कुंभ संक्रांति
कुंभ संक्रांति पर सूर्य मकर से कुंभ राशि में प्रवेश करते हैं। सौर कैलेंडर में यहीं से फाल्गुन (पंजाबी में फग्गण) महीना शुरू होता है। सर्दी ढलने लगती है और वसंत की आहट सुनाई देती है।
पुण्य काल और स्नान
यह विष्णुपदी संक्रांति है, जिसमें संक्रमण से पहले का समय पुण्य काल होता है; सटीक समय इस पृष्ठ पर है। माघ के स्नान का पुण्य इसी मौसम से जुड़ा है, और प्रयागराज का माघ मेला आम तौर पर इन दिनों चल रहा होता है, इसलिए गंगा-यमुना स्नान का विशेष महत्व माना जाता है। घर पर हों तो पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर नहाएँ और सूर्य को अर्घ्य दें। माघ स्नान की परंपरा मौनी अमावस्या: स्नान और दान में भी समझाई गई है।
कुंभ मेले से संबंध?
नाम मिलता-जुलता होने से बहुत लोग कुंभ संक्रांति को कुंभ मेले से जोड़ देते हैं। असल में कुंभ मेले का समय बृहस्पति और सूर्य दोनों की स्थिति से तय होता है, अकेले इस संक्रांति से नहीं। यह एक सामान्य मासिक संक्रांति है, बस माघ-फाल्गुन के स्नान-पर्वों के बीच पड़ती है।
क्या दान करें
अन्न, तिल, कपड़े और गाय के लिए चारा दान करना शुभ माना जाता है। इसी महीने के आसपास महाशिवरात्रि भी आती है, इसलिए कई भक्त इस संक्रांति से शिव पूजा का नियम बढ़ा देते हैं।
क्षेत्रीय नाम
तमिलनाडु में मासि और केरल में कुंभम महीना शुरू होता है; मासि मगम जैसे समुद्र-स्नान पर्व इसी महीने आते हैं। पंजाब-हिमाचल में यह फग्गण की संगरांद है। हर महीने की संक्रांति अलग पृष्ठ पर देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कुंभ संक्रांति से कौन सा महीना शुरू होता है?
क्या कुंभ संक्रांति और कुंभ मेला एक ही हैं?
कुंभ संक्रांति का पुण्य काल कब होता है?
कुंभ संक्रांति पर क्या करें?
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