श्री कामाक्षि देवि मूलाक्षर सहस्रनाम स्तोत्रं
श्री गुरुभ्यो नमः
श्री गणेशाय नमः ||अथ श्री कामाक्षि देवि मूलाक्षरमूलमंत्र||
कलावतिं कर्मनाशिनीं
कांचीपुरनिवासिनीं |
कमलाकरपूजिताo काममंजीररणिताo
कलाकोटिप्रभूषिताo ||अथ सहस्रनामस्तोत्रं||
कामाक्षि कलाधारा कालदैत्यनिकृंतनी |
कामिनी कामवंद्या च कमनीया विनोदिनी || 1 ||
कांची कनकधारा च कलिः कनककुंडला |
कमलस्रग्धरा कामवरदा कमलाकृतिः || 2 ||
कृष्णांगी नीलदेहा च पिंगकेशी कृशोदरी |
पिंगाक्षी कमलप्रीता काली कालपराक्रमा || 3 ||
कामाक्षी कमनीया च श्रीकंठमहिषी शिवा |
मनोहरा माननीया मतिदा मणिभूषणा || 4 ||
कामसूः कामवनिता कामधुक् कमलावती |
कामदात्री कराली च कामकेलिविनोदिनी || 5 ||
कालिंदी वज्रवाराही महानीलपताकिका |
हंसेश्वरी मोक्षलक्ष्मीर्भूतिनी जातरेतसा || 6 ||
कामना कामदा काम्या कमला कमलार्चिता |
कांचिलिप्तवक्षोजा कांचिद्रवचर्चिता || 7 ||
क्षेमंकरी विश्वरूपा कामाख्या कुलकुट्टनी |
कामांकुशा वेशिनी च मायूरी च कुलेश्वरी || 8 ||
कात्यायनी कलावासा तर्पिता तापिनी दिवा |
शिवदूती शिवाश्लाषा पूर्णकामना यशास्विनी || 9 ||
कनका कनकप्राणा कनकाचलवासिनी |
कनकाभा काननस्था कामाख्या कनकप्रदा || 10 ||
कलादेशः सुकविता कारणः करुणामयी |
कंजपत्रेक्षणः कामाक्षि कामः कोलावलीश्वरी || 11 ||
कामपीठस्थिता नित्या कामधामनिवासिनी |
कंबुकंठी करालाक्षी किशोरी च कलापिनी || 12 ||
करकोटिधरः कूटा क्रियाक्रूरः क्रियावती |
कुंभहा कुंभहंत्री च कटकच्छकलावती || 13 ||
कुमारीपूजनरता कुमारीव्रतचारिणी |
कुमारीभक्तिसुखिनी कुमारीरूपधारिणी || 14 ||
कमला कामलक्ष्मी च कमलाननकामिनी |
कामधेनुस्वरूपा च कामहा काममदीनी || 15 ||
कुंजरेश्वरकुंभोत्थमुक्तारंजितनासिका |
मुक्ताविद्रुममाणिक्यहाराद्यस्तनमंडला || 16 ||
कामदा कामपूज्या च कामातीता कलावती |
कामाक्षी कारणाढ्या च कैशोरी कुशलांगला || 17 ||
कमलाकामा चक्रेशी स्फुरंति स्फुररूपिणी |
करदेहांत गानाया महासेनविमोहिनी || 18 ||
कविनाथस्वरूपा च कटुवाणी कटुस्थिता |
कोटरा कोटराक्षी च करनाटकवासिनी || 19 ||
कादंबरी कश्मला च कुजस्था कश्मलावती |
कामेश्वरी कांचनाभा कामुकी कामुकावती || 20 ||
कासार-क्रीडन-परा काणाद-मत-कोविदा |
कायातीता किशोरेंदु-शेखरा कीरधारिणी || 21 ||
कांचुकी कुड्मला कंथा केतकी कनकावती |
कपेश्वरी कोपवती कपिला कपिलावती || 22 ||
कटकस्था काष्ठसंस्था कंदर्पा केतकी प्रिया |
केलिप्रिया कंबलस्था कालदैत्यविनाशिनी || 23 ||
कापालीशा कलामूर्तिः कलाकलितविग्रहा |
सर्वशक्तिविनिर्मुक्ता सर्वशक्त्याश्रयाश्रया || 24 ||
