श्री

श्री कामाक्षी नवरत्नमालिका स्तोत्रं

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स्तोत्र
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 श्री कामाक्षी नवरत्नमालिका स्तोत्रं

उद्यत्कोटि निशाकर प्रतिभटां भद्रासने सुस्थितां
संख्यातीतगुणोज्ज्वलां भगवतीं त्रैलोक्यसम्मोहिनीं |
चेटीभूत समस्त देवमहिलां दिव्यांबरालंकृतां
वंदे कामविलोचनामनुदिनं वांछातिरिक्तप्रदां ||1||

भद्रां भूषणगंधमाल्यरुचिरां संध्याभ्रशोणांबरां
हस्तन्यस्त शुकांबुजां हरिविरिंचाद्यैस्सदा पूजितां |
नित्याऽनित्यविवेकदां निरुपमां नित्यादि शक्त्यावृतां
वंदे कामविलोचनामनुदिनं वांछातिरिक्तप्रदां ||2||

श्रीमच्चिन्मय कामकोटिनिलयां सर्वज्ञपीठेश्वरीं
मूलाम्नाय मठाधिपैर्यतिवरैस्संसेवितांघ्रिद्वयां |
इच्छाज्ञान समस्त शक्तिसहितां सामीप्यमुक्त्यादिदां
वंदे कामविलोचनामनुदिनं वांछातिरिक्तप्रदां ||3||

वेद्यां वैदिकमंत्रकैरभिनुतामोंकारनादात्मिकां
कौलाचार विवर्जितां समयिनीं कंदर्पकांतिप्रदां |
जातीचंपकमल्लिका परिलसत्कंठां मनोहारिणीं
वंदे कामविलोचनामनुदिनं वांछातिरिक्तप्रदां ||4||

भक्तानां परिपालनोत्सुकतमां भाग्यप्रदां निर्मलां
शोकारण्यदवानलां प्रणमतां स्वर्धेनुवत्कामदां |
मुद्रानंदित मानसां मुनिगणैराराधितामंबिकां
वंदे कामविलोचनामनुदिनं वांछातिरिक्तप्रदां ||5||

कैवल्यैक परायणां कलरवां काश्मीरपंकांचितां
राजत्कांचन रत्नचारु मकुटां राजीवपत्रेक्षणां |
दिव्यौघैर्मनुजैश्च सिद्धनिवहैर्भूनिर्जरैस्सेवितां
वंदे कामविलोचनामनुदिनं वांछातिरिक्तप्रदां ||6||

मायां मानवपालिनीं मधुमर्ती मंदारमालाधरां
सोमाद्यध्वरसप्रियां सुरनुतां शृंगारसारोदयां |
चारुस्मेरमुखांबुजां त्रिणयनां नीलालकालंकृतां
वंदे कामविलोचनामनुदिनं वांछातिरिक्तप्रदां ||7||

ब्रह्मानंदसुखावहां शुभकरीं स्वज्ञानदां देहिनां
ध्येयां धर्मविवर्धिनीं धनकरीं धामत्रयाराधितां |
मंत्राणामधिदेवतां प्रजपतां सर्वार्थसिद्धिप्रदां
वंदे कामविलोचनामनुदिनं वांछातिरिक्तप्रदां ||8||

संसारार्णवतारिणीं शतमखस्कंदेभवक्त्रेडितां
सोमार्धोज्ज्वलशेखरामगसुतामाकर्णपूर्णेक्षणां |
वीणागान विलोलुपां विजयदां वंध्यात्वदोषापहां
वंदे कामविलोचनामनुदिनं वांछातिरिक्तप्रदां ||9||

इति श्रीकामाक्षी नवरत्नमालिका स्तोत्रं संपूर्णं |

अर्थ

श्री कामाक्षी नवरत्नमालिका स्तोत्रम् देवी कामाक्षी की महिमा का गुणगान करने वाला एक अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली स्तोत्र है। यह नौ श्लोकों का एक संग्रह है, जो देवी को नौ बहुमूल्य रत्नों के समान वर्णित करता है। यह स्तोत्र भक्तों को उनकी सभी इच्छाओं, ज्ञान और मोक्ष की प्राप्ति में सहायता करता है, और देवी के दिव्य स्वरूप का विस्तृत वर्णन प्रस्तुत करता है। यह स्तोत्र आदिशंकरचार्य जैसे महान यतियों द्वारा स्थापित श्री कामाक्षी पीठ से संबंधित है और साधकों को गहन आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करने में सक्षम है।

