 ||
त्रिलोकेशी त्रयीमाता त्रिमूर्तिस्त्रिदिवेश्वरी |
ऐंकारी सर्वजननी सौःकारी संविदीश्वरी || 48 ||
बोधा बोधकरी बोध्या बुधाराध्या पुरातनी |
भंडसोदरसंहर्त्री भंडसैन्यविनाशिनी || 49 ||
गेयचक्ररथारूढा गुरुमूर्तिः कुलांगना |
गांधर्वशास्त्रमर्मज्ञा गंधर्वगणपूजिता || 50 ||
जगन्माता जयकरी जननी जनदेवता |
शिवाराध्या शिवार्धांगी शिंजन्मंजीरमंडिता || 51 ||
सर्वात्मिका हृषीकेशी सर्वपापविनाशिनी |
सर्वरोगहरा साध्या धर्मिणी धर्मरूपिणी || 52 ||
आचारलभ्या स्वाचारा खेचरी योनिरूपिणी |
पतिव्रता पाशहंत्री परमार्थस्वरूपिणी || 53 ||
पंडिता परिवाराढ्या पाषंडमतभंजनी |
श्रीकरी श्रीमती देवी बिंदुनादस्वरूपिणी || 54 ||
अपर्णा हिमवत्पुत्री दुर्गा दुर्गतिहारिणी |
व्यालोलशंखताटंका विलसद्गंडपालिका || 55 ||
सुधामधुरसालापा सिंदूरतिलकोज्ज्वला |
अलक्तकारक्तपादा नंदनोद्यानवासिनी || 56 ||
वासंतकुसुमापीडा वसंतसमयप्रिया |
ध्याननिष्ठा ध्यानगम्या ध्येया ध्यानस्वरूपिणी || 57 ||
दारिद्र्यहंत्री दौर्भाग्यशमनी दानवांतका |
तीर्थरूपा त्रिनयना तुरीया दोषवर्जिता || 58 ||
मेधाप्रदायिनी मेध्या मेदिनी मदशालिनी |
मधुकैटभसंहर्त्री माधवी माधवप्रिया || 59 ||
महिला महिमासारा शर्वाणी शर्मदायिनी |
रुद्राणी रुचिरा रौद्री रुक्मभूषणभूषिता || 60 ||
अंबिका जगतां धात्री जटिनी धूर्जटिप्रिया |
सूक्ष्मस्वरूपिणी सौम्या सुरुचिः सुलभा शुभा || 61 ||
विपंचीकलनिक्वाणविमोहितजगत्त्रया |
भैरवप्रेमनिलया भैरवी भासुराकृतिः || 62 ||
पुष्पिणी पुण्यनिलया पुण्यश्रवणकीर्तना |
कुरुकुल्ला कुंडलिनी वागीशी नकुलेश्वरी || 63 ||
वामकेशी गिरिसुता वार्तालीपरिपूजिता |
वारुणीमदरक्ताक्षी वंदारुवरदायिनी || 64 ||
कटाक्षस्यंदिकरुणा कंदर्पमदवर्धिनी |
दूर्वाश्यामा दुष्टहंत्री दुष्टग्रहविभेदिनी || 65 ||
सर्वशत्रुक्षयकरी सर्वसंपत्प्रवर्धिनी |
कबरीशोभिकल्हारा कलशिंजितमेखला || 66 ||
मृणालीतुल्यदोर्वल्ली मृडानी मृत्युवर्जिता |
मृदुला मृत्युसंहर्त्री मंजुला मंजुभाषिणी || 67 ||
कर्पूरवीटीकबला कमनीयकपोलभूः |
कर्पूरक्षोददिग्धांगी कर्त्री कारणवर्जिता || 68 ||
अनादिनिधना धात्री धात्रीधरकुलोद्भवा |
स्तोत्रप्रिया स्तुतिमयी मोहिनी मोहहारिणी || 69 ||
जीवरूपा जीवकारी जीवन्मुक्तिप्रदायिनी |
भद्रपीठस्थिता भद्रा भद्रदा भर्गभामिनी || 70 ||
भगानंदा भगमयी भगलिंगा भगेश्वरी |
मत्तमातंगगमना मातंगकुलमंजरी || 71 ||
राजहंसगती राज्ञी राजराज समर्चिता |
भवानी पावनी काली दक्षिणा दक्षकन्यका || 72 ||
हव्यवाहा हविर्भोक्त्री हारिणी दुःखहारिणी |
संसारतारिणी सौम्या सर्वेशी समरप्रिया || 73 ||
स्वप्नवती जागरिणी सुषुप्ता विश्वरूपिणी |
