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1। ॐ स्कंदाय नमः
2। ॐ गुहाय नमः
3। ॐ षण्मुखाय नमः
4। ॐ फालनेत्रसुताय नमः
5। ॐ प्रभवे नमः
6। ॐ पिंगळाय नमः
7। ॐ कृत्तिकासूनवे नमः
8। ॐ शिखिवाहाय नमः
9। ॐ द्विषड्भुजाय नमः
10। ॐ द्विषण्णेत्राय नमः
11। ॐ शक्तिधराय नमः
12। ॐ पिशिताशप्रभंजनाय नमः
13। ॐ तारकासुरसंहारिणे नमः
14। ॐ रक्षोबलविमर्दनाय नमः
15। ॐ मत्ताय नमः
16। ॐ प्रमत्ताय नमः
17। ॐ उन्मत्ताय नमः
18। ॐ सुरसैन्यसुरक्षकाय नमः
19। ॐ देवसेनापतये नमः
20। ॐ प्राज्ञाय नमः
21। ॐ कृपाळवे नमः
22। ॐ भक्तवत्सलाय नमः
23। ॐ उमासुताय नमः
24। ॐ शक्तिधराय नमः
25। ॐ कुमाराय नमः
26। ॐ क्रौंचदारणाय नमः
27। ॐ सेनान्ये नमः
28। ॐ अग्निजन्मने नमः
29। ॐ विशाखाय नमः
30। ॐ शंकरात्मजाय नमः
31। ॐ शिवस्वामिने नमः
32। ॐ गणस्वामिने नमः
33। ॐ सर्वस्वामिने नमः
34। ॐ सनातनाय नमः
35। ॐ अनंतशक्तये नमः
36। ॐ अक्षोभ्याय नमः
37। ॐ पार्वतीप्रियनंदनाय नमः
38। ॐ गंगासुताय नमः
39। ॐ शरोद्भूताय नमः
40। ॐ आहूताय नमः
41। ॐ पावकात्मजाय नमः
42। ॐ जृंभाय नमः
43। ॐ प्रजृंभाय नमः
44। ॐ उज्जृंभाय नमः
45। ॐ कमलासनसंस्तुताय नमः
46। ॐ एकवर्णाय नमः
47। ॐ द्विवर्णाय नमः
48। ॐ त्रिवर्णाय नमः
49। ॐ सुमनोहराय नमः
50। ॐ चतुर्वर्णाय नमः
51। ॐ पंचवर्णाय नमः
52। ॐ प्रजापतये नमः
53। ॐ अहर्पतये नमः
54। ॐ अग्निगर्भाय नमः
55। ॐ शमीगर्भाय नमः
56। ॐ विश्वरेतसे नमः
57। ॐ सुरारिघ्ने नमः
58। ॐ हरिद्वर्णाय नमः
59। ॐ शुभकराय नमः
60। ॐ वटवे नमः
61। ॐ वटुवेषभृते नमः
62। ॐ पूष्णे नमः
63। ॐ गभस्तये नमः
64। ॐ गहनाय नमः
65। ॐ चंद्रवर्णाय नमः
66। ॐ कळाधराय नमः
67। ॐ मायाधराय नमः
68। ॐ महामायिने नमः
69। ॐ कैवल्याय नमः
70। ॐ शंकरात्मजाय नमः
71। ॐ विश्वयोनये नमः
72। ॐ अमेयात्मने नमः
73। ॐ तेजोनिधये नमः
74। ॐ अनामयाय नमः
75। ॐ परमेष्ठिने नमः
76। ॐ परब्रह्मणे नमः
77। ॐ वेदगर्भाय नमः
78। ॐ विराट्सुताय नमः
79। ॐ पुळिंदकन्याभर्त्रे नमः
80। ॐ महासारस्वतावृताय नमः
81। ॐ आश्रिताखिलदात्रे नमः
82। ॐ चोरघ्नाय नमः
83। ॐ रोगनाशनाय नमः
84। ॐ अनंतमूर्तये नमः
85। ॐ आनंदाय नमः
86। ॐ शिखंडिकृतकेतनाय नमः
87। ॐ डंभाय नमः
88। ॐ परमडंभाय नमः
89। ॐ महाडंभाय नमः
90। ॐ वृषाकपये नमः
91। ॐ कारणोपात्तदेहाय नमः
92। ॐ कारणातीतविग्रहाय नमः
93। ॐ अनीश्वराय नमः
94। ॐ अमृताय नमः
95। ॐ प्राणाय नमः
96। ॐ प्राणायामपरायणाय नमः
97। ॐ विरुद्धहंत्रे नमः
98। ॐ वीरघ्नाय नमः
99। ॐ रक्तास्याय नमः
100। ॐ श्यामकंधराय नमः
101। ॐ सुब्रह्मण्याय नमः
102। ॐ गुहाय नमः
103। ॐ प्रीताय नमः
104। ॐ ब्रह्मण्याय नमः
105। ॐ ब्राह्मणप्रियाय नमः
106। ॐ वंशवृद्धिकराय नमः
107। ॐ वेदवेद्याय नमः
108। ॐ अक्षयफलप्रदाय नमः ||इति श्रीसुब्रह्मण्याष्टोत्तरशतनामावळिः||
अर्थ
श्री सुब्रह्मण्य अष्टोत्तर शतनामावलि भगवान सुब्रह्मण्य के 108 पवित्र नामों का एक संग्रह है, जिन्हें कार्तिकेय, कुमारस्वामी, मुरुगन, स्कंद और षण्मुख के नाम से भी जाना जाता है। यह नामावलि भगवान के दिव्य गुणों, पराक्रम, करुणा, ज्ञान और भक्तों के प्रति उनके सुरक्षात्मक स्वभाव को दर्शाती है। प्रत्येक नाम उनकी अनंत शक्ति, महिमा और अवतारों का वर्णन करने वाला एक मंत्र है। भगवान सुब्रह्मण्य देवताओं के सेनापति, तारकासुर के संहारक और ज्ञान के अधिपति हैं। यह नामावलि भक्तों को भक्ति और आध्यात्मिक उन्नति के मार्ग पर ले जाने का एक शक्तिशाली माध्यम है।
