नाम से राशि कैसे जानें: अक्षर और नक्षत्र

नाम से राशि जानने के लिए नाम का पहला उच्चारित अक्षर देखा जाता है; हर राशि के नौ अक्षर उसके नक्षत्र चरणों से तय होते हैं। यह नाम राशि जन्म के समय की चंद्र राशि से अलग भी हो सकती है।

N. R. Sharma (Nutalapati Rajeshwara Sharma)
लेखन: · वेद पण्डित, लेखकअद्यतन · 5 मिनट का पाठ
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नाम से राशि जानने के लिए नाम का पहला अक्षर (उच्चारण के हिसाब से) देखा जाता है। हर राशि के साथ नौ अक्षर जुड़े हैं, जो उसके नक्षत्र-चरणों से आते हैं, जैसे "रा, री, रू, रे, रो" से शुरू होने वाले नाम तुला राशि के माने जाते हैं। इसे नाम राशि कहते हैं, जो जन्म के समय की चंद्र राशि से अलग भी हो सकती है।

जन्म राशि और नाम राशि

हिंदू ज्योतिष में "राशि" का मतलब आमतौर पर जन्म राशि होता है, यानी जन्म के समय चंद्रमा जिस राशि में था। इसे जानने के लिए जन्म की तारीख़, समय और स्थान चाहिए। जन्म के समय चंद्रमा किस नक्षत्र के किस चरण में था, उससे बच्चे के नाम का पहला अक्षर निकलता है। यही परंपरागत नामकरण का आधार है।

नाम राशि उल्टी दिशा से चलती है: नाम पहले से है, उसके पहले अक्षर से राशि मान ली जाती है। अगर नाम जन्म नक्षत्र के अक्षर से रखा गया है, तो नाम राशि और जन्म राशि एक ही होंगी। अगर नाम परिवार ने अपनी पसंद से रखा है, तो दोनों अलग हो सकती हैं। ध्यान रहे, अख़बारों में अंग्रेज़ी तारीख़ों वाली "सन साइन" राशि (जैसे 21 मार्च से 19 अप्रैल मेष) एक तीसरी चीज़ है, जो सूर्य की स्थिति पर आधारित है।

12 राशियाँ और उनके अक्षर

नीचे की तालिका पारंपरिक अवकहड़ा चक्र पर आधारित है। हर राशि सवा दो नक्षत्रों (नौ चरणों) की होती है और हर चरण का एक अक्षर है।

राशिनाम के पहले अक्षरनक्षत्र (चरण)
मेषचू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अअश्विनी, भरणी, कृत्तिका (1)
वृषभई, उ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वोकृत्तिका (2-4), रोहिणी, मृगशिरा (1-2)
मिथुनका, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, हामृगशिरा (3-4), आर्द्रा, पुनर्वसु (1-3)
कर्कही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डोपुनर्वसु (4), पुष्य, आश्लेषा
सिंहमा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टेमघा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी (1)
कन्याटो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पोउत्तरा फाल्गुनी (2-4), हस्त, चित्रा (1-2)
तुलारा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, तेचित्रा (3-4), स्वाति, विशाखा (1-3)
वृश्चिकतो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यूविशाखा (4), अनुराधा, ज्येष्ठा
धनुये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ढा, भेमूल, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा (1)
मकरभो, जा, जी, खी, खू, खे, खो, गा, गीउत्तराषाढ़ा (2-4), श्रवण, धनिष्ठा (1-2)
कुंभगू, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दाधनिष्ठा (3-4), शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद (1-3)
मीनदी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, चीपूर्वा भाद्रपद (4), उत्तरा भाद्रपद, रेवती

अक्षर पहचानने के आसान नियम

  • उच्चारण देखें, वर्तनी नहीं: "Chetan" अंग्रेज़ी में C से है पर उच्चारण "चे" है, इसलिए मेष। "Jyoti" का पहला उच्चारण "ज्यो" है, इसमें "ज" देखा जाएगा।
  • मात्रा का ध्यान: "रा" और "रो" दोनों तुला में हैं, पर "ता" तुला में और "तो" वृश्चिक में। जहाँ ठीक मात्रा तालिका में न हो, वहाँ सबसे पास वाली मात्रा देखें।
  • संयुक्त अक्षर: "प्र", "क्र", "श्र" जैसे अक्षरों में पहला व्यंजन (प, क, श) देखा जाता है।
  • श से शुरू होने वाले नाम: इन पर पंडितों के मत अलग हैं। कुछ इसे स के साथ कुंभ मानते हैं, कुछ ष के साथ कन्या। ऐसे में परिवार के पंडित जी जिस परंपरा को मानते हैं, उसी का पालन करें।
  • स्वर से शुरू होने वाले नाम: अ और आ मेष में, इ, ई, उ, ऊ, ए और ओ वृषभ में गिने जाते हैं।

