नवरात्रि आरम्भ
शारदीय नवरात्रि का पहला दिन आश्विन शुक्ल प्रतिपदा को होता है। इसी दिन सुबह घटस्थापना यानी कलश स्थापना की जाती है, जौ बोए जाते हैं और माँ दुर्गा के पहले रूप शैलपुत्री की पूजा से नौ दिन का उत्सव शुरू होता है।
पहले दिन का महत्व
पितृ पक्ष की अमावस्या के अगले दिन से माहौल बदल जाता है। घरों में सफ़ाई होती है, पूजा का कोना सजता है और कई परिवार अखंड ज्योति जलाते हैं जो नौ दिन तक बुझने नहीं दी जाती। शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की पुत्री और पार्वती का ही रूप हैं; इनका वाहन वृषभ है और हाथ में त्रिशूल व कमल रहता है।
किस तिथि को और किस समय
आश्विन शुक्ल प्रतिपदा, जिस दिन सूर्योदय पर प्रतिपदा हो। घटस्थापना प्रतिपदा तिथि के भीतर सुबह के पहले हिस्से में करना सबसे अच्छा माना जाता है; किसी कारण चूक जाए तो दोपहर का अभिजित मुहूर्त लिया जाता है। चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग को घटस्थापना के लिए टाला जाता है। सही मुहूर्त नवरात्रि कैलेंडर में देखें।
घटस्थापना कैसे करें
- मिट्टी के पात्र में साफ़ मिट्टी भरकर जौ बोएँ।
- उसके ऊपर या पास जल भरा कलश रखें, उसमें सिक्का, सुपारी, अक्षत डालें, मुँह पर आम के पत्ते और लाल कपड़े में लिपटा नारियल रखें।
- माँ दुर्गा की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर संकल्प लें और शैलपुत्री का ध्यान करें।
- दीप जलाकर जय अम्बे गौरी आरती करें।
पूरी विधि और सामग्री कलश स्थापना विधि में दी गई है। बाकी आठ दिनों की देवियाँ और भोग नवदुर्गा के नौ रूप में, और पूरे पर्व की जानकारी शारदीय नवरात्रि पृष्ठ पर देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नवरात्रि किस तिथि से शुरू होती है?
घटस्थापना किस समय करनी चाहिए?
नवरात्रि के पहले दिन किस देवी की पूजा होती है?
कलश स्थापना में क्या-क्या चाहिए?
अगर घटस्थापना न कर पाएँ तो?
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