2026

आश्विन पूर्णिमा 2026

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मुख्य विवरण

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शरद पूर्णिमा (आश्विन पूर्णिमा)

आश्विन पूर्णिमा क्या है

आश्विन महीने की पूर्णिमा को उत्तर भारत में शरद पूर्णिमा कहते हैं। मान्यता है कि साल में केवल इसी रात चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से पूर्ण होता है और उसकी चाँदनी में अमृत जैसा गुण होता है। इसीलिए लोग रात में खीर बनाकर खुले आसमान के नीचे रखते हैं और सुबह उसे प्रसाद के रूप में खाते हैं।

इसी रात को कोजागरी पूर्णिमा भी कहते हैं। लोक मान्यता है कि देवी लक्ष्मी रात में घूमकर पूछती हैं, "को जागर्ति?" यानी कौन जाग रहा है, और जागकर पूजा करने वालों पर कृपा करती हैं। ब्रज में इसे रास पूर्णिमा कहा जाता है, क्योंकि श्रीकृष्ण ने गोपियों के साथ महारास इसी रात रचाया था।

किस तिथि को

आश्विन शुक्ल पूर्णिमा। शरद पूर्णिमा का व्रत, चंद्र पूजा और खीर उस रात को मानी जाती है जब चंद्रोदय के समय पूर्णिमा हो; कोजागरी लक्ष्मी पूजा के लिए आधी रात (निशीथ) में पूर्णिमा होना ज़रूरी माना गया है। स्नान-दान उदया तिथि से होता है, इसलिए कभी-कभी ये दो दिन में बँट जाते हैं।

कैसे मनाते हैं

और क्या होता है इस दिन

महर्षि वाल्मीकि जयंती भी इसी पूर्णिमा को मनाई जाती है। इसी दिन से कार्तिक स्नान शुरू करने की परंपरा है, जो कार्तिक पूर्णिमा तक चलता है। बंगाल, ओडिशा और असम में यह दिन लक्ष्मी पूजा का मुख्य दिन है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शरद पूर्णिमा पर खीर चाँदनी में क्यों रखते हैं?
मान्यता है कि इस रात चंद्रमा की किरणों में अमृत तत्व होता है। खीर को रात भर चाँदनी में रखकर सुबह प्रसाद के रूप में खाया जाता है।
कोजागरी पूर्णिमा और शरद पूर्णिमा में क्या अंतर है?
दोनों आश्विन पूर्णिमा के ही नाम हैं। कोजागरी नाम रात में जागकर लक्ष्मी पूजा करने से जुड़ा है, जबकि शरद पूर्णिमा नाम ऋतु और चंद्रमा से।
शरद पूर्णिमा पर किसकी पूजा होती है?
देवी लक्ष्मी, भगवान विष्णु और चंद्र देव की। ब्रज में राधा-कृष्ण की रास लीला का उत्सव होता है।
शरद पूर्णिमा का व्रत कैसे खोलें?
रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर और पूजा के बाद फलाहार या हल्का भोजन लें। चाँदनी में रखी खीर अगली सुबह प्रसाद के रूप में खाई जाती है।
क्या इस दिन वाल्मीकि जयंती भी होती है?
हाँ, महर्षि वाल्मीकि की जयंती आश्विन पूर्णिमा को ही मनाई जाती है।

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