बलराम जयंती
बलराम जयंती भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम जी (दाऊ जी, बलदेव) के प्रकट होने का उत्सव है। इस पृष्ठ की तिथि ब्रज की परंपरा के अनुसार भाद्रपद शुक्ल षष्ठी है, जिसे वहाँ बलदेव छठ कहते हैं। उत्तर भारत में बलराम जी से जुड़ा एक और व्रत, हल षष्ठी या हलछठ, भाद्रपद कृष्ण षष्ठी को मनाया जाता है।
क्या है और क्यों मनाते हैं
बलराम जी शेषनाग के अवतार माने जाते हैं और कई परंपराओं में भगवान विष्णु के दस अवतारों में भी गिने जाते हैं; इस पर अलग-अलग मत हैं, जिनका ज़िक्र विष्णु के 10 अवतार लेख में है। उनका शस्त्र हल और मूसल है, इसलिए वे खेती और किसान के देवता भी माने जाते हैं। मथुरा के पास बलदेव कस्बे का दाऊजी मंदिर उनका सबसे प्रसिद्ध धाम है।
किस तिथि को
ब्रज में बलदेव छठ भाद्रपद शुक्ल षष्ठी को, दिन के पहले भाग (पूर्वाह्न) में षष्ठी देखकर मनाई जाती है। यह राधा अष्टमी से दो दिन पहले पड़ती है। हल षष्ठी पूर्णिमांत पंचांग में भाद्रपद कृष्ण षष्ठी (अमांत में श्रावण कृष्ण षष्ठी) को, जन्माष्टमी से दो दिन पहले होती है। आपके परिवार में कौन-सा दिन माना जाता है, यह घर की परंपरा से तय करें।
कैसे मनाते हैं
- दाऊजी मंदिर में पंचामृत अभिषेक, नई पोशाक, छप्पन भोग और दिन भर बधाई गायन होता है।
- हल षष्ठी पर माताएँ संतान की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं। इस दिन हल से जुता अनाज और गाय का दूध-दही नहीं खाया जाता; तिन्नी (पसही) का चावल, महुआ और भैंस का दूध-दही लिया जाता है।
- आँगन में छोटा गड्ढा बनाकर उसमें झरबेरी, पलाश और कुश की डाल लगाकर हलछठ माता की पूजा होती है। छत्तीसगढ़ में यही कमरछठ कहलाता है।
घर पर बलराम-कृष्ण की युगल छवि के आगे दीपक जलाकर आरती कुंजबिहारी की गाने का भी चलन है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बलराम जयंती कब मनाई जाती है?
हल षष्ठी और बलराम जयंती एक ही हैं?
हल षष्ठी के व्रत में क्या नहीं खाते?
दाऊजी मंदिर कहाँ है?
बलराम जी का शस्त्र क्या है?
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