तैजसी प्राज्ञकलना चेतना चेतनावती || 74 ||
चिन्मात्रा चिद्घना चेत्या चिच्छाया चित्स्वरूपिणी |
निवृत्तिरूपिणी शांतिः प्रतिष्ठा नित्यरूपिणी || 75 ||
विद्यारूपा शांत्यतीता कलापंचकरूपिणी |
ह्रींकारी ह्रीमती हृद्या ह्रीच्छाया हरिवाहना || 76 ||
मूलप्रकृतिरव्यक्ता व्यक्ताव्यक्तविनोदिनी |
यज्ञरूपा यज्ञभोक्त्री यज्ञांगी यज्ञरूपिणी || 77 ||
दीक्षिता क्षमणा क्षामा क्षितिः क्षांतिः श्रुतिः स्मृतिः |
एकाऽनेका कामकला कल्या कालस्वरूपिणी || 78 ||
दक्षा दाक्षायणी दीक्षा दक्षयज्ञविनाशिनी |
गायत्री गगनाकारा गीर्देवी गरुडासना || 79 ||
सावित्री सकलाध्यक्षा ब्रह्माणी ब्राह्मणप्रिया |
जगन्नाथा जगन्मूर्तिः जगन्मृत्युनिवारिणी || 80 ||
दृग्रूपा दृश्यनिलया द्रष्ट्री मंत्री चिरंतनी |
विज्ञात्री विपुला वेद्या वृद्धा वर्षीयसी मही || 81 ||
आर्या कुहरिणी गुह्या गौरी गौतमपूजिता |
नंदिनी नलिनी नित्या नीतिर्नयविशारदा || 82 ||
गतागतज्ञा गंधर्वी गिरिजा गर्वनाशिनी |
प्रियव्रता प्रमा प्राणा प्रमाणज्ञा प्रियंवदा || 83 ||
अशरीरा शरीरस्था नामरूपविवर्जिता |
वर्णाश्रमविभागज्ञा वर्णाश्रमविवर्जिता || 84 ||
नित्यमुक्ता नित्यतृप्ता निर्लेपा निरवग्रहा |
इच्छाज्ञानक्रियाशक्तिः इंदिरा बंधुराकृतिः || 85 ||
मनोरथप्रदा मुख्या मानिनी मानवर्जिता |
नीरागा निरहंकारा निर्नाशा निरुपप्लवा || 86 ||
विचित्रा चित्रचारित्रा निष्कला निगमालया |
ब्रह्मविद्या ब्रह्मनाडी बंधहंत्री बलिप्रिया || 87 ||
सुलक्षणा लक्षणज्ञा सुंदरभ्रूलतांचिता |
सुमित्रा मालिनी सीमा मुद्रिणी मुद्रिकांचिता || 88 ||
रजस्वला रम्यमूर्तिर्जया जन्मविवर्जिता |
पद्मालया पद्मपीठा पद्मिनी पद्मवर्णिनी || 89 ||
विश्वंभरा विश्वगर्भा विश्वेशी विश्वतोमुखी |
अद्वितीया सहस्राक्षी विराड्रूपा विमोचिनी || 90 ||
सूत्ररूपा शास्त्रकरी शास्त्रज्ञा शस्त्रधारिणी |
वेदविद्वेदकृद्वेद्या वित्तज्ञा वित्तशालिनी || 91 ||
विशदा वैष्णवी ब्राह्मी वैरिंची वाक्प्रदायिनी |
व्याख्यात्री वामना वृद्धिः विश्वनाथा विशारदा || 92 ||
मुद्रेश्वरी मुंडमाला काली कंकालरूपिणी |
महेश्वरप्रीतिकरी महेश्वर पतिव्रता || 93 ||
ब्रह्मांडमालिनी बुध्न्या मतंगमुनिपूजिता |
ईश्वरी चंडिका चंडी नियंत्री नियमस्थिता || 94 ||
सर्वांतर्यामिणी सेव्या संततिः संततिप्रदा |
तमालपल्लवश्यामा ताम्रोष्ठी तांडवप्रिया || 95 ||
नाट्यलास्यकरी रंभा नटराजप्रियांगना |
अनंगरूपाऽनंगश्रीरनंगेशी वसुंधरा || 99 ||
साम्राज्यदायिनी सिद्धा सिद्धेशी सिद्धिदायिनी |
सिद्धमाता सिद्धपूज्या सिद्धार्था वसुदायिनी || 97 ||
भक्तिमत्कल्पलतिका भक्तिदा भक्तवत्सला |
