आषाढ़ गुप्त नवरात्रि: कूष्मांडा पूजा
कूष्मांडा पूजा क्या है
आषाढ़ शुक्ल चतुर्थी, गुप्त नवरात्रि का चौथा दिन, माँ कूष्मांडा को समर्पित है। देवी कवच में गिनाए गए नवदुर्गा क्रम में यह चौथा स्वरूप है। इस दिन घर पर कलश के सामने माँ का ध्यान, दुर्गा सप्तशती का पाठ और मालपुए का भोग प्रमुख है।
कथा और स्वरूप
जब सृष्टि नहीं थी, चारों ओर केवल अंधकार था, तब माँ ने अपनी हल्की-सी मुस्कान से ब्रह्मांड रूपी अंड को जन्म दिया। "कु" यानी थोड़ा, "ऊष्मा" यानी ऊर्जा और "अंड" यानी ब्रह्मांड, इसी से नाम बना कूष्मांडा। माना जाता है कि वे सूर्य मंडल के भीतर निवास करती हैं, इसलिए उनका तेज सूर्य जैसा है। आठ भुजाओं के कारण उन्हें अष्टभुजा भी कहते हैं; हाथों में कमंडल, धनुष-बाण, कमल, अमृत कलश, चक्र, गदा और जपमाला, और वाहन सिंह।
सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च। दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥
गुप्त नवरात्रि में सप्तशती पाठ
गुप्त नवरात्रि में बहुत से परिवार दुर्गा सप्तशती के 13 अध्याय नौ दिनों में बाँटकर पढ़ते हैं, और कुछ लोग रोज़ पूरा पाठ करते हैं। चौथे दिन तक आते-आते मध्यम चरित्र, यानी महिषासुर वध वाला हिस्सा, चल रहा होता है। पाठ धीमे स्वर में, बिना माइक और बिना भीड़ के करें; यही इस नवरात्रि का स्वभाव है। आषाढ़ में बारिश शुरू हो चुकी होती है, इसलिए दीपक ऐसी जगह रखें जहाँ हवा और नमी से बुझे नहीं।
आज क्या करें
- माँ को लाल फूल, खासकर गुड़हल, और सिंदूर चढ़ाएँ।
- भोग में मालपुआ चढ़ाने की परंपरा है; व्रत रखने वाले कुट्टू या सिंघाड़े के आटे का मालपुआ बना सकते हैं।
- कुछ शाक्त परंपराओं में कुम्हड़े (पेठे) को माँ को अर्पित किया जाता है, क्योंकि कूष्मांड का एक अर्थ कुम्हड़ा भी है।
- संध्या को माँ अम्बे की आरती करें।
घटस्थापना की विधि कलश स्थापना विधि में है। अगला दिन स्कंदमाता पूजा का है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
माँ कूष्मांडा की पूजा कब होती है?
माँ कूष्मांडा को कौन सा भोग प्रिय है?
कूष्मांडा नाम का अर्थ क्या है?
गुप्त नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती कैसे पढ़ें?
क्या इस दिन कुम्हड़ा चढ़ाया जाता है?
टिप्पणियाँ
टिप्पणी लिखने के लिए लॉगिन करें
टिप्पणियाँ लोड हो रही हैं...
