श्री स्कंद दंडकं
अयि जय जयांभोजिनीजानिडिंभोदयोद्यत् कुसुंभोल्लसत्फुल्ल दंभोपमर्दप्रवीण प्रभाधोरणीपूरिताशावकाश, वरानंदसांद्रप्रकाश, सहैवोत्तरंगीभवत्सौहृदावेशमीशान पंचाननी पार्वतीवक्त्रसंचुंब्यमानाननांभोजषट्क, द्विषत्कायरक्तौघरज्यत्पृषत्क, स्वकीय प्रभु द्वादशात्म द्रढीयस्तमप्रेम धामायित द्वादशांभोज वृंदिष्ठ बंहिष्ठ सौंदर्य धुर्येक्षण, साधुसंरक्षण, निजचरण वंदनासक्त सद्वृंद भूयस्तरानंद दायिस्फुरन्मंदहासद्युतिस्यंद दूरीकृतामंदकुंद प्रसूनप्रभा कंदळीसुंदरत्वाभिमान, समस्तामरस्तोम संस्तूयमान, जगत्याहितात्याहितादित्यपत्याहित प्रौढ वक्षःस्थलोद्गच्छदास्रच्छटा धूमळ च्छाय शक्तिस्फुरत्पाणि पाथोरुह, भक्तमंदार पृथ्वीरुह, विहितपरिरंभ वल्लीवपुर्वल्लरी मेळनोल्लासितोरस्तट श्रीनिरस्ता चिरज्योतिराश्लिष्ट संध्यांबुदानोपमाडंबर, तप्तजांबूनद भ्राजमानांबर, पिंछभार प्रभामंडली पिंडिताखंडलेष्वासनाखंडरोचिः शिखंडिप्रकांडोपरिद्योतमान, पदश्रीहृत श्रीगृहव्रातमान, प्रथितहरिगीतालयालंकृते, कार्तिकेयार्तबंधो, दयापूरसिंधो, नमस्ते समस्तेश मां पाहि पाहि प्रसीद प्रसीद ||
कारुण्याम्बुनिधे समस्तसुमनः संतापदानोद्यत-
-स्फायद्दर्पभरासुरप्रभुसमूलोन्मूलनैकायन |
बिभ्राणः क्षितिभृद्विभेदनचणां शक्तिं त्वमाग्नेय मां
पाहि श्रीहरिगीतपत्तनपते देहि श्रियं मे जवात् ||
इति श्री स्कंद दंडकम् |
अर्थ
श्री स्कंद दंडकं भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की महिमा का वर्णन करने वाला एक अत्यंत शक्तिशाली और विस्तृत स्तोत्र है। यह भगवान शिव और माता पार्वती के तेजस्वी पुत्र, देवसेनापति स्कंद के दिव्य रूप, पराक्रम और करुणा का गुणगान करता है। दंडकम् एक जटिल काव्य-शैली है जो स्कंद के अद्वितीय सौंदर्य, युद्ध-कौशल और भक्त-रक्षक स्वभाव को अत्यंत कलात्मक ढंग से प्रस्तुत करती है। इसमें स्कंद को छह मुखों, बारह आँखों और बारह भुजाओं वाले दिव्य योद्धा के रूप में चित्रित किया गया है, जिनके हाथों में विभिन्न दिव्य अस्त्र-शस्त्र सुशोभित हैं।
यह स्तोत्र स्कंद को असुर समूहों के मद को जलाने वाली शक्ति, भक्तों के दुखों को हरने वाले करुणा के अमृत-सागर के रूप में घोषित करता है। वे वल्ली और देवसेना के आलिंगन से आनंदित सौंदर्य के सागर हैं, जो मयूर वाहन पर विराजमान एक दिव्य योद्धा के रूप में शोभायमान हैं। वे अज्ञान के अंधकार को मिटाने वाले आध्यात्मिक प्रकाशपुंज के रूप में प्रकट होते हैं। दंडकम् में स्कंद के दिव्य रोमांच, मंदहास, वीर कांति, प्रभामंडल, तप्त-माणिक्य के समान वर्ण, प्रकाशमान शरीर की आभा, मयूर के पंखों की दीप्ति और शक्ति अस्त्र की स्फुरणा आदि का अत्यंत सुंदर और शिल्पमय वर्णन किया गया है, जो श्रोताओं के मन में स्कंद के भव्य रूप को साकार करता है।
स्कंद दंडकं भगवान स्कंद को भक्तों के भय को दूर करने वाले शरणागत वत्सल, दुष्ट असुर सेनाओं का नाश करने वाले अग्निपुत्र स्कंद और पुण्यात्माओं के लिए मोक्ष मार्ग का निर्माण करने वाले के रूप में प्रतिष्ठित करता है। वे भक्त के हृदय में तीव्र प्रेम भरने वाले दिव्य सौंदर्य के सागर हैं। दंडकम् का दूसरा श्लोक विशेष रूप से स्कंद के अग्निपुत्र होने, असुरों का नाश करने की उनकी शक्ति, उनकी असीम करुणा और भक्तों को धन-ऐश्वर्य प्रदान करने की उनकी क्षमता पर प्रकाश डालता है। यह स्तोत्र केवल एक स्तुति नहीं, बल्कि स्कंद के दिव्य गुणों का ध्यान करने का एक शक्तिशाली माध्यम है।
इस दंडकम् का भक्तिपूर्वक पाठ करने से भक्तों को अनेक लाभ प्राप्त होते हैं। यह जीवन की सभी बाधाओं को दूर करता है, साहस, उत्तम स्वास्थ्य और विजय प्रदान करता है। दुष्ट शक्तियों, पिशाच बाधाओं और शत्रु दोषों से रक्षा करता है। घर में शांति, ऐश्वर्य और सुख में वृद्धि होती है, तथा अष्टैश्वर्य की प्राप्ति और सभी शुभ-मंगल कार्य संपन्न होते हैं। जो भक्त स्कंद के चरण-कमलों में शरण लेते हैं, उन्हें वे जीवन के सभी क्षेत्रों में सफलता और आनंद प्रदान करते हैं।
लाभ (Benefits):
- बाधाओं का निवारण: श्री स्कंद दंडकं का पाठ जीवन की सभी बाधाओं, विघ्नों और चुनौतियों को दूर करने में सहायता करता है।
- साहस और विजय: यह स्तोत्र भक्तों को असाधारण साहस, आत्मविश्वास और प्रतिकूल परिस्थितियों में विजय प्राप्त करने की शक्ति प्रदान करता है।
- बुरी शक्तियों से रक्षा: नियमित पाठ बुरी शक्तियों, नकारात्मक प्रभावों, पिशाच बाधाओं और शत्रुओं से होने वाली परेशानियों से पूर्ण सुरक्षा प्रदान करता है।
- स्वास्थ्य और समृद्धि: स्कंद की कृपा से उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और घर में शांति, धन-ऐश्वर्य तथा सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।
- आध्यात्मिक विकास: यह भक्तों के मन में आध्यात्मिक ज्ञान, शांति और भगवान स्कंद के प्रति अटूट भक्ति विकसित करता है, जिससे मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्री स्कंद दंडकं क्या है?
श्री स्कंद दंडकं का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
श्री स्कंद दंडकं के पाठ से क्या लाभ होते हैं?
किसे श्री स्कंद दंडकं का पाठ करना चाहिए?
श्री स्कंद दंडकं का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
श्री स्कंद दंडकं का मूल क्या है?
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