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श्री सुब्रह्मण्य मालामंत्रः

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श्री सुब्रह्मण्य मालामंत्रः

ॐ अस्य श्रीसुब्रह्मण्यमालामहामंत्रस्य, ब्रह्मा ऋषिः, गायत्री छंदः, श्रीसुब्रह्मण्यः कुमारो देवता, श्रीं बीजं, ह्रीं शक्तिः, क्लीं कीलकं, मम सर्वाभीष्टसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ||

करन्यासः –
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं कुमाराय अंगुष्ठाभ्यां नमः |
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं शरवणभवाय तर्जनीभ्यां नमः |
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं कार्तिकेयाय मध्यमभ्यां नमः |
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं मयूरवाहनाय अनामिकाभ्यां नमः |
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं स्कंदाय कनिष्ठिकाभ्यां नमः |
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं सुब्रह्मण्याय करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः |
अंगन्यासः –
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं कुमाराय हृदयाय नमः |
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं शरवणभवाय शिरसे स्वाहा |
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं कार्तिकेयाय शिखायै वषट् |
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं मयूरवाहनाय कवचाय हुं |
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं स्कंदाय नेत्रत्रयाय वौषट् |
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं सुब्रह्मण्याय अस्त्राय फट् |
भूर्भुवस्सुवरोमिति दिग्बंधः |

ध्यानं |
बालार्कायुतसन्निभं शिखिरथारूढं च षड्भिर्मुखैः
भास्वद्द्वादशलोचनं मणिमयैराकल्पकैरावृतं |
विद्यापुस्तकशक्तिकुक्कुटधनुर्बाणासिखेटान्वितं
भ्राजत्कार्मुकपंकजं हृदि महासेनान्यामाद्यं भजे ||

लमित्यादि पंचपूजा |

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं नमो भगवते रुद्रकुमाराय अष्टांगयोगनायकाय महार्हमणिभिरलंकृताय क्रौंचगिरिविदारणाय तारकसंहारकारणाय शक्तिशूलगदाखड्गखेटकपाशांकुशमुसलप्रासाद्यनेक चित्रायुधालंकृत द्वादशभुजाय हारनूपुरकेयूरकटककुंडलादिविभूषिताय सकलदेवसेनासमूहपरिवृताय महादेवसेनासम्मोहनाय सर्वरुद्रगणसेविताय सकलमातृगणसेविताय रुद्रगांगेयाय शरवणसंभवाय सर्वलोकशरण्याय, सर्वरोगान् हन हन, दुष्टान् त्रासय त्रासय, सर्वभूतप्रेतपिशाचब्रह्मराक्षसान् उत्सारय उत्सारय, अपस्मारकुष्ठादीन् आकर्षय आकर्षय भंजय भंजय, वातपित्तश्लेष्मज्वरामयादीन् आशु निवारय निवारय, दुष्टं भीषय भीषय, सर्वलुंठाकादीन् उत्सादय उत्सादय, सर्वरौद्रं तनुरुत्सारय उत्सारय, मां रक्ष रक्ष, भगवन् कार्तिकेय प्रसीद प्रसीद |

ॐ नमो भगवते सुब्रह्मण्याय महाबलपराक्रमाय क्रौंचगिरिमर्दनाय सर्वासुरप्राणापहरणाय इंद्राणीमांगळ्यरक्षकाय त्रयस्त्रिंशत्कोटिदेवतावंदिताय महाप्रळयकालाग्निरुद्रकुमाराय दुष्टनिग्रहशिष्टपरिपालकाय वीरमहाबलसर्वप्रचंडमारुतमहाबलहनुमन्नारसिंह वराहादिसमस्तश्वेतवराहसहिताय इंद्राग्नियम निरृतिवरुणवायुकुबेरेशानाद्याकाशपाताळदिग्बंधनाय सर्वचंडग्रहादिनवकोटिगुरुनाथाय नवकोटिदानवशाकिनी डाकिनी वनदुर्गापीडाहरी कालभैरवी गंडभैरवी फूं फूं दुष्टभैरवीसहित भूतप्रेतपिशाचवेताळ ब्रह्मराक्षसादिदुष्टग्रहान् भंजय भंजय, षण्मुख वज्रधर समस्तग्रहान् नाशय नाशय, समस्तरोगान् नाशय नाशय, समस्तदुरितं नाशय नाशय, ॐ रं ह्रां ह्रीं मयूरवाहनाय हुं फट् स्वाहा | ॐ सौं श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं सौं नं कं सौं शरवणभव |

