2026

वाल्मीकि जयंती 2026

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मुख्य विवरण

दिल्ली के लिए

वाल्मीकि जयंती

वाल्मीकि जयंती आदिकवि महर्षि वाल्मीकि के जन्म का दिन है, जिन्होंने संस्कृत में रामायण की रचना की। यह आश्विन पूर्णिमा को, यानी शरद पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। उत्तर भारत, खासकर पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और हिमाचल में इस दिन शोभा यात्राएँ निकलती हैं और रामायण पाठ होता है।

महर्षि वाल्मीकि कौन थे

प्रचलित कथा के अनुसार वाल्मीकि पहले रत्नाकर नाम के डाकू थे, जो परिवार पालने के लिए राहगीरों को लूटते थे। एक दिन उन्होंने नारद मुनि को रोका। नारद जी ने पूछा कि जिस परिवार के लिए तुम पाप करते हो, क्या वे इस पाप में भी हिस्सेदार बनेंगे? घर जाकर पूछने पर सबने मना कर दिया। रत्नाकर का मन बदल गया। राम नाम उनसे सीधा नहीं निकला तो नारद जी ने "मरा मरा" जपने को कहा, जो लगातार दोहराने पर "राम राम" बन गया। वर्षों की तपस्या में उनके शरीर पर दीमक की बाँबी (वल्मीक) जम गई, इसी से वे वाल्मीकि कहलाए।

तमसा नदी के किनारे क्रौंच पक्षी के जोड़े में से एक को शिकारी का बाण लगते देख उनके मुख से जो शोक-भरा श्लोक निकला, उसे संस्कृत का पहला श्लोक माना जाता है। वनवास के समय माता सीता ने उन्हीं के आश्रम में शरण ली और लव-कुश का जन्म वहीं हुआ।

किस तिथि को

आश्विन शुक्ल पूर्णिमा, जिस दिन सूर्योदय पर पूर्णिमा हो। यह दिन शरद पूर्णिमा भी है, इसलिए रात को खीर चाँदनी में रखने की परंपरा भी इसी के साथ चलती है।

कैसे मनाते हैं

  • वाल्मीकि मंदिरों में पूजा, रामायण के अंशों का पाठ और भजन-कीर्तन।
  • शहरों में झाँकियों वाली शोभा यात्राएँ और लंगर।
  • घरों में श्रीराम दरबार के साथ वाल्मीकि जी का स्मरण और श्री राम जी की आरती।

शरद पूर्णिमा की खीर का कारण शरद पूर्णिमा पर खीर क्यों में पढ़ें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वाल्मीकि जयंती कब होती है?
वाल्मीकि जयंती आश्विन पूर्णिमा, यानी शरद पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है।
महर्षि वाल्मीकि को आदिकवि क्यों कहते हैं?
उन्होंने संस्कृत का पहला श्लोक रचा और पहला महाकाव्य रामायण लिखा, इसलिए उन्हें आदिकवि कहा जाता है।
वाल्मीकि नाम कैसे पड़ा?
कथा के अनुसार लंबी तपस्या में उनके शरीर पर दीमक की बाँबी, जिसे संस्कृत में वल्मीक कहते हैं, जम गई थी। इसी से नाम वाल्मीकि पड़ा।
वाल्मीकि जयंती कैसे मनाते हैं?
मंदिरों में पूजा, रामायण पाठ, भजन, शोभा यात्रा और लंगर के साथ यह दिन मनाया जाता है।
लव-कुश का जन्म कहाँ हुआ?
परंपरा के अनुसार माता सीता ने महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में शरण ली थी और वहीं लव-कुश का जन्म हुआ।

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