कंस वध
कंस वध वह दिन है जब मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण और बलराम जी ने अत्याचारी राजा कंस का अंत किया था। कार्तिक शुक्ल दशमी को मथुरा में इसका बड़ा उत्सव होता है, जिसमें कंस का पुतला बनाकर शोभायात्रा निकलती है और उसका प्रतीकात्मक वध किया जाता है। यह अधर्म पर धर्म की जीत का उत्सव है।
क्या है और क्यों मनाते हैं
भागवत पुराण के दशम स्कंध में कथा है कि कंस ने धनुष यज्ञ के बहाने अक्रूर जी को भेजकर कृष्ण-बलराम को गोकुल से मथुरा बुलाया। वहाँ कुवलयापीड़ हाथी और चाणूर-मुष्टिक जैसे पहलवानों से उन्हें मरवाने की योजना थी। दोनों भाइयों ने सबको हराया और फिर कृष्ण ने मंच पर चढ़कर कंस का वध किया। इसके बाद माता देवकी और वसुदेव जी कारागार से मुक्त हुए और उग्रसेन जी को फिर से राजा बनाया गया।
किस तिथि को
कार्तिक शुक्ल दशमी, जो सूर्योदय के समय हो। शुक्ल पक्ष होने से उत्तर और दक्षिण, दोनों पंचांगों में महीने का नाम कार्तिक ही है। एक दिन पहले अक्षय नवमी (आँवला नवमी) होती है और अगले दिन देवउठनी एकादशी।
कैसे मनाते हैं
- मथुरा में चतुर्वेदी समाज की ओर से कंस का बड़ा पुतला बनाया जाता है। कृष्ण-बलराम के स्वरूप शोभायात्रा में आगे चलते हैं और कंस टीला क्षेत्र में लाठियों से पुतले का प्रतीकात्मक वध होता है। इसके बाद उत्सव विश्राम घाट की ओर बढ़ता है।
- घरों में लड्डू गोपाल का श्रृंगार और माखन-मिश्री का भोग लगाया जाता है, और शाम को आरती कुंजबिहारी की गाई जाती है।
कार्तिक मास के स्नान और दीपदान के नियम कार्तिक मास लेख में पढ़ें। कृष्ण जन्म की कथा और पूजा के लिए जन्माष्टमी पृष्ठ देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कंस वध कब मनाया जाता है?
कंस का वध किसने किया था?
मथुरा में कंस वध मेला कैसे होता है?
कंस वध से पहले कृष्ण ने किन्हें हराया?
घर पर इस दिन क्या करें?
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