पंचशक्त्यर्चितपदा परमात्मस्वरूपिणी || 98 ||
अज्ञानतिमिरज्योत्स्ना नित्याह्लादा निरंजना |
मुग्धा मुग्धस्मिता मैत्री मुग्धकेशी मधुप्रिया || 99 ||
कलापिनी कामकला कामकेलिः कलावती |
अखंडा निरहंकारा प्रधानपुरुषेश्वरी || 100 ||
रहःपूज्या रहःकेली रहःस्तुत्या हरप्रिया |
शरण्या गहना गुह्या गुहांतःस्था गुहप्रसूः || 101 ||
स्वसंवेद्या स्वप्रकाशा स्वात्मस्था स्वर्गदायिनी |
निष्प्रपंचा निराधारा नित्यानित्यस्वरूपिणी || 102 ||
निर्मदा नर्तकी कीर्तिः निष्कामा निष्कला कला |
अष्टमूर्तिरमोघोमा नंद्यादिगणपूजिता || 103 ||
यंत्ररूपा तंत्ररूपा मंत्ररूपा मनोन्मनी |
शिवकामेश्वरी देवी चिद्रूपा चित्तरंगिणी || 104 ||
चित्स्वरूपा चित्प्रकाशा चिन्मूर्तिश्चिन्मयी चितिः |
मूर्खदूरा मोहहंत्री मुख्या क्रोडमुखीसखी || 105 ||
ज्ञानज्ञातृज्ञेयरूपा व्योमाकारा विलासिनी |
विमर्शरूपिणी वश्या विधानज्ञा विजृंभिता || 106 ||
केतकीकुसुमापीडा कस्तूरीतिलकोज्ज्वला |
मृग्या मृगाक्षी रसिका मृगनाभिसुगंधिनी || 107 ||
यक्षकर्दमलिप्तांगी यक्षिणी यक्षपूजिता |
लसन्माणिक्यकटका केयूरोज्ज्वलदोर्लता || 108 ||
सिंदूरराजत्सीमंता सुभ्रूवल्ली सुनासिका |
कैवल्यदा कांतिमती कठोरकुचमंडला || 109 ||
तलोदरी तमोहंत्री त्रयस्त्रिंशत्सुरात्मिका |
स्वयंभूः कुसुमामोदा स्वयंभुकुसुमप्रिया || 110 ||
स्वाध्यायिनी सुखाराध्या वीरश्रीर्वीरपूजिता |
द्राविणी विद्रुमाभोष्ठी वेगिनी विष्णुवल्लभा || 111 ||
हालामदालसद्वाणी लोला लीलावती रतिः |
लोपामुद्रार्चिता लक्ष्मीरहल्यापरिपूजिता || 112 ||
आब्रह्मकीटजननी कैलासगिरिवासिनी |
निधीश्वरी निरातंका निष्कलंका जगन्मयी || 113 ||
आदिलक्ष्मीरनंतश्रीरच्युता तत्त्वरूपिणी |
नामजात्यादिरहिता नरनारायणार्चिता || 114 ||
गुह्योपनिषदुद्गीता लक्ष्मीवाणीनिषेविता |
मतंगवरदा सिद्धा महायोगीश्वरी गुरुः || 115 ||
गुरुप्रिया कुलाराध्या कुलसंकेतपालिनी |
चिच्चंद्रमंडलांतःस्था चिदाकाशस्वरूपिणी || 116 ||
अनंगशास्त्रतत्त्वज्ञा नानाविधरसप्रिया |
निर्मला निरवद्यांगी नीतिज्ञा नीतिरूपिणी || 117 ||
व्यापिनी विबुधश्रेष्ठा कुलशैलकुमारिका |
विष्णुप्रसूर्वीरमाता नासामणिविराजिता || 118 ||
नायिका नगरीसंस्था नित्यतुष्टा नितंबिनी |
पंचब्रह्ममयी प्रांची ब्रह्मात्मैक्यस्वरूपिणी || 119 ||
सर्वोपनिषदुद्गीता सर्वानुग्रहकारिणी |
पवित्रा पावना पूता परमात्मस्वरूपिणी || 120 ||
सूर्येंदुवह्निनयना सूर्यमंडलमध्यगा |
गायत्री गात्ररहिता सुगुणा गुणवर्जिता || 121 ||
रक्षाकरी रम्यरुपा सात्त्विका सत्त्वदायिनी |
विश्वातीता व्योमरूपा सदार्चनजपप्रिया || 122 ||