नक्षत्र चरण से अक्षर

हर नक्षत्र के चार चरण होते हैं और 27 नक्षत्रों के कुल 108 चरण बनते हैं। बारह राशियों में बाँटने पर हर राशि को नौ चरण मिलते हैं। उदाहरण के लिए, रोहिणी नक्षत्र के चार चरणों के अक्षर हैं ओ, वा, वी, वू। अगर बच्चे का जन्म रोहिणी के तीसरे चरण में हुआ है तो उसका नाम "वी" से रखा जाता है, जैसे विनय या विधि। हर नक्षत्र का स्वामी और स्वभाव जानने के लिए 27 नक्षत्र वाला लेख देखें।

किसी दिन चंद्रमा किस नक्षत्र में है, यह आज के पंचांग में लिखा रहता है। पर बच्चे का सही चरण निकालने के लिए जन्म का सटीक समय चाहिए, क्योंकि एक चरण लगभग छह घंटे के आसपास का ही होता है।

नाम राशि का उपयोग

  1. नामकरण: परंपरा में नवजात का नाम जन्म नक्षत्र के अक्षर से रखा जाता है। विधि नामकरण संस्कार में दी गई है।
  2. राशिफल पढ़ना: जिन्हें जन्म समय नहीं पता, वे दैनिक राशिफल के लिए नाम राशि का उपयोग करते हैं।
  3. गुण मिलान: जब वर या वधू का जन्म समय उपलब्ध न हो, तब कई पंडित "प्रचलित नाम" से गुण मिलाते हैं। जन्म विवरण हो तो उसी से मिलान अधिक भरोसेमंद माना जाता है।
  4. मुहूर्त में चंद्र बल: किसी काम का दिन चुनते समय चंद्र बल और तारा बल देखे जाते हैं, जिसके लिए राशि और नक्षत्र दोनों चाहिए। पंचांग के ये अंग पंचांग कैसे पढ़ें में समझाए गए हैं।

सीमाएँ

नाम राशि एक सुविधाजनक तरीका है, पूरी कुंडली का विकल्प नहीं। कुछ बातें ध्यान में रखें:

  • एक ही व्यक्ति के कई नाम हो सकते हैं, जैसे घर का नाम, स्कूल का नाम। परंपरा में वह नाम लिया जाता है जिससे व्यक्ति आमतौर पर पुकारा जाता है और जिस पर वह प्रतिक्रिया देता है।
  • विवाह, बड़े निवेश या स्वास्थ्य जैसे फ़ैसले केवल नाम राशि देखकर न लें। जन्म विवरण हो तो पूरी कुंडली दिखाएँ।
  • क्षेत्रीय उच्चारण से भी फ़र्क़ पड़ता है। बंगाल में "व" को "ब" बोलते हैं, तो वहाँ पंडित स्थानीय उच्चारण के हिसाब से राशि मानते हैं।

शादी के दिन और मुहूर्त चुनने में राशि कैसे काम आती है, यह विवाह मुहूर्त कैसे निकालें में विस्तार से है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नाम से राशि कैसे पता करें?

नाम का पहला अक्षर उच्चारण के हिसाब से देखें और ऊपर की तालिका में उसकी राशि खोजें। जैसे रा, री, रू से शुरू होने वाले नाम तुला राशि के माने जाते हैं।

नाम राशि और जन्म राशि में क्या अंतर है?

जन्म राशि जन्म के समय चंद्रमा की स्थिति से तय होती है, जबकि नाम राशि नाम के पहले अक्षर से मानी जाती है। नाम जन्म नक्षत्र से रखा गया हो तो दोनों एक होती हैं।

राशिफल के लिए कौन सी राशि देखें?

जन्म समय पता हो तो जन्म राशि देखना बेहतर है। जन्म समय न पता हो तो नाम राशि से राशिफल पढ़ा जा सकता है।

श से शुरू होने वाले नाम की राशि क्या है?

इस पर मत अलग हैं। कुछ पंडित इसे स के साथ कुंभ मानते हैं और कुछ ष के साथ कन्या, इसलिए अपने परिवार के पंडित की परंपरा मानें।

एक राशि में कितने अक्षर होते हैं?

हर राशि में नौ अक्षर होते हैं, क्योंकि हर राशि सवा दो नक्षत्रों यानी नौ चरणों की होती है और हर चरण का एक अक्षर है।

N. R. Sharma (Nutalapati Rajeshwara Sharma)
लेखक के बारे में

नूतलपाटि राजेश्वर शर्मा

वेद पण्डित, लेखक

नूतलपाटि राजेश्वर शर्मा जी वेद पण्डित और लेखक हैं। अनेक वर्षों से वे दुर्गा देवी की आराधना का अध्ययन और आचरण करते आ रहे हैं। पूजा विधि, मंत्रों और स्तोत्रों को सामान्य भक्तों के लिए सरलता से समझाना उनका लक्ष्य है। वे “श्री दुर्गा नित्याराधना” ग्रंथ के लेखक हैं। इस साइट के लेख उनकी रचनाएँ हैं, या उनके ग्रंथों पर आधारित हैं।

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