यह स्तोत्र केवल देवी की स्तुति नहीं है, बल्कि उनके परब्रह्म स्वरूप, जगन्माता के रूप में उनकी भूमिका और उनकी कृपा से प्राप्त होने वाली आध्यात्मिक उन्नति का भी वर्णन करता है। प्रत्येक श्लोक यह दर्शाता है कि देवी सृष्टि, स्थिति और संहार की मूल हैं, और वे भक्तों के अज्ञान को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाती हैं। यह देवी की शक्ति, सौंदर्य, ज्ञान, करुणा और मोक्ष प्रदान करने की क्षमता को उजागर करता है, साथ ही उनकी सर्वव्यापकता और भक्तों के प्रति अटूट प्रेम को भी दर्शाता है। इस स्तोत्र के निरंतर पाठ से मन को शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक प्रगति प्राप्त होती है।

प्रत्येक श्लोक देवी के एक अद्वितीय पहलू का वर्णन करता है। पहला श्लोक कामाक्षी को करोड़ों चंद्रमाओं की कांति के समान प्रकाशित, भद्रासन पर सुशोभित, तीनों लोकों को मोहित करने वाली महामाया स्वरूपिणी के रूप में वर्णित करता है। वे समस्त देवताओं में श्रेष्ठ हैं और भक्तों को उनकी इच्छा से भी अधिक फल प्रदान करती हैं। दूसरे श्लोक में, वे सुगंधित आभूषणों और मालाओं से अलंकृत, संध्याकालीन लाल वस्त्रों से सुशोभित हैं, हाथ में तोता और कमल धारण करती हैं, और हरि, हर और ब्रह्मा आदि देवताओं द्वारा सदा पूजित हैं। वे नित्य-अनित्य का विवेक प्रदान करने वाली ज्ञानमयी देवी हैं। तीसरे श्लोक में, देवी चैतन्य स्वरूपिणी हैं, सर्वज्ञ पीठ की अधिष्ठात्री हैं, और मठाधिपतियों तथा श्रेष्ठ यतियों द्वारा जिनके चरण पूजित हैं। वे इच्छा, ज्ञान और क्रिया शक्तियों का संगम स्वरूपिणी हैं, जो अपने समीप रहने वालों को मोक्ष, ज्ञान और ऐश्वर्य प्रदान करती हैं।

चौथा श्लोक देवी को वैदिक मंत्रों द्वारा स्तुत, ॐकार नाद के आत्म स्वरूपिणी के रूप में वर्णित करता है। वे कौलाचार से रहित समयाचार का पालन करने वाली हैं, कामदेव के समान कांति प्रदान करने वाली हैं, और चमेली, चंपा और मल्लिका के पुष्पों की मालाओं से सुशोभित मनोहर देवी हैं। पांचवें श्लोक में, वे भक्तों की रक्षा में तत्पर हैं, दुखों को भस्म करने वाली अग्नि स्वरूपिणी हैं। वे कामधेनु के समान भक्तों की सभी इच्छाएं पूरी करती हैं और मुनिगणों द्वारा पूजित आनंदमयी मूर्ति हैं। छठे श्लोक में, वे कैवल्य (मोक्ष) मार्ग प्रदान करने वाली हैं। वे कश्मीरी केसर के समान कांति से चमकने वाली, रत्नजड़ित मुकुट से अलंकृत हैं। कमल के समान नेत्रों वाली हैं, जिनकी सेवा देवता, मनुष्य और सिद्ध करते हैं।

