2026

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि: चंद्रघंटा पूजा 2026

शुक्रवार, जुलाई 17, 2026

मुख्य विवरण

दिल्ली के लिए

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि: चंद्रघंटा पूजा

चंद्रघंटा पूजा क्या है

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि के तीसरे दिन, यानी आषाढ़ शुक्ल तृतीया को, नवदुर्गा के तीसरे रूप माँ चंद्रघंटा की पूजा होती है। गुप्त नवरात्रि में यह पूजा ज़्यादातर घर के भीतर, शांत ढंग से और साधना के भाव से की जाती है। जिन्होंने प्रतिपदा को कलश बैठाया है, वे आज उसी कलश के सामने माँ का ध्यान करते हैं।

माँ चंद्रघंटा का स्वरूप

माँ के माथे पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सजा है, इसी से नाम पड़ा चंद्रघंटा। रंग सोने जैसा, दस भुजाएँ, हाथों में खड्ग, त्रिशूल, गदा, धनुष-बाण और कमल, और वाहन सिंह। मान्यता है कि युद्ध को तैयार माँ के घंटे की ध्वनि से ही असुर काँप उठते थे, पर भक्त के लिए यही रूप निडरता और मन की शांति देने वाला है। ध्यान का प्रचलित श्लोक:

पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता। प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥

गुप्त नवरात्रि में यह दिन अलग कैसे है

चैत्र और शारदीय नवरात्रि में पंडाल, जागरण और मंदिरों में लंबी कतारें होती हैं। आषाढ़ और माघ की गुप्त नवरात्रि इसके उलट है: न शोर, न दिखावा। तंत्र परंपरा के साधक इन दिनों दस महाविद्याओं की उपासना करते हैं, जबकि गृहस्थ परिवार नवदुर्गा पूजा, दुर्गा सप्तशती पाठ और मंत्र जाप चुपचाप करते हैं। पुराने लोग कहते हैं कि साधना जितनी गुप्त रहे, उतना अच्छा। एक दिन पहले आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को जगन्नाथ रथयात्रा निकलती है, इसलिए कई घरों में इन दिनों भगवान जगन्नाथ का स्मरण भी साथ चलता है।

आज क्या करें

  • सुबह स्नान के बाद कलश और माँ के चित्र के सामने घी का दीपक जलाएँ।
  • लाल या पीले फूल, अक्षत और रोली चढ़ाकर ऊपर का श्लोक पढ़ें।
  • भोग में दूध या दूध से बनी खीर-मिठाई चढ़ाने की परंपरा है।
  • पूजा में घंटी ज़रूर बजाएँ; इस दिन घंटा-ध्वनि का खास महत्व माना गया है।
  • शाम को जय अम्बे गौरी आरती या दुर्गा चालीसा का पाठ करें।

नौ दिनों के रूप और भोग एक जगह नवदुर्गा के नौ रूप में दिए हैं, और व्रत के भोजन के लिए नवरात्रि व्रत में क्या खाएं देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि में चंद्रघंटा पूजा किस दिन होती है?
आषाढ़ शुक्ल तृतीया को, जो गुप्त नवरात्रि का तीसरा दिन है। सूर्योदय के समय जो तिथि हो, उसी से दिन तय होता है।
माँ चंद्रघंटा को क्या भोग लगाएं?
परंपरा से दूध या दूध से बनी चीज़ें, जैसे खीर या बर्फी, चढ़ाई जाती हैं। बाद में यह प्रसाद परिवार में बाँट दें।
गुप्त नवरात्रि और सामान्य नवरात्रि में क्या फर्क है?
गुप्त नवरात्रि आषाढ़ और माघ में आती है और इसमें सार्वजनिक उत्सव की जगह घर पर शांत साधना, पाठ और जाप पर ज़ोर रहता है। तांत्रिक साधक इन दिनों दस महाविद्याओं की उपासना करते हैं।
क्या गृहस्थ गुप्त नवरात्रि कर सकते हैं?
हाँ। गृहस्थ लोग इन दिनों सामान्य नवरात्रि की तरह नवदुर्गा पूजा, दुर्गा सप्तशती पाठ और व्रत रख सकते हैं; तंत्र साधना ज़रूरी नहीं है।
चंद्रघंटा पूजा में घंटी का क्या महत्व है?
माँ के नाम में ही घंटा है, इसलिए इस दिन पूजा और आरती में घंटी बजाना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इसकी ध्वनि नकारात्मकता दूर करती है।

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