अथ कुमारतंत्रे सुब्रह्मण्यमालामंत्रः ||

ॐ सुं सुब्रह्मण्याय स्वाहा | ॐ कार्तिकेय पार्वतीनंदन स्कंद वरद वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा | ॐ सौं सूं सुब्रह्मण्याय शक्तिहस्ताय ऋग्यजुः सामाथर्वणाय असुरकुलमर्दनाय योगाय योगाधिपतये शांताय शांतरूपिणे शिवाय शिवनंदनाय षष्ठीप्रियाय सर्वज्ञानहृदयाय षण्मुखाय श्रीं श्रीं ह्रीं क्षं गुह रविकंकालाय कालरूपिणे सुरराजाय सुब्रह्मण्याय नमः |
ॐ नमो भगवते महापुरुषाय मयूरवाहनाय गौरीपुत्राय ईशात्मजाय स्कंदस्वामिने कुमाराय तारकारये षण्मुखाय द्वादशनेत्राय द्वादशभुजाय द्वादशात्मकाय शक्तिहस्ताय सुब्रह्मण्याय ॐ नमः स्वाहा |

उत्तरन्यासः ||
करन्यासः –
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं कुमाराय अंगुष्ठाभ्यां नमः |
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं शरवणभवाय तर्जनीभ्यां नमः |
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं कार्तिकेयाय मध्यमभ्यां नमः |
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं मयूरवाहनाय अनामिकाभ्यां नमः |
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं स्कंदाय कनिष्ठिकाभ्यां नमः |
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं सुब्रह्मण्याय करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः |
अंगन्यासः –
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं कुमाराय हृदयाय नमः |
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं शरवणभवाय शिरसे स्वाहा |
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं कार्तिकेयाय शिखायै वषट् |
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं मयूरवाहनाय कवचाय हुं |
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं स्कंदाय नेत्रत्रयाय वौषट् |
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं सुब्रह्मण्याय अस्त्राय फट् |
भूर्भुवस्सुवरोमिति दिग्विमोकः |

इति श्रीसुब्रह्मण्यमालामंत्रः ||

अर्थ

श्री सुब्रह्मण्य माला मंत्र भगवान सुब्रह्मण्य स्वामी को समर्पित एक अत्यंत शक्तिशाली और पवित्र मंत्रों की माला है। यह कुमारा, शरवणभव, कार्तिकेय, स्कंद और मयूरवाहन जैसे सुब्रह्मण्य के विभिन्न रूपों का आवाहन करता है। यह मंत्र भक्तों के जीवन से सभी अशुभताओं को दूर कर शुभता और कल्याण का संचार करता है, एक दिव्य कवच की तरह कार्य करता है। यह भक्तों के मन को शुद्ध कर साहस, ज्ञान और विजय प्रदान करने की क्षमता रखता है।

यह महामाला मंत्र केवल शब्दों का समूह नहीं, बल्कि दिव्य शक्ति का प्रतीक है। मंत्र जप से पहले किए जाने वाले करन्यास और अंगन्यास शरीर और मन को शुद्ध करते हैं, उन्हें मंत्र की शक्ति को ग्रहण करने के लिए तैयार करते हैं। 'ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं' जैसे बीजाक्षर धन, शक्ति और आकर्षण का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो भक्तों की सभी इच्छाओं को पूर्ण करने में सहायक होते हैं। यह मंत्र भगवान सुब्रह्मण्य की कृपा प्राप्त करने का एक सीधा मार्ग है, जो भक्तों को सभी विपत्तियों से बचाता है।

इस माला मंत्र में भगवान सुब्रह्मण्य के विभिन्न नामों का स्मरण किया जाता है, प्रत्येक नाम स्वामी के एक विशिष्ट गुण या शक्ति को दर्शाता है:

  • कुमार: ज्ञानशक्ति, साहस और विजय प्रदान करने वाले।
  • शरवणभव: पवित्र दिव्य उत्पत्ति का सूचक है, पापों का नाश करने वाले।
  • कार्तिकेय: षट्शक्तियों का स्वरूप, अज्ञान और शत्रुओं का संहार करने वाले।
  • मयूरवाहन: मोर पर सवार होने वाले, गति, सुरक्षा और चैतन्य का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह मन की चंचलता को नियंत्रित कर आध्यात्मिक प्रगति में सहायता करता है।
  • स्कंद: धर्म के रक्षक, दुष्ट शक्तियों का दमन करने वाले, समस्त कल्याण प्रदान करने वाले।
  • सुब्रह्मण्य: कृपालु, भक्तों की इच्छाओं को पूर्ण करने वाले चिंतामणि।