आत्मभूरजिता जिष्णुरजा स्वाहा स्वधा सुधा |
नंदिताशेषभुवना नामसंकीर्तनप्रिया || 123 ||
गुरुमूर्तिर्गुरुमयी गुरुपादार्चनप्रिया |
गोब्राह्मणात्मिका गुर्वी नीलकंठी निरामया || 124 ||
मानवी मंत्रजननी महाभैरवपूजिता |
नित्योत्सवा नित्यपुष्टा श्यामा यौवनशालिनी || 125 ||
महनीया महामूर्तिर्महती सौख्यसंततिः |
पूर्णोदरी हविर्धात्री गणाराध्या गणेश्वरी || 126 ||
गायना गर्वरहिता स्वेदबिंदूल्लसन्मुखी |
तुंगस्तनी तुलाशून्या कन्या कमलवासिनी || 127 ||
शृंगारिणी श्रीः श्रीविद्या श्रीप्रदा श्रीनिवासिनी |
त्रैलोक्यसुंदरी बाला त्रैलोक्यजननी सुधीः || 128 ||
पंचक्लेशहरा पाशधारिणी पशुमोचनी |
पाषंडहंत्री पापघ्नी पार्थिवश्रीकरी धृतिः || 129 ||
निरपाया दुरापा या सुलभा शोभनाकृतिः |
महाबला भगवती भवरोगनिवारिणी || 130 ||
भैरवाष्टकसंसेव्या ब्राह्म्यादिपरिवारिता |
वामादिशक्तिसहिता वारुणीमदविह्वला || 131 ||
वरिष्ठा वश्यदा वश्या भक्तार्तिदमना शिवा |
वैराग्यजननी ज्ञानदायिनी ज्ञानविग्रहा || 132 ||
सर्वदोषविनिर्मुक्ता शंकरार्धशरीरिणी |
सर्वेश्वरप्रियतमा स्वयंज्योतिः स्वरूपिणी || 133 ||
क्षीरसागरमध्यस्था महाभुजगशायिनी |
कामधेनुर्बृहद्गर्भा योगनिद्रा युगंधरा || 134 ||
महेंद्रोपेंद्रजननी मातंगकुलसंभवा |
मतंगजातिसंपूज्या मतंगकुलदेवता || 135 ||
गुह्यविद्या वश्यविद्या सिद्धविद्या शिवांगना |
सुमंगळा रत्नगर्भा सूर्यमाता सुधाशना || 136 ||
खड्गमंडलसंपूज्या सालग्रामनिवासिनी |
दुर्जया दुष्टदमना दुर्निरीक्ष्या दुरत्यया || 137 ||
शंखचक्रगदाहस्ता विष्णुशक्तिर्विमोहिनी |
योगमाता योगगम्या योगनिष्ठा सुधास्रवा || 138 ||
समाधिनिष्ठैः संवेद्या सर्वभेदविवर्जिता |
साधारणा सरोजाक्षी सर्वज्ञा सर्वसाक्षिणी || 139 ||
महाशक्तिर्महोदारा महामंगळदेवता |
कलौ कृतावतरणा कलिकल्मषनाशिनी || 140 ||
सर्वदा सर्वजननी निरीशा सर्वतोमुखी |
सुगूढा सर्वतो भद्रा सुस्थिता स्थाणुवल्लभा || 141 ||
चराचरजगद्रूपा चेतनाचेतनाकृतिः |
महेश्वरप्राणनाडी महाभैरवमोहिनी || 142 ||
मंजुला यौवनोन्मत्ता महापातकनाशिनी |
महानुभावा माहेंद्री महामरकतप्रभा || 143 ||
सर्वशक्त्यासना शक्तिर्निराभासा निरिंद्रिया |
समस्तदेवतामूर्तिः समस्तसमयार्चिता || 144 ||
सुवर्चला वियन्मूर्तिः पुष्कला नित्यपुष्पिणी |
नीलोत्पलदळश्यामा महाप्रळयसाक्षिणी || 145 ||
संकल्पसिद्धा संगीतरसिका रसदायिनी |
अभिन्ना ब्रह्मजननी कालक्रमविवर्जिता || 146 ||
अजपा जाड्यरहिता प्रसन्ना भगवत्प्रिया |
इंदिरा जगतीकंदा सच्चिदानंदकंदली |
श्रीचक्रनिलया देवी श्रीविद्या श्रीप्रदायिनी || 147 ||
फलश्रुतिः |
इति ते कथितो लक्ष्मि नामसारस्तवो मया |
