श्री नृसिंह गद्य स्तुतिः
देवाः ||
भक्तिमात्रप्रतीत नमस्ते नमस्ते | अखिलमुनिजननिवह विहितसवनकदनकर खरचपलचरितभयद बलवदसुरपतिकृत विविधपरिभवभयचकित निजपदचलित निखिलमखमुख विरहकृशतरजलजभवमुख सकलसुरवरनिकर कारुण्याविष्कृत चंडदिव्य नृसिंहावतार स्फुरितोदग्रतारध्वनि-भिन्नांबरतार निजरणकरण रभसचलित रणदसुरगण पटुपटह विकटरवपरिगत चटुलभटरवरणित परिभवकर धरणिधर कुलिशघट्टनोद्भूत ध्वनिगंभीरात्मगर्जित निर्जितघनाघन ऊर्जितविकटगर्जित सृष्टखलतर्जित सद्गुणगणोर्जित योगिजनार्जित सर्वमलवर्जित लक्ष्मीघनकुचतटनिकटविलुंठन विलग्नकुंकुम पंकशंकाकरारुण मणिकिरणानुरंजित विगतशशाकलंक शशांकपूर्णमंडलवृत्त स्थूलधवल मुक्तामणिविघट्टित दिव्यमहाहार ललितदिव्यविहार विहितदितिजप्रहार लीलाकृतजगद्विहार संसृतिदुःखसमूहापहार विहितदनुजापहार युगांतभुवनापहार अशेषप्राणिगणविहित सुकृतदुष्कृत सुदीर्घदंडभ्रामित बृहत्कालचक्र भ्रमणकृतिलब्धप्रारंभ स्थावरजंगमात्मक सकलजगज्जाल जलधारणसमर्थ ब्रह्मांडनामधेय महापिठरकरण प्रवीणकुंभकार निरस्तसर्वविस्तार निरस्तषड्भावविकार विविधप्रकार त्रिभुवनप्रकार अनिरूपितनिजाकार नियतभिक्षादिलब्ध गतरसपरिमित भोज्यमात्रसंतोष बलविजित मदमदन निद्रादिदोष जनधनस्नेहलोभादि दृढबंधनच्छेद लब्धसौख्य सततकृत योगाभ्यास निर्मलांतःकरण योगींद्रकृतसन्निधान त्रिजगन्निधान सकलप्रधान मायापिधान सुशुभाभिधान मदविकसदसुरभट मकुटवनानलनिभनयन विलसदसिकवचभुज घनवनलवन नवरुधिरक्रमकल्पित मीनशंचत्तरंगशैवाल महाजलूक दुस्तरपंकजलनिवहकलित महासुरपृतनाकमलिनी विलोलनकेळिप्रिय मत्तवारण दुष्टजनमारण शिष्टजनतारण नित्यसुखविचारण सिद्धबलकारण सुदुष्टासुरदारण सदृशीकृतांजन जनदोषभंजन घनचिन्निरंजन निरंतरकृतभक्तवांछन गतसर्ववांछन विश्वनाटकसूत्रधार अंघ्रिधूळिजातखसिंधुधार मध्वसृक्लुतचक्रधार जनितकाम विगतकाम सुरजनकाम उद्धृतक्षम निश्चलजनसत्क्रियाक्षम सुरनतचरण धृतरथचरण विविधसुरविहरण विगतविकार विकरण विबुधजनशरण सततप्रीत त्रिगुणव्यतीत प्रणतजनवत्सल नमस्ते नमस्ते ||
इति श्री नृसिंह गद्यं |
अर्थ
यह गद्य स्तुति देवताओं द्वारा भगवान श्री लक्ष्मीनृसिंह की भक्तिपूर्वक स्तुति करते हुए कही गई है। यह नृसिंह के अनंत गुण-महिमाओं को एक ही वाक्य में समुद्र की तरह समाहित करती है। भावार्थ यह है कि हे भगवान नृसिंह! आप केवल भक्तों द्वारा ही प्राप्त किए जा सकते हैं। समस्त मुनियों के यज्ञों की रक्षा करने, देवताओं के कष्टों को दूर करने और दुष्ट दैत्यों का विनाश करने के लिए आपने भयानक नृसिंह रूप में अवतार लिया। आपके प्राकट्य की ध्वनि ने ही ब्रह्मांड को हिला दिया था, जो आपकी असीम शक्ति का प्रतीक है।