ये सभी नाम स्वामी के विशिष्ट गुणों और शक्तियों को दर्शाते हैं, जो सामूहिक रूप से भक्त को पूर्ण सुरक्षा और समृद्धि प्रदान करते हैं। इस माला मंत्र का भक्तिपूर्वक जप करने से भक्तों के जीवन में अद्भुत परिवर्तन आते हैं। यह मन और आत्मा को शुद्ध करता है, सभी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जाओं से रक्षा करता है और सकारात्मकता को आकर्षित करता है।

प्रयोजन (Benefits):

  • शत्रु भय निवारण और सुरक्षा: यह मंत्र दुष्ट शक्तियों, शत्रुओं और काले जादू जैसे नकारात्मक प्रभावों से भक्त की रक्षा करता है, एक दिव्य कवच की तरह कार्य करता है।
  • बाधाओं का निवारण और विजय: जीवन के सभी क्षेत्रों में आने वाली बाधाओं को दूर करता है, शिक्षा, नौकरी, व्यवसाय और प्रतिस्पर्धा में सफलता और विजय दिलाता है।
  • स्वास्थ्य और समृद्धि: शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार करता है, रोगों से मुक्ति दिलाता है और धन, ऐश्वर्य तथा सुख में वृद्धि करता है।
  • मानसिक शांति और धैर्य: भय, चिंता और तनाव को कम कर आत्मविश्वास, धैर्य और मन की शांति प्रदान करता है।
  • पारिवारिक कल्याण और संतान प्राप्ति: परिवार में सामंजस्य और शांति लाता है, बच्चों के विकास में सहायता करता है और संतान प्राप्ति का आशीर्वाद प्रदान करता है।
  • इच्छित फलों की प्राप्ति और आध्यात्मिक प्रगति: भक्तों की सभी शुभ मनोकामनाओं को शीघ्रता से पूर्ण करता है और आध्यात्मिक जागृति तथा दिव्य अनुग्रह प्रदान करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्री सुब्रह्मण्य माला मंत्र क्या है?
यह भगवान सुब्रह्मण्य स्वामी के विभिन्न रूपों (कुमार, शरवणभव, कार्तिकेय, स्कंद) का आवाहन करने वाला एक अत्यंत शक्तिशाली मंत्रों का समूह है। यह मंत्र भक्तों को सुरक्षा, ज्ञान और समृद्धि प्रदान करता है।
इस मंत्र का जप कब और कैसे करना चाहिए?
मंगलवार, षष्ठी तिथि, कृत्तिका नक्षत्र जैसे शुभ दिनों में इस मंत्र का जप करना उत्तम है। स्नान करके शुद्ध होकर, पूर्व दिशा की ओर मुख करके, रुद्राक्ष माला का उपयोग करके भक्तिपूर्वक जप करना चाहिए।
श्री सुब्रह्मण्य माला मंत्र का जप करने के क्या लाभ हैं?
यह शत्रु भय, बाधाओं और रोगों को दूर करता है। यह साहस, ज्ञान, धन, स्वास्थ्य, पारिवारिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है।
इस मंत्र का जप कौन कर सकता है?
सुब्रह्मण्य स्वामी की कृपा चाहने वाले, जीवन में बाधाओं का सामना कर रहे लोग, शत्रुओं से पीड़ित व्यक्ति और आध्यात्मिक उत्थान की इच्छा रखने वाला कोई भी इस मंत्र का जप कर सकता है।
इस मंत्र का जप कितनी बार करना चाहिए?
प्रतिदिन कम से कम 108 बार या उसके गुणकों में जप करना उत्तम है। विशिष्ट फलों के लिए संकल्पपूर्वक एक निश्चित संख्या में जप किए जा सकते हैं।
इस मंत्र की उत्पत्ति क्या है?
यह माला मंत्र प्राचीन पुराणों और तांत्रिक ग्रंथों में वर्णित है। यह गुरु-शिष्य परंपरा से चला आ रहा एक अत्यंत प्रभावशाली मंत्र है।

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