वाल्मीकि जयंती
वाल्मीकि जयंती आदिकवि महर्षि वाल्मीकि के जन्म का दिन है, जिन्होंने संस्कृत में रामायण की रचना की। यह आश्विन पूर्णिमा को, यानी शरद पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। उत्तर भारत, खासकर पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और हिमाचल में इस दिन शोभा यात्राएँ निकलती हैं और रामायण पाठ होता है।
महर्षि वाल्मीकि कौन थे
प्रचलित कथा के अनुसार वाल्मीकि पहले रत्नाकर नाम के डाकू थे, जो परिवार पालने के लिए राहगीरों को लूटते थे। एक दिन उन्होंने नारद मुनि को रोका। नारद जी ने पूछा कि जिस परिवार के लिए तुम पाप करते हो, क्या वे इस पाप में भी हिस्सेदार बनेंगे? घर जाकर पूछने पर सबने मना कर दिया। रत्नाकर का मन बदल गया। राम नाम उनसे सीधा नहीं निकला तो नारद जी ने "मरा मरा" जपने को कहा, जो लगातार दोहराने पर "राम राम" बन गया। वर्षों की तपस्या में उनके शरीर पर दीमक की बाँबी (वल्मीक) जम गई, इसी से वे वाल्मीकि कहलाए।
तमसा नदी के किनारे क्रौंच पक्षी के जोड़े में से एक को शिकारी का बाण लगते देख उनके मुख से जो शोक-भरा श्लोक निकला, उसे संस्कृत का पहला श्लोक माना जाता है। वनवास के समय माता सीता ने उन्हीं के आश्रम में शरण ली और लव-कुश का जन्म वहीं हुआ।
किस तिथि को
आश्विन शुक्ल पूर्णिमा, जिस दिन सूर्योदय पर पूर्णिमा हो। यह दिन शरद पूर्णिमा भी है, इसलिए रात को खीर चाँदनी में रखने की परंपरा भी इसी के साथ चलती है।
कैसे मनाते हैं
- वाल्मीकि मंदिरों में पूजा, रामायण के अंशों का पाठ और भजन-कीर्तन।
- शहरों में झाँकियों वाली शोभा यात्राएँ और लंगर।
- घरों में श्रीराम दरबार के साथ वाल्मीकि जी का स्मरण और श्री राम जी की आरती।
शरद पूर्णिमा की खीर का कारण शरद पूर्णिमा पर खीर क्यों में पढ़ें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
वाल्मीकि जयंती कब होती है?
महर्षि वाल्मीकि को आदिकवि क्यों कहते हैं?
वाल्मीकि नाम कैसे पड़ा?
वाल्मीकि जयंती कैसे मनाते हैं?
लव-कुश का जन्म कहाँ हुआ?
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