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श्री नरसिंह अष्टोत्तर शतनामावळि

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  1. ॐ नरसिंहाय नमः
  2. ॐ नराय नमः
  3. ॐ नारस्रष्ट्रे नमः
  4. ॐ नारायणाय नमः
  5. ॐ नवाय नमः
  6. ॐ नवेतराय नमः
  7. ॐ नरपतये नमः
  8. ॐ नरात्मने नमः
  9. ॐ नरचोदनाय नमः
  10. ॐ नखभिन्नस्वर्णशय्याय नमः
  11. ॐ नखदंष्ट्राविभीषणाय नमः
  12. ॐ नादभीतदिशानागाय नमः
  13. ॐ नंतव्याय नमः
  14. ॐ नखरायुधाय नमः
  15. ॐ नादनिर्भिन्नपाद्मांडाय नमः
  16. ॐ नयनाग्निहुतासुराय नमः
  17. ॐ नटत्केसरसंजातवातविक्षिप्तवारिदाय नमः
  18. ॐ नलिनीशसहस्राभाय नमः
  19. ॐ नतब्रह्मादिदेवताय नमः
  20. ॐ नभोविश्वंभराभ्यंतर्व्यापिदुर्वीक्ष्यविग्रहाय नमः
  21. ॐ निश्श्वासवातसंरंभ घूर्णमानपयोनिधये नमः
  22. ॐ निर्द्रयांघ्रियुगन्यासदलितक्ष्माहिमस्तकाय नमः
  23. ॐ निजसंरंभसंत्रप्तब्रह्मरुद्रादिदेवताय नमः
  24. ॐ निर्दंभभक्तिमद्रक्षोडिंभनीतशमोदयाय नमः
  25. ॐ नाकपालादिविनुताय नमः
  26. ॐ नाकिलोककृतप्रियाय नमः
  27. ॐ नाकिशत्रूदरांत्रादिमालाभूषितकंधराय नमः
  28. ॐ नाकेशासिकृतत्रासदंष्ट्राभाधूततामसाय नमः
  29. ॐ नाकमर्त्यातलापूर्णनादनिश्शेषितद्विपाय नमः
  30. ॐ नामविद्राविताशेषभूतरक्षःपिशाचकाय नमः
  31. ॐ नामनिश्श्रेणिकारूढ निजलोकनिजप्रजाय नमः
  32. ॐ नालीकनाभाय नमः
  33. ॐ नागारिमध्याय नमः
  34. ॐ नागाधिराड्भुजाय नमः
  35. ॐ नगेंद्रधीराय नमः
  36. ॐ नेत्रांतस्ख्सलदग्निकणच्छटाय नमः
  37. ॐ नारीदुरापदाय नमः
  38. ॐ नानालोकभीकरविग्रहाय नमः
  39. ॐ निस्तारितात्मीय संधाय नमः
  40. ॐ निजैकज्ञेय वैभवाय नमः
  41. ॐ निर्व्याजभक्तप्रह्लाद परिपालन तत्पराय नमः
  42. ॐ निर्वाणदायिने नमः
  43. ॐ निर्व्याजभक्तैकप्राप्यतत्पदाय नमः
  44. ॐ निर्ह्रादमयनिर्घातदलितासुरराड्बलाय नमः
  45. ॐ निजप्रतापमार्तांडखद्योतीकृतभास्कराय नमः
  46. ॐ निरीक्षणक्षतज्योतिर्ग्रहतारोडुमंडलाय नमः
  47. ॐ निष्प्रपंचबृहद्भानुज्वालारुणनिरीक्षणाय नमः
  48. ॐ नखाग्रलग्नारिवक्ष्ससृतरक्तारुणांबराय नमः
  49. ॐ निश्शेषरौद्रनीरंध्राय नमः
  50. ॐ नक्षत्राच्छादितक्षमाय नमः
  51. ॐ निर्णिद्र रक्तोत्पलाय नमः
  52. ॐ निरमित्राय नमः
  53. ॐ निराहवाय नमः
  54. ॐ निराकुलीकृतसुराय नमः
  55. ॐ निर्णिमेयाय नमः
  56. ॐ निरीश्वराय नमः
  57. ॐ निरुद्धदशदिग्भागाय नमः
  58. ॐ निरस्ताखिलकल्मषाय नमः
  59. ॐ निगमाद्रि गुहामध्यनिर्णिद्राद्भुत केसरिणे नमः
  60. ॐ निजानंदाब्धिनिर्मग्नाय नमः
  61. ॐ निराकाशाय नमः
  62. ॐ निरामयाय नमः
  63. ॐ निरहंकारविबुधचित्तकानन गोचराय नमः
  64. ॐ नित्याय नमः
  65. ॐ निष्कारणाय नमः
  66. ॐ नेत्रे नमः
  67. ॐ निरवद्यगुणोदधये नमः
  68. ॐ निदानाय नमः
  69. ॐ निस्तमश्शक्तये नमः
  70. ॐ नित्यतृप्ताय नमः
  71. ॐ निराश्रयाय नमः
  72. ॐ निष्प्रपंचाय नमः
  73. ॐ निरालोकाय नमः
  74. ॐ निखिलप्रतिभासकाय नमः
  75. ॐ निरूढज्ञानिसचिवाय नमः
  76. ॐ निजावनकृताकृतये नमः
  77. ॐ निखिलायुधनिर्घातभुजानीकशताद्भुताय नमः
  78. ॐ निशितासिज्ज्वलज्जिह्वाय नमः
  79. ॐ निबद्धभृकुटीमुखाय नमः
  80. ॐ नगेंद्रकंदरव्यात्त वक्त्राय नमः
  81. ॐ नम्रेतरश्रुतये नमः
  82. ॐ निशाकरकरांकूर गौरसारतनूरुहाय नमः
  83. ॐ नाथहीनजनत्राणाय नमः
  84. ॐ नारदादिसमीडिताय नमः
  85. ॐ नारांतराय नमः
  86. ॐ नारचित्तये नमः
  87. ॐ नाराज्ञेयाय नमः
  88. ॐ नरोत्तमाय नमः
  89. ॐ नरलोकांशाय नमः
  90. ॐ नरनारायणाय नमः
  91. ॐ नभसे नमः
  92. ॐ नतलोकपरित्राणनिष्णाताय नमः
  93. ॐ नयकोविदाय नमः
  94. ॐ निगमागमशाखाग्र प्रवालचरणांबुजाय नमः
  95. ॐ नित्यसिद्धाय नमः
  96. ॐ नित्यजयिने नमः
  97. ॐ नित्यपूज्याय नमः
  98. ॐ निजप्रभाय नमः
  99. ॐ निष्कृष्टवेदतात्पर्यभूमये नमः
  100. ॐ निर्णीततत्त्वकाय नमः
  101. ॐ नित्यानपायिलक्ष्मीकाय नमः
  102. ॐ निश्श्रेयसमयाकृतये नमः
  103. ॐ निगमश्रीमहामालाय नमः
  104. ॐ निर्दग्धत्रिपुरप्रियाय नमः
  105. ॐ निर्मुक्तशेषाहियशसे नमः
  106. ॐ निर्द्वंदाय नमः
  107. ॐ निष्कलाय नमः
  108. ॐ नरिणे नमः