केतकीपुष्पशोभाढ्या कर्पूरपूर्णजिह्व |
कर्पूराकरकाकोला कांचीपुरवासिनी || 25 ||
कालिका कालिसंत्रस्ता कौलिकध्यानवासिनी |
कुंकुमाशक्तहृदया केयूरहारमालिनी || 26 ||
कमला कामिनी कांता कामदा कालकंठिनी |
करिकुंभस्तनभरा करवीरसुवासिनी || 27 ||
कामप्रिया कामरता कामकामस्वरूपिणी |
मंगला विजया जाया सर्वमंगलकारिणी || 28 ||
काचस्था काचदेहा च काचपूरनिवासिनी |
काचग्रस्था काचवर्णा कीचकप्राणना || 29 ||
काशी काशापहा कांशीसंकाशा केशदायिनी |
कुंडली कुंडलीस्था च कुंडलांगदमंडिता || 30 ||
काव्यप्रदा काव्यचित्ता काव्यसारप्रकाशिनी |
कलांबा कल्पजननी कल्पभेदासनस्थिता || 31 ||
कालरात्रिर्महारात्रिः कपाली कालरूपिणी |
कौमारी करुणामुक्तिः कलिकल्मषनाशिनी || 32 ||
काली काशी महाकालसंकाशा केशदायिनी |
कुंडला च कुलस्था च कुंडलांगदमंडिता || 33 ||
कात्यायनी कराधारा कौमुदी कमलप्रिया |
कीर्तिदा बुद्धिदा मेधा नीतिज्ञा नीतिवत्सला || 34 ||
कामाक्षी कामदात्री कामेशी कामवंदिता |
कामरूपा कामरतिः कामाख्या ज्ञानमोहिनी || 35 ||
कालेच्छा कालसारस्था कालमारणघातिनी |
किरणक्रमदीपस्था कर्मस्था क्रमदीपिका || 36 ||
काष्ठा निष्ठा प्रतिष्ठा च ज्येष्ठा श्रेष्ठा जयावहा |
सर्वसिद्धिप्रदा देवी सर्वाणी सिद्धसेविता || 37 ||
कारुण्यामृतपाधोधी कल्याणी करुणामयी |
कुंदकुसुमदंता च कस्तूरिबिंदुभिः शुभा || 38 ||
कामधेनुः कांचनाक्षी कांचनाभा कळानिधिः |
क्रिया कीर्तिकरी कीर्तिः क्रतुश्रेष्ठा कृतेश्वरी || 39 ||
कांचीकलापरम्या च कमलासनसंस्तुता |
कंबीजा कौत्सवरदा कामरूपनिवासिनी || 40 ||
काललक्ष्मीः कालचंडा कुलचंडेश्वरप्रिया |
काकिनीशक्तिदेहस्था कितवा किंतकारिणी || 41 ||
कामिनी कामिनीकाम्या कामुका कामचारिणी |
कामप्रिया कामरता कामाकामस्वरूपिणी || 42 ||
काशीराजगृहस्था च कर्णभ्रातृगृहस्थिता |
कर्णाभरणभूषाढ्या कंठभूषा च कंठिका || 43 ||
कल्याणी कुंडलवती कुरुक्षेत्रनिवासिनी |
कुरुविंददलाकारा कुंडली कुमुदालया || 44 ||
कामराभार्सुरवाद्यस्था कियधंकारनादिनी |
कणादयज्ञसूत्रस्था कीलालयज्ञसंज्ञका || 45 ||
कामाक्षी कामधात्री कामेशी कामपूजिता |
कामरूपा कामगतिः करुणा काममोहिता || 46 ||
कामचाराब्जनेत्रा च कामचोद्गारसंक्रमा |
काष्ठपर्वतसंदाहा कुष्ठाकुष्ठ निवारिणी || 47 ||
कालजिह्वा करालास्या कालिका कालरूपिणी |
कमनीयगुणा कांतिः कलाधारा कुमुद्वती || 48 ||
कालादिकरणच्छिद्रा करुणानिधिवत्सला |
क्रतुश्रीदा कृतार्थश्रीः कालतारा कुलोत्तरा || 49 ||
कामाक्षी कमनीया च कामेशी भगमंगला |
