सकट चौथ (लंबोदर संकष्टी)
सकट चौथ क्या है
सकट चौथ माघ महीने की कृष्ण चतुर्थी है, जिसे तिलकुट चौथ, तिल चौथ, माघी चौथ और संकट चौथ भी कहते हैं। इस दिन माताएँ संतान की लंबी उम्र और संकटों से रक्षा के लिए गणेश जी और सकट माता का व्रत रखती हैं। संकष्टी की बारह परंपरागत तिथियों में यह गणेश जी के "लंबोदर" रूप — बड़े पेट वाले, सबको समा लेने वाले गणपति — की चतुर्थी है।
किस तिथि को
पूर्णिमांत पंचांग के अनुसार यह माघ कृष्ण चतुर्थी है; अमांत पंचांग में यही दिन पौष कृष्ण चतुर्थी कहलाता है। व्रत उसी दिन होता है जिस रात चंद्रोदय के समय चतुर्थी हो, क्योंकि पारण चंद्रमा को अर्घ्य देकर ही होता है।
कैसे मनाते हैं
दिन भर ज़्यादातर महिलाएँ निर्जल या फलाहारी व्रत रखती हैं। शाम को तिल और गुड़ कूटकर तिलकुट बनाया जाता है; कई घरों में तिलकुट का बकरा बनाकर बच्चे से "काटने" की रस्म होती है। गणेश जी को तिलकुट, शकरकंद, बेर और गन्ने का भोग लगता है, फिर सकट चौथ की कथा — कुम्हार के आँवे और बुढ़िया के बेटे वाली — सुनी जाती है। चंद्रमा निकलने पर जल, दूध और तिल से अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है। पूरी विधि सकट चौथ पूजा विधि और तिलकुट में देखें।
क्षेत्रीय परंपराएँ
उत्तर प्रदेश और बिहार में इसे सकट या तिलकुट चौथ कहते हैं, राजस्थान और मध्य प्रदेश में तिल चौथ। कुछ परिवारों में व्रत खोलने के बाद भी उस रात अन्न नहीं लिया जाता, केवल तिल-गुड़ और शकरकंद खाए जाते हैं। महाराष्ट्र में यही दिन सामान्य संकष्टी की तरह मोदक और चंद्र दर्शन से मनाया जाता है। हर महीने की संकष्टी के लिए संकष्टी चतुर्थी कैलेंडर देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सकट चौथ किस महीने में आती है?
सकट चौथ का व्रत कौन रखता है?
सकट चौथ पर तिलकुट क्यों बनाते हैं?
सकट चौथ का व्रत कैसे खोलें?
सकट चौथ और संकष्टी चतुर्थी में क्या अंतर है?
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