|| इति श्री  नरसिंह अष्टोत्तर शतनामावळि संपूर्णं ||

अर्थ

श्री नरसिंह अष्टोत्तर शतनामावलि भगवान विष्णु के उग्र और करुणामयी अवतार, श्री नरसिंह देव को समर्पित 108 पवित्र नामों का संग्रह है। यह नामावलि भगवान की अद्वितीय शक्ति, भक्तों के प्रति उनके प्रेम और दुष्टों का संहार करने वाले गुणों का वर्णन करती है। भगवान नरसिंह अपने परम भक्त प्रहलाद की रक्षा करने और हिरण्यकशिपु के अत्याचारों को समाप्त करने के लिए एक खंभे से प्रकट हुए थे। यह अष्टोत्तर उस दिव्य अवतार के विभिन्न पहलुओं, गुणों और लीलाओं को समाहित करता है, जिससे भक्तों को गहरा आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त होता है।

इस शतनामावलि का प्रत्येक नाम भगवान की अनंत शक्ति और गुणों का स्मरण कराता है। 'ॐ नरसिंहाय नमः' के मूल मंत्र से प्रारंभ होकर, यह नरसिंह देव को मनुष्य-सिंह रूप में, सृष्टि के रचयिता के रूप में, नारायण के रूप में, शाश्वत और नवीन रूप में, मनुष्यों के स्वामी और आत्मा के रूप में, तथा उन्हें प्रेरित करने वाले के रूप में वर्णित करता है। उदाहरण के लिए, 'ॐ नखभिन्नस्वर्णशय्याय नमः' उस भगवान को संदर्भित करता है जिसने हिरण्यकशिपु के स्वर्ण सिंहासन या छाती को अपने नाखूनों से विदीर्ण किया। 'ॐ नखदंष्ट्राविभीषणाय नमः' का अर्थ है, जिनके नाखून और दाँत अत्यंत भयानक हैं। ये नाम यद्यपि भगवान के भयंकर रूप का वर्णन करते हैं, वे भक्तों को अभय प्रदान करने वाले रक्षक की क्षमता को उजागर करते हैं।