इस अष्टोत्तर शतनामावलि में 'ॐ स्कंदाय नमः' का अर्थ है शक्ति और पराक्रम के स्वरूप स्कंद को नमस्कार; 'ॐ गुहाय नमः' का अर्थ है रहस्यमय और रक्षक गुह को नमस्कार; 'ॐ षण्मुखाय नमः' का अर्थ है छह मुखों से ज्ञान का प्रसार करने वाले षण्मुख को नमस्कार। 'ॐ शक्तिधराय नमः' का अर्थ है दिव्य शक्ति धारण करने वाले को नमस्कार, और 'ॐ तारकासुरसंहारीणे नमः' का अर्थ है दुष्ट तारकासुर का संहार करने वाले को नमस्कार। इस प्रकार, प्रत्येक नाम भगवान सुब्रह्मण्य के दिव्य व्यक्तित्व के एक पहलू को प्रकट करता है। इन नामों का जप करने से मन शुद्ध होता है, अज्ञान और नकारात्मक ऊर्जाएं दूर होती हैं।
इस नामावलि का पाठ भक्तों को आंतरिक शक्ति, साहस और आत्मविश्वास प्रदान करता है। भगवान सुब्रह्मण्य भक्तों के कष्टों को दूर कर उन्हें विजय और समृद्धि प्रदान करते हैं। विशेष रूप से निःसंतान दंपत्ति, रोगों से पीड़ित लोग, शत्रुओं से भयभीत व्यक्ति और ज्ञान की खोज करने वाले इस नामावलि का पाठ करके अत्यधिक लाभ प्राप्त करते हैं। यह केवल नामों का संग्रह नहीं है, बल्कि भगवान के साथ एक गहरा आध्यात्मिक संबंध स्थापित करने वाला एक पवित्र मंत्र है। भगवान सुब्रह्मण्य की कृपा से जीवन में शांति, संतोष और प्रगति प्राप्त होती है।
शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि, सुब्रह्मण्य षष्ठी, मंगलवार, शुक्रवार और कार्तिक मास में इस नामावलि का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। भक्ति और एकाग्रता के साथ इन नामों का जप करने से मानसिक शांति, शारीरिक स्वास्थ्य और आध्यात्मिक उत्थान संभव होता है। श्री सुब्रह्मण्य अष्टोत्तर शतनामावलि भक्तों को दिव्य अनुग्रह प्रदान करने, सभी बाधाओं को दूर करने और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाला एक शक्तिशाली स्तोत्र है।
लाभ (Benefits):
- पाप मुक्ति: इस नामावलि का भक्तिपूर्वक पाठ करने से किए गए पापों का नाश होता है और मन शुद्ध होता है।
- शक्ति और साहस: भगवान सुब्रह्मण्य शौर्य और पराक्रम के देवता हैं। इन नामों का जप करने से भक्तों को अपार शक्ति, साहस और आत्मविश्वास प्राप्त होता है।
- ज्ञान और बुद्धि: सुब्रह्मण्य ज्ञान के स्वरूप हैं। इस नामावलि का पाठ बुद्धि, स्पष्ट विचार और अज्ञान के निवारण में सहायक होता है।
- शत्रु संहार और विजय: जिस प्रकार उन्होंने तारकासुर का संहार किया, उसी प्रकार भगवान सुब्रह्मण्य आंतरिक और बाहरी शत्रुओं का नाश कर भक्तों को सभी चुनौतियों पर विजय दिलाते हैं।
- संतान प्राप्ति और रोग निवारण: निःसंतान दंपत्ति और विभिन्न रोगों से पीड़ित लोग इस नामावलि का पाठ करने से उत्तम परिणाम प्राप्त करते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्री सुब्रह्मण्य अष्टोत्तर शतनामावलि क्या है?
इस नामावलि का पाठ कब करना सबसे शुभ माना जाता है?
श्री सुब्रह्मण्य अष्टोत्तर शतनामावलि के पाठ से क्या प्रमुख लाभ मिलते हैं?
यह नामावलि कौन पढ़ सकता है?
इस नामावलि का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
इस नामावलि का मूल क्या है?
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