सुभगा भोगिनी भोग्या भग्यदा सुभगा भगा || 50 ||
कामरागा भूषणाढ्या कामिनीरगुणप्रिया |
कुलीना नागहस्ता च कुलीननागवाहिनी || 51 ||
कामाक्षी कामिनी काम्या कमनीयवपुर्धरा |
कामरूपा सिद्धिरूपा सिद्धैर्वंद्या सुसिद्धिदा || 52 ||
कात्यायनी वायुवेगा कामाक्षी कर्मसाक्षिणी |
दुर्गादेवी महादेवी आदिदेवी महासना || 53 ||
कालसंकर्षिणी घोरा तत्त्वसंकर्षिणी हरा |
जगत्संपूरणी विश्वा महाभैरवभूषणा || 54 ||
कांचनी कांचनीभूमिः कांचनीभूमिभाविता |
लोकदृष्टिर्लोकलीला लोकालोकाचलार्चिता || 55 ||
कामपूरस्थिता कोपा कपाली बकुलोद्भवा |
कारागारजनापाल्या कारागारप्रपालिनी || 56 ||
कौशिकी कमलाकारा कामचारप्रभंजिनी |
कौमारी करुणापांगी ककुबंता करिप्रिया || 57 ||
कायफला कायफेणा कांता नाडीफलीश्वरा |
कमफेरुगता गौरी कायवाणी कुवीरगा || 58 ||
कादंबरीपानरुचिर्विपाशा पाशभीतिनुत् |
मुदिता मुदितापांगा दरदोलितदीर्घदृक् || 59 ||
कालांतकवलोत्पन्ना कपिलांतकघातिनी |
कलहासा कालहश्री कलहार्था कलामला || 60 ||
केसरी केशवनुता कदंबकुसुमप्रिया |
कालिंदी कालिका कांची कलशोद्भवसंस्तुता || 61 ||
कामेशीपाशरूपा च कामेश्यंकुशरूपिणी |
कामेश्वरींद्रशक्तिश्च अग्निचक्रकृतालया || 62 ||
कामाक्षी क्रतुमती कामरूपा कृपावती |
कुमारी कुंडनिलया किराती कीरवाहना || 63 ||
कामगिर्यधिदेवी च त्रिकोणस्थाऽग्रकोणगा |
दक्षकोणेश्वरी विष्णुशक्तिर्जालंधराश्रया || 64 ||
कैकेयी कोकिलालापा केतकी कुसुमप्रिया |
कमंडलुधरा काली कर्मनिर्मूलकारिणी || 65 ||
कांता कांतिमती कांतिः कामदा कमलालया |
कल्याणी कमला हृद्या पेशला हृदयंगमा || 66 ||
कलहंसगतिः कक्षा कृतकौतुकमंगला |
कस्तूरीतिलका कम्रा करींद्रगमना कुहूः || 67 ||
कामेश्वरी कामवती कामिनी कामरूपिणी |
आकाशगर्भा ह्रिंकारी कंकाली कालरूपिणी || 68 ||
कर्पूरलेपना कृष्णा कपिला कुहराश्रया |
कूटस्था कुधरा कम्रा कुक्षिस्थाखिलविष्टपा || 69 ||
कुमारीपूजकप्रीता कुमारीप्रीतिदप्रिया |
कुमारीसेवकासंगा कुमारीसेवकालया || 70 ||
कंजवक्त्रः कालमुखी कोटिसूर्यकरानना |
कम्रः कलपः समृद्धिस्था कुपोऽन्तस्थः कुलाचला || 71 ||
कर्पूरागरुकस्तूरीकुंकुमद्रवलेपिता |
विचित्ररत्नपृथिवीकल्पशाखितलस्थिता || 72 ||
कुणपः कौलपाकाशा स्वकांतः कामवासिनी |
सुकृतिः शांकरी विद्या कलकः कलनाश्रया || 73 ||
क्षत्रात्मिका राजलक्ष्मीः क्षमारूपा महोदरा |
दक्षा दाक्षायिनी दीक्षा मानसी हव्यवाहिनी || 74 ||
कुंदपुष्पसमाप्रीतिः कुंदपुष्पसमारतिः |
कुंदगोलोद्भवप्रीता कुंदगोलोद्भवात्मिका || 75 ||
कर्कंधुस्थः कौलकन्या कुलीनः कन्यकाकुला |
