भाद्रपद पूर्णिमा
भाद्रपद पूर्णिमा क्या है
भादों महीने की पूर्णिमा को भाद्रपद पूर्णिमा कहते हैं। यह वह पूर्णिमा है जिसके अगले दिन से पितृ पक्ष यानी श्राद्ध के सोलह दिन शुरू होते हैं। इसलिए इस दिन देव पूजा के साथ-साथ पितरों का स्मरण भी होता है; जिनका देहांत किसी पूर्णिमा को हुआ हो, उनका श्राद्ध इसी दिन किया जाता है।
किस तिथि को
भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा, स्नान-दान के लिए उदया तिथि के अनुसार। पूर्णिमा श्राद्ध उस दिन होता है जब दोपहर (कुतप-रौहिण काल) में पूर्णिमा हो। पूर्णिमांत पंचांग में अगले दिन से आश्विन कृष्ण पक्ष, यानी पितृ पक्ष लगता है। एक दिन पहले अनंत चतुर्दशी होती है, इसलिए यह पूरा समय उत्सव से श्राद्ध की ओर मुड़ने का है।
कैसे मनाते हैं
- सुबह पवित्र नदी में स्नान और भगवान विष्णु की पूजा; बहुत से घरों में सत्यनारायण कथा इसी दिन होती है।
- उमा-महेश्वर व्रत: कुछ परिवारों में सुहागिनें इस दिन शिव-पार्वती की संयुक्त पूजा करती हैं और व्रत रखती हैं।
- पूर्णिमा श्राद्ध: जिनके पितरों की तिथि पूर्णिमा है, वे तर्पण, पिंडदान और ब्राह्मण भोजन करते हैं। विधि के लिए पितृ पक्ष श्राद्ध विधि देखें।
- शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत पूरा किया जाता है।
श्राद्ध की तैयारी
अगले दिन से पितृ पक्ष शुरू होता है, इसलिए लोग इसी दिन घर की सफाई करते हैं, पितरों की तिथियाँ लिख लेते हैं और ब्राह्मण, कुश, काले तिल, जौ जैसी चीज़ों का इंतज़ाम करते हैं। गया, प्रयागराज और काशी जाने वाले यात्री भी अक्सर यहीं से निकलते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भाद्रपद पूर्णिमा का क्या महत्व है?
क्या पितृ पक्ष भाद्रपद पूर्णिमा से शुरू होता है?
पूर्णिमा श्राद्ध किसका किया जाता है?
उमा-महेश्वर व्रत क्या है?
इस दिन क्या दान करें?
टिप्पणियाँ
टिप्पणी लिखने के लिए लॉगिन करें
टिप्पणियाँ लोड हो रही हैं...