श्यामलाया महादेव्याः सर्ववश्यप्रदायकः || 148 ||
य इमं पठते नित्यं नामसारस्तवं परं |
तस्य नश्यंति पापानि महांत्यपि न संशयः || 149 ||
त्रिसंध्यं यः पठेन्नित्यं वर्षमेकमतंद्रितः |
सार्वभौमो महीपालस्तस्य वश्यो भवेद्ध्रुवं || 150 ||
मूलमंत्रजपांते यः पठेन्नामसहस्रकं |
मंत्रसिद्धिर्भवेत्तस्य शीघ्रमेव वरानने || 151 ||
जगत्त्रयं वशीकृत्य साक्षात्कामसमो भवेत् |
दिने दिने दशावृत्त्या मंडलं यो जपेन्नरः || 152 ||
सचिवः स भवेद्देवि सार्वभौमस्य भूपतेः |
षण्मासं यो जपेन्नित्यं एकवारं दृढव्रतः || 153 ||
भवंति तस्य धान्यानां धनानां च समृद्धयः |
चंदनं कुंकुमं वापि भस्म वा मृगनाभिकं || 154 ||
अनेनैव त्रिरावत्त्या नामसारेण मंत्रितं |
यो ललाटे धारयते तस्य वक्त्रावलोकनात् || 155 ||
हंतुमुद्यतखड्गोऽपि शत्रुर्वश्यो भवेद्ध्रुवं |
अनेन नामसारेण मंत्रितं प्राशयेज्जलं || 156 ||
मासमात्रं वरारोहे गांधर्वनिपुणो भवेत् |
संगीते कवितायां च नास्ति तत्सदृशो भुवि || 157 ||
ब्रह्मज्ञानमवाप्नोति मोक्षं चाप्यधिगच्छति |
प्रीयते श्यामला नित्यं प्रीताऽभीष्टं प्रयच्छति || 158 ||
इति सौभाग्यलक्ष्मीकल्पतांतर्गते लक्ष्मीनारायणसंवादे अष्टसप्तितमे खंडे श्री श्यामला सहस्रनाम स्तोत्रं |
अर्थ
श्री श्यामला सहस्रनाम स्तोत्रम वाग्देवी, संगीत, ज्ञान और मंत्रों की देवी, श्री श्यामला देवी (जिन्हें मातंगी या श्यामला देवी भी कहते हैं) की स्तुति में रचा गया एक अत्यंत शक्तिशाली भक्ति ग्रंथ है। यह स्तोत्र देवी के एक हजार नामों का वर्णन करता है, जिनमें से प्रत्येक नाम उनकी दिव्य शक्ति के एक पहलू का प्रतीक है। यह वाक्पटुता, बौद्धिक निपुणता, मंत्र शक्ति, संगीत उत्कृष्टता, सुरक्षा और परम मुक्ति प्रदान करने की देवी की क्षमता का विस्तृत विवरण देता है।
इस स्तोत्र के आरंभ में, देवी लक्ष्मी भगवान नारायण से प्रश्न करती हैं कि भोग और मोक्ष के लिए सबसे उत्तम साधन क्या है, तथा सर्ववश्यकर और सर्वैश्वर्यप्रदायक क्या है। इसके उत्तर में, भगवान महादेव बताते हैं कि श्री श्यामला देवी के नामों का जप और पाठ ही इस प्रश्न का उत्तर है। यह स्तोत्र इस बात पर बल देता है कि देवी के नाम स्वयं शक्ति का एक कोष हैं, और जब भक्ति, गोपनीयता तथा निष्ठा के साथ इनका अभ्यास किया जाता है, तो वे शुद्धिकरण, सिद्धियों की प्राप्ति और मुक्ति प्रदान करते हैं। यह भक्त के मन को निरंतर पाठ या श्रवण के लिए प्रतिबद्ध होने का आग्रह करता है, और वादा करता है कि ऐसी भक्ति श्यामला देवी की सुरक्षा और कृपा के अधीन रखती है।