कुमारः केशरी विद्या कामहा कुलपंडिता || 76 ||
कोमलांगी करालांगी कमनीया वरांगना |
गंधचंदनदिग्धांगी सती साध्वी पतिव्रता || 77 ||
कल्कीशः कमनीयांगी कुशलः कुशलावती |
केतकीपुष्पमालाढ्यः केतकीकुसुमान्विता || 78 ||
कांतरूपा महालक्ष्मीर्महाकालस्वरूपिणी |
कुलीना कुलसर्वस्वा कुलवर्त्मप्रदर्शिका || 79 ||
कुसुमानंदमालाढ्यः कुसुमामलमालिका |
कवींद्रः काव्यसंभूतः काममंजीररंजिनी || 80 ||
कुलरूपा चकोराक्षी श्रीदुर्गा दुर्गनाशिनी |
कामाक्षि कौमारी गौरी तु कृष्णदेहा महामनाः || 81 ||
कुशासनस्थः कौशल्याकुलपः कल्पपादपा |
कल्पवृक्षः कल्पलता विकल्पः कल्पगामिनी || 82 ||
कला काष्ठा निमेषा च कालस्था कालरूपिणी |
कालज्ञा कालमाता च कालधात्री कलावती || 83 ||
कल्याणी मंगला शुद्धा तथा परमकौतुका |
परमेष्ठी पररता परात्परतरा परा || 84 ||
कामात्मा कामनिलया कामाख्या कामचंचला |
कामपुष्पधरः कामा कामेशः कामपुष्पिणी || 85 ||
कुलांगारा कुलयुता कुलकुंतलसंयुता |
कुलदर्भग्रहा चैव कुलगर्तप्रदायिनी || 86 ||
कामाक्षि कामकारुण्या बिंदुनादस्वरूपिणी |
सुप्रभा कुमुदी कांता कामदा कामदुर्वरा || 87 ||
कुलप्रेमयुता साध्वी शिवप्रीतिः शिवाबलिः |
शिवसक्ता शिवप्राणा महादेवकृतालया || 88 ||
कालदा कालहा कुल्या कुरुकुल्ला कुलांगना |
कीर्तिदा कीर्तिहा कीर्तिः कीर्तिस्था कीर्तिवर्धनी || 89 ||
कामलापकरोऽकामा सत्कामो कामनाशिनी |
बृहन्मुखो बृहन्नेत्रा पद्माभोऽम्बुजलोचना || 90 ||
कीर्तिज्ञा कीर्तितपदा कृत्तिका केशवप्रिया |
केशिहा केलीकारी च केशवानंदकारिणी || 91 ||
कातरस्था कातराज्ञा कातरानंदकारिणी |
कायागता कायसिद्धिः कायानंदप्रकाशिनी || 92 ||
कालमंजीरधारी च कालमंजीरमोहिनी |
करालवदनः काली कैवल्यदानदः कथा|| 93 ||
कुमुदाभा कुमारी च कर्मदा कमलेक्षणा |
कौमुदी कुमुदानंदा कौलिनी च कुमुद्वती || 94 ||
कुलेशी कुलमार्गस्था शंकरी शव शंकरी |
चिंता विनायिकी चिंता मध्यवादि गतिप्रिया || 95 ||
कामदा कामिनी काम्या कामनीयस्वभाविनी |
कस्तूरीरसनीलांगी कुंजरेश्वरगामिनी || 96 ||
कोदंडधारिणी क्रोधा कूटस्था कोटराश्रया |
कालकंठी करालांगी कालांगी कालभूषणा || 97 ||
कांती कांतामती कांता मत्स्यरूपा महोष्करा |
माधवी मालिनी माध्वी अवीरोमा मनोहरा || 98 ||
कपर्दिनी कोमलांगी कृपासिंधुः कृपामयी |
कुशावती कुंडसंस्था कौबेरी कौशिकी तथा || 99 ||
कर्त्री हर्त्री पालयित्री शर्वरी तामसी दया
तमिस्रा तामसी स्थाणुः स्थिरा धीरा तपस्विनी || 100 ||
कायगंधहरा कुंभा कायकुंभा कठोरिणी |
कठोरतरुसंस्था च कठोरलोकनाशिनी || 101 ||
