आषाढ़ गुप्त नवरात्रि: महागौरी पूजा
महागौरी पूजा क्या है
आषाढ़ शुक्ल अष्टमी, गुप्त नवरात्रि का आठवाँ दिन, माँ महागौरी की पूजा का दिन है। यही दुर्गा अष्टमी है, इसलिए बहुत से घरों में आज हवन और कन्या पूजन भी होता है। गुप्त नवरात्रि में यह सब छोटे स्तर पर, घर के लोगों के बीच किया जाता है।
कथा और स्वरूप
शिव को पाने के लिए पार्वती ने इतनी कठोर तपस्या की कि धूप, वर्षा और धूल से उनका शरीर काला पड़ गया। जब शिव प्रसन्न हुए, तो उन्होंने गंगाजल से माँ को स्नान कराया और उनका रंग शंख, चंद्रमा और कुंद के फूल जैसा उजला हो गया। इसी उजले रूप को महागौरी कहते हैं। माँ सफ़ेद वस्त्र पहनती हैं, वाहन बैल है, और चार भुजाओं में त्रिशूल और डमरू हैं, बाकी दो अभय और वर मुद्रा में।
श्वेते वृषे समारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः। महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥
गुप्त नवरात्रि की अष्टमी
शारदीय नवरात्रि की अष्टमी पर मोहल्ले भर की कन्याएँ बुलाई जाती हैं, पर गुप्त नवरात्रि में ज़्यादातर परिवार घर की या पड़ोस की दो-चार कन्याओं के साथ ही पूजन कर लेते हैं, या कन्या पूजन नवमी को करते हैं। जिनके कुल में अष्टमी को हवन की रीत है, वे आज सुबह छोटा हवन करते हैं। हर महीने की शुक्ल अष्टमी पर रखा जाने वाला दुर्गाष्टमी व्रत भी आज के दिन से जुड़ जाता है।
आज क्या करें
- माँ को सफ़ेद फूल, सफ़ेद चुनरी और सुहाग का सामान चढ़ाएँ।
- भोग में नारियल चढ़ाने की परंपरा है; कुछ घरों में हलवा-पूरी-चना भी आज ही बनता है।
- कन्याओं के पैर धोकर, तिलक लगाकर भोजन कराएँ और दक्षिणा दें। पूरी विधि कन्या पूजन विधि में है।
- हवन करना हो तो हवन विधि और सामग्री देख लें।
शाम की आरती के लिए जय अम्बे गौरी पढ़ें। कल नवमी को माँ सिद्धिदात्री की पूजा के साथ नवरात्रि पूरी होगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
महागौरी पूजा किस दिन होती है?
माँ महागौरी को क्या भोग लगाएं?
क्या गुप्त नवरात्रि में कन्या पूजन होता है?
माँ महागौरी का रंग सफ़ेद क्यों है?
अष्टमी को हवन करें या नवमी को?
टिप्पणियाँ
टिप्पणी लिखने के लिए लॉगिन करें
टिप्पणियाँ लोड हो रही हैं...