आपका रूप सिंह जैसा भयंकर और तेज से भरा है। आपकी गर्जना से मेघ, पर्वत और पृथ्वी कांप उठे। आपकी दृष्टि पापों को जला देती है, और आपकी उपस्थिति योगियों को मोक्ष प्रदान करती है। लक्ष्मी देवी आपके वक्षस्थल पर विश्राम करती हैं - वह स्थान कुमकुम वर्ण से प्रकाशित होता है। आपके हार मोतियों की चमक से जगमगाते हैं, और आपकी दिव्य लीलाएँ लोकों के कल्याण के लिए सृष्टि का रूप हैं।
आप कालचक्र को नियंत्रित करने वाले हैं; जगत का संरक्षण करने वाले हैं। माया, अहंकार, काम, लोभ जैसे बंधनों को तोड़कर, आप योगियों के हृदय में निवास करने वाले नित्य शुद्ध परमात्मा हैं। आप दुष्टों का संहार करते हैं और सज्जनों की रक्षा करते हैं। आप अपने भक्तों से कभी दूर नहीं होते। समस्त सृष्टि के नाटक में आप ही सूत्रधार हैं। आपकी शरण लेने वालों को कोई भय नहीं होता; उनका जीवन आपकी करुणा में विलीन हो जाता है।
सारांश में, श्री नृसिंह गद्य स्तुति भक्ति, ज्ञान और भयभक्ति का संगम है। इस गद्य का प्रत्येक वाक्य नृसिंह के महिमामयी स्वभाव को दर्शाता है – भक्तों की रक्षा करने की सौम्यता, दुष्टों का नाश करने की उग्रता और ब्रह्मांड को नियंत्रित करने की परमेश्वरता। इस स्तोत्र का पाठ करने से मन पवित्र होता है, भय दूर होते हैं और अंतरात्मा में साहस, शांति तथा भक्ति स्थापित होती है।
लाभ (Benefits):
- भय से मुक्ति: श्री नृसिंह गद्य स्तुति का पाठ करने से सभी प्रकार के भय, विशेष रूप से शत्रु भय और अनिष्ट भय दूर होते हैं। भगवान नृसिंह अपने भक्तों को अभय प्रदान करते हैं।
- पूर्ण सुरक्षा: भगवान नृसिंह अपने भक्तों को सभी आपदाओं, बुरी शक्तियों और कठिनाइयों से बचाते हैं। यह शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक सुरक्षा प्रदान करता है।
- आध्यात्मिक उन्नति: इस स्तोत्र का पाठ मन को शुद्ध करता है, आध्यात्मिक ज्ञान बढ़ाता है और मोक्ष के मार्ग पर प्रगति करने में सहायता करता है। योगी उन्हें परमात्मा के रूप में ध्यान करते हैं।
- शांति और साहस: नृसिंह का उग्र रूप केवल दुष्टों के लिए भयानक है, जबकि भक्तों को यह अपार शांति और साहस प्रदान करता है। यह आंतरिक शक्ति को बढ़ाता है और चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रेरित करता है।
- मनोकामना पूर्ति: भक्ति और श्रद्धा से इस स्तोत्र का पाठ करने से भक्तों की सद्भावनापूर्ण मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में समृद्धि प्राप्त होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्री नृसिंह गद्य स्तुति क्या है?
श्री नृसिंह गद्य स्तुति का पाठ कब करना चाहिए?
इस स्तुति का पाठ करने से क्या लाभ होते हैं?
इस स्तोत्र का पाठ किसे करना चाहिए?
इस स्तोत्र का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
श्री नृसिंह गद्य स्तुति का मूल क्या है?
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