2026

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि: शैलपुत्री पूजा 2026

बुधवार, जुलाई 15, 2026

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आषाढ़ गुप्त नवरात्रि: शैलपुत्री पूजा

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का पहला दिन

आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा को आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का पहला दिन होता है, और इस दिन नवदुर्गा के पहले रूप माँ शैलपुत्री की पूजा की जाती है। सुबह घटस्थापना के बाद उसी कलश के सामने माँ का ध्यान किया जाता है। गुप्त नवरात्रि होने से यह पूजा घर के भीतर, शांत ढंग से होती है।

माँ शैलपुत्री का स्वरूप

हिमालय की पुत्री होने से वे शैलपुत्री कहलाती हैं। पिछले जन्म में वे दक्ष की बेटी सती थीं, जिन्होंने यज्ञ में शिव का अपमान सहन न कर पाने पर देह त्यागी, और इस जन्म में फिर शिव को पाया। वाहन बैल, दाहिने हाथ में त्रिशूल, बाएँ में कमल, माथे पर अर्धचंद्र।

वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥

गुप्त नवरात्रि का पहला दिन कैसा हो

गुप्त नवरात्रि में पहला दिन संकल्प का दिन है। साधक इसी दिन अपने गुरु से मिला मंत्र और जप-संख्या तय करते हैं — कई लोग दस महाविद्याओं (काली, तारा, त्रिपुरसुंदरी (षोडशी), भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुरभैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला) में से किसी एक की उपासना चुनते हैं। गृहस्थ परिवारों के लिए सीधा नियम है: शैलपुत्री का ध्यान, "ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः" की एक माला, गाय के घी का भोग और दुर्गा चालीसा का पाठ। आषाढ़ की उमस में भारी फलाहार की जगह फल, दूध और साबूदाने जैसा हल्का भोजन ठीक रहता है — नियम नवरात्रि व्रत में क्या खाएं में देखें।

पहाड़ की बेटी और वर्षा का महीना

आषाढ़ में बादल पहाड़ों से उतरते हैं और खेतों में बुवाई शुरू होती है। किसान परिवारों में इसी भाव से शैलपुत्री को धरती और पर्वत की शक्ति मानकर पूजा जाता है। अगले दिन ब्रह्मचारिणी पूजा है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि के पहले दिन किसकी पूजा होती है?
आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा को माँ शैलपुत्री की, घटस्थापना के बाद।
शैलपुत्री को क्या भोग लगाएं?
गाय के शुद्ध घी का भोग लगाया जाता है।
गुप्त नवरात्रि में पहले दिन क्या संकल्प लें?
गृहस्थ नौ दिन की पूजा या व्रत का संकल्प लें। साधक गुरु के दिए मंत्र और जप-संख्या का संकल्प लेते हैं।
क्या गुप्त नवरात्रि में भी नवदुर्गा क्रम से पूजा होती है?
हाँ, गृहस्थ परिवार उसी क्रम से पूजा करते हैं: पहले दिन शैलपुत्री, दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी और आगे भी। तंत्र साधक महाविद्याओं का क्रम गुरु के अनुसार रखते हैं।
शैलपुत्री का मंत्र क्या है?
वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्, वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्। जाप के लिए ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः।

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