यह स्तोत्र मुख्यतः श्यामला देवी के विभिन्न रूपों, शक्तियों, कलाओं, मंत्रों, संगीत और रहस्यमय ज्ञान—सभी को 'नाममाला' के रूप में एक साथ जोड़ता है। इसे भक्तों को वाक्पटुता, विद्या सिद्धि, ऐश्वर्य, भगवद् भक्ति और आंतरिक शांति प्रदान करने के लिए अभिकल्पित किया गया है। प्रत्येक नाम देवी की उपस्थिति के एक आयाम को सक्रिय करने वाले ध्वनि-बीज के रूप में कार्य करता है। इन नामों का पाठ वाक्पटुता, रचनात्मकता, समृद्धि और मुक्ति के आंतरिक चैनलों को खोलता है।
यह सहस्रनाम केवल नामों की एक सूची नहीं है; यह एक आध्यात्मिक तकनीक है। इस स्तोत्र के प्रति भक्ति का अर्थ है स्वयं को दिव्य वाणी की जीवंत कंपन में स्थापित करना। परिणाम: व्यक्ति की वाणी, मन, जीवन और अंततः आत्मा का रूपांतरण होता है। यह भक्त की वाणी और मन को स्वयं दिव्य वाणी (वाक्) के साथ संरेखित करता है, जिससे परम आध्यात्मिक अनुभव की प्राप्ति होती है।
लाभ (Benefits):
- वाक् सिद्धि और वाक्पटुता: श्यामला देवी वाग्देवी हैं, इसलिए इस स्तोत्र का पाठ करने से भक्तों को उत्तम वाक्पटुता, स्पष्ट वाणी और प्रभावशाली अभिव्यक्ति की क्षमता प्राप्त होती है। यह सार्वजनिक वक्ताओं, कलाकारों और विद्वानों के लिए अत्यंत लाभकारी है।
- विद्या सिद्धि और ज्ञान: देवी ज्ञान और बुद्धि की अधिष्ठात्री हैं। इस स्तोत्र का पाठ छात्रों और ज्ञान seekers के लिए स्मरण शक्ति, एकाग्रता और आलोचनात्मक सोच की क्षमता को बढ़ाता है।
- ऐश्वर्य और समृद्धि: श्यामला देवी भक्तों की आर्थिक स्थिति में सुधार करने की शक्ति रखती हैं। इस स्तोत्र का भक्तिपूर्वक पाठ करने से धन, समृद्धि और भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है।
- पाप मुक्ति और सुरक्षा: यह सहस्रनाम भक्तों के पापों का निवारण करता है और उन्हें सभी प्रकार की बुरी शक्तियों तथा बाधाओं से बचाता है। यह जीवन में शांति और सुरक्षा लाता है।
- मोक्ष प्राप्ति और आध्यात्मिक उत्थान: अंततः, इस स्तोत्र का निरंतर पाठ भक्तों को आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान करता है और आत्म-आनंद तथा मोक्ष के मार्ग को सुगम बनाता है। यह भक्त की आत्मा को दिव्य के साथ विलीन करने में सहायता करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्री श्यामला सहस्रनाम स्तोत्रम क्या है?
इस स्तोत्र का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
श्री श्यामला सहस्रनाम स्तोत्रम के पाठ से क्या लाभ होते हैं?
इस स्तोत्र का पाठ कौन कर सकता है?
इस स्तोत्र का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
इस स्तोत्र का उद्गम या इतिहास क्या है?
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