'ॐ नादनिर्भिन्नपाद्मांडाय नमः' का अर्थ है, जिनकी गर्जना से ब्रह्मांड फट गया, और 'ॐ नयनाग्निहुतासुराय नमः' का अर्थ है, जिन्होंने अपनी आँखों की अग्नि से असुरों को भस्म कर दिया। ये नाम नरसिंह देव की सृष्टि और विनाश की क्षमता को प्रदर्शित करते हैं। 'ॐ नतब्रह्मादिदेवताय नमः' यह दर्शाता है कि वे ब्रह्मा और अन्य देवताओं द्वारा भी पूजित हैं। यह नामावलि केवल नामों की एक सूची नहीं है, बल्कि भगवान की महिमा, पराक्रम और भक्त-वात्सल्य को व्यक्त करने वाले पवित्र मंत्रों का एक समूह है। इनका पाठ करने से भक्त नरसिंह देव की दिव्य शक्ति से जुड़ते हैं और आंतरिक शांति तथा सुरक्षा प्राप्त करते हैं।

इस शतनामावलि का पाठ भक्तों को अपार आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करता है। यह मन के भय, चिंता और नकारात्मक ऊर्जाओं को दूर करता है। नरसिंह देव का उग्र रूप दुष्ट शक्तियों के विनाश का प्रतीक है, जबकि उनकी करुणामयी दृष्टि भक्तों को आशीर्वाद और सुरक्षा प्रदान करती है। नियमित रूप से इस स्तोत्र का पाठ करने से, भक्त जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए साहस, आत्मविश्वास और दिव्य समर्थन प्राप्त करते हैं। यह भक्ति को बढ़ाता है और मोक्ष के मार्ग को सुगम बनाता है।

लाभ (Benefits):

  • भय निवारण और सुरक्षा: श्री नरसिंह अष्टोत्तर शतनामावलि का पाठ करने से सभी प्रकार के भय, नकारात्मक शक्तियों और बुरी नज़र से सुरक्षा मिलती है। भगवान नरसिंह अपने भक्तों को अभय प्रदान करते हैं।
  • शत्रु संहार और विजय: जीवन में आने वाले शत्रुओं, बाधाओं और प्रतिकूल परिस्थितियों को दूर करने में यह स्तोत्र सहायता करता है। न्यायपूर्ण उद्देश्यों के लिए संघर्ष करने वालों को विजय दिलाता है।
  • स्वास्थ्य और धन वृद्धि: नियमित पाठ से उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और आर्थिक समृद्धि प्राप्त होती है। रोगों और वित्तीय समस्याओं से मुक्ति पाने में यह सहायक है।
  • आध्यात्मिक विकास: यह नामावलि भक्ति को बढ़ाती है, मन को शांति प्रदान करती है और आध्यात्मिक प्रगति में सहायक होती है। यह भगवान के साथ गहरा संबंध स्थापित करती है।
  • इच्छापूर्ति: भगवान नरसिंह की ईमानदारी से स्तुति करने से भक्तों की सभी सद्भावनापूर्ण इच्छाएँ पूर्ण होती हैं और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्री नरसिंह अष्टोत्तर शतनामावलि क्या है?
यह भगवान विष्णु के सिंह अवतार, श्री नरसिंह देव के 108 पवित्र नामों का संग्रह है। यह नामावलि भगवान के विभिन्न गुणों, शक्तियों और लीलाओं की स्तुति करती है।
इस शतनामावलि का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
इस स्तोत्र का पाठ किसी भी समय किया जा सकता है, लेकिन नरसिंह जयंती, शनिवार या सूर्यास्त के समय इसका पाठ करना अधिक शुभ माना जाता है। स्नान करके शुद्ध होकर, शांत मन से भक्तिपूर्वक पाठ करना चाहिए।
श्री नरसिंह अष्टोत्तर शतनामावलि के प्रमुख लाभ क्या हैं?
इसके पाठ से भय निवारण, शत्रुओं पर विजय, सुरक्षा, स्वास्थ्य वृद्धि, धन वृद्धि और आध्यात्मिक प्रगति प्राप्त होती है। यह सभी बाधाओं को दूर करने में सहायता करता है।
इस स्तोत्र का पाठ कौन कर सकता है?
भय, चिंता, शत्रु बाधा, बीमारी या किसी भी प्रकार की कठिनाइयों से पीड़ित व्यक्ति, और भगवान नरसिंह की कृपा प्राप्त करने की इच्छा रखने वाला कोई भी भक्त इस स्तोत्र का पाठ कर सकता है।
इस नामावलि का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
सामान्यतः प्रतिदिन एक बार या 11, 21, 51 या 108 बार पाठ करना शुभ माना जाता है। आप अपनी सुविधानुसार भक्तिभाव से पाठ कर सकते हैं।
इस स्तोत्र का मूल या उद्गम क्या है?
श्री नरसिंह अष्टोत्तर शतनामावलि पुराणों और आगम ग्रंथों से उत्पन्न हुई है। यह भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार की महिमा का बखान करने वाली प्राचीन वैदिक परंपरा का हिस्सा है।

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