आषाढ़ गुप्त नवरात्रि: स्कंदमाता पूजा
स्कंदमाता पूजा क्या है
आषाढ़ शुक्ल पंचमी को, गुप्त नवरात्रि के पाँचवें दिन, माँ स्कंदमाता की पूजा होती है। ये भगवान कार्तिकेय, जिन्हें स्कंद कहा जाता है, की माता हैं। संतान के सुख और परिवार की कुशलता के लिए माताएँ इस दिन खास श्रद्धा से पूजा करती हैं।
स्वरूप और कथा
तारकासुर को वरदान था कि उसे केवल शिव का पुत्र ही मार सकता है। शिव-पार्वती के पुत्र स्कंद देवताओं के सेनापति बने और उन्होंने तारकासुर का वध किया। उसी बालक स्कंद को गोद में लिए माँ का यह रूप स्कंदमाता कहलाता है। माँ की चार भुजाएँ हैं: दो में कमल, एक से बालक स्कंद को थामे हैं और एक वर मुद्रा में। वे कमल पर विराजती हैं, इसलिए पद्मासना भी कहलाती हैं, और वाहन सिंह है।
सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥
गुप्त नवरात्रि की साधना: जाप और मौन
गुप्त नवरात्रि में बहुत से साधक रोज़ तय संख्या में मंत्र जाप करते हैं, जैसे नवार्ण मंत्र की 1, 5 या 11 माला, और दिन का कुछ हिस्सा मौन में बिताते हैं। गृहस्थ के लिए नियम सरल रखें: जितनी माला संकल्प में ली है, उतनी रोज़ पूरी करें, एक ही आसन और एक ही समय पर। पंचमी तक आते-आते शरीर व्रत का आदी हो जाता है, इसलिए यह दिन जाप बढ़ाने के लिए अच्छा माना जाता है।
आज क्या करें
- माँ को पीले फूल और पीले वस्त्र चढ़ाएँ।
- भोग में केला चढ़ाने की परंपरा है; बाद में इसे ब्राह्मण या ज़रूरतमंद को भी दें।
- बच्चों को पास बिठाकर पूजा कराएँ और उनके माथे पर तिलक लगाएँ।
- संध्या आरती के बाद दुर्गा चालीसा पढ़ें।
नवरात्रि की तिथियाँ नवरात्रि कैलेंडर में देखें, और व्रत के भोजन के नियम नवरात्रि व्रत में क्या खाएं में।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
स्कंदमाता कौन हैं?
स्कंदमाता को क्या भोग लगाएं?
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि में स्कंदमाता पूजा कब है?
गुप्त नवरात्रि में कौन सा मंत्र जपें?
क्या संतान सुख के लिए स्कंदमाता की पूजा होती है?
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