सातवां श्लोक देवी को मानव जीवों की पालक, मधुमर्दिनी (भगवान विष्णु) को प्रिय के रूप में वर्णित करता है। वे सोम, अग्नि और सूर्य तत्वों की स्वरूपिणी, त्रिनेत्र सुंदरी हैं, और नीले केशों से सुशोभित हैं। उनकी माया महिमा असीमित शक्ति है। आठवें श्लोक में, वे ब्रह्मानंद सुख प्रदान करने वाली, ज्ञान देने वाली, धर्म की वृद्धि करने वाली, धन प्रदान करने वाली, मंत्रों की अधिष्ठात्री देवी हैं। वे भक्तों के प्रत्येक यज्ञ के फल को सिद्ध करती हैं। अंततः, नौवां श्लोक देवी को संसार सागर से भक्तों को तारने वाली दिव्य माता के रूप में स्तुत करता है। स्कंद और गणपति जैसे देवताओं द्वारा वे निरंतर स्तुत की जाती हैं, जो उनकी करुणा और रक्षा शक्ति को दर्शाता है।

लाभ (Benefits):

  • इच्छापूर्ति: श्री कामाक्षी नवरत्नमालिका स्तोत्र का नियमित पाठ करने से कामाक्षी देवी की कृपा प्राप्त होती है और भक्तों की सभी शुभ इच्छाएं एवं संकल्प पूर्ण होते हैं।
  • ज्ञान और विवेक: इस स्तोत्र के पाठ से ज्ञान में वृद्धि होती है, मन में नित्य-अनित्य का विवेक उत्पन्न होता है, और जीवन के सत्य को समझने में सहायता मिलती है।
  • मोक्ष की प्राप्ति: देवी कामाक्षी कैवल्य प्रदात्री हैं, अतः इस स्तोत्र का भक्तिपूर्वक पाठ करने से मोक्ष का मार्ग सुगम होता है और अंततः परम मुक्ति प्राप्त होती है।
  • संकटों का निवारण: देवी दुखों को भस्म करने वाली अग्नि स्वरूपिणी हैं, इसलिए इस स्तोत्र का पाठ जीवन के सभी कष्टों, दुखों और बाधाओं को दूर करता है, जिससे मन को शांति और सुकून मिलता है।
  • धन और समृद्धि: देवी धनप्रदात्री हैं, इसलिए इस स्तोत्र का पाठ करने वाले भक्तों को धन, ऐश्वर्य और जीवन में सभी प्रकार की शुभता प्राप्त होती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्री कामाक्षी नवरत्नमालिका स्तोत्रं क्या है?
यह देवी कामाक्षी की महिमा का वर्णन करने वाले नौ श्लोकों का एक स्तोत्र है। प्रत्येक श्लोक देवी के विभिन्न गुणों और शक्तियों को एक रत्न के समान प्रस्तुत करता है।
इस स्तोत्र का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
इस स्तोत्र का पाठ प्रतिदिन सुबह स्नान के बाद शुद्ध मन से, देवी के चित्र के सामने दीपक जलाकर किया जा सकता है। विशेष रूप से शुक्रवार को या देवी के त्योहारों के दिनों में पाठ करना अधिक शुभ माना जाता है।
श्री कामाक्षी नवरत्नमालिका स्तोत्रं के पाठ से क्या लाभ होते हैं?
इस स्तोत्र के पाठ से इच्छापूर्ति, ज्ञान और विवेक की प्राप्ति, मोक्ष का मार्ग सुगम होना, संकटों का निवारण और धन-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
इस स्तोत्र का पाठ कौन कर सकता है?
कामाक्षी देवी में आस्था रखने वाला कोई भी व्यक्ति, लिंग भेद के बिना, इस स्तोत्र का पाठ कर सकता है। विशेषकर आध्यात्मिक प्रगति और भौतिक सुखों की इच्छा रखने वाले लोग इसे पढ़ सकते हैं।
इस स्तोत्र का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
आमतौर पर प्रतिदिन 1, 3, 5, 11 या 108 बार पाठ किया जा सकता है। अपनी सुविधा और भक्ति के अनुसार संख्या निर्धारित की जा सकती है।
इस स्तोत्र का मूल या इतिहास क्या है?
श्री कामाक्षी नवरत्नमालिका स्तोत्रं कामाक्षी देवी की कृपा प्राप्त करने के लिए रचित एक प्राचीन स्तोत्र है। यह कामाक्षी पीठ की परंपरा में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

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