कौलिनी कमला कांसी कमला कामस्वरूपिणी |
कार्तिनीस्यांदिनी काश्या कमला कमलवासिनी || 102 ||
काश्यपी कद्रुतनया कलिकल्मषनाशिनी |
कंजस्था कंजवदना कंजकिंजल्कचर्चिता || 103 ||
कामदेवकला रामाऽभिरामा शिवनर्तकी |
चिंतामणिः कल्पलता जाग्रती दीनवत्सला || 104 ||
कुलगर्तप्रसन्नास्या महती कुलभूषिका |
बहुवाक्यामृतरसा चंडरूपातिवेगिनी || 105 ||
कुलीना सामरूपा च कामरूपा मनोहरा |
कमलस्था कंजमुखी कुंजरेश्वरगामिनी || 106 ||
कुंभेश्वरी कुरुघ्नी च पांडवेष्टा परात्परा |
महिषासुरसंहर्त्री माननीया मनुप्रिया || 107 ||
कुलरूपा कोटराक्षी कमलैश्वर्यदायिनी |
कुंती ककुद्मिनी कुल्ला कुरुकुल्ला करालिका || 108 ||
कौतुकी कौतुकाचारा कुलधर्मप्रकाशिनी |
शांभवी गारुडी विद्या गरुडासनसंस्थिता || 109 ||
कामेश्वरी काममाता कामतापविमोचिनी |
कामरूपा कामसत्वा कामकौतुककारिणी || 110 ||
कांक्षिणी कुट्टनी क्रूरा कुट्टनीवेश्मवासिनी |
कुट्टनीकोटिसंपूज्या कुट्टनीकुलमार्गिणी || 111 ||
कारुण्यहृदया क्रींक्रींमंत्ररूपा च कोटरा |
कौमोदकी कुमुदिनी कैवल्या कुलवासिनी || 112 ||
कामाक्षी कमला काम्या कामांगा कामसाधिनी |
कलावती कलापूर्णा कलाधारी कनीयसी || 113 ||
कामेश्वरी च नीला च भिरुंडा वह्रिवासिनी |
लंबोदरी महाकाली विद्याविद्येश्वरी तथा || 114 ||
कामाक्षी कमनीयांगा क्वणत्कांचनसन्निभा |
कात्यायिनी कांतिदा च कमला कामरूपिणी || 115 ||
कात्यायनी च चंपा च सर्वसंपत्तिकारिणी |
नारायणी महानिद्रा योगनिद्रा प्रभावती || 116 ||
कामाक्षी कमलामोदा कम्रा कांतिकरी प्रिया |
कायस्था कालिका काली कुमारी कालरूपिणी || 117 ||
कालचक्रभ्रमा भ्रांता विभ्रमाभ्रमनाशिनी |
वात्याली मेघमाला च सुवृष्टिः सस्यर्वधिनी || 118 ||
कालाकारा कामधेनुः काशी कमललोचना |
कुंतला कनकाभा च काश्मीरा कुंकुमप्रिया|| 119 ||
काशपुष्पप्रतीकाशा शरत्कुमुदलोचना |
कल्याणीकमला कन्या शुभा मंगलचंडिका || 120 ||
कादंबिनी विपाशा च काश्मीरी कुंकुमप्रिया |
क्षांतिर्बहुसुवर्णा च रतिर्बहुसुवर्णदा || 121 ||
कांबोजिनी कांडरूपा कृपावर्णकारिणी |
कुहू क्रीडवती क्रीडा कुमारानंददायिनी || 122 ||
कार्यसिद्धिकरी देवी सर्वकार्यनिवासिनी |
कार्यकार्यकरी रौद्री महाप्रलयकारिणी || 123 ||
कामोद्भवा कामकन्या केवला कालघातिनी |
कैलासशिखरारूढा कैलासपतिसेविता || 124 ||
कामरूपा च ह्रींकारी कश्यपान्वयवर्धिनी |
कुंतला कुंतलप्रीता तथा कुंतलशोभिता || 125 ||
क्षेमंकरी विश्वरूपा मायूर्यावेशिनी तथा |
कामांकुशा कालचंडी भीमादेव्यर्धमस्तका || 126 ||
कालरूपा सूक्ष्मरूपा सूक्ष्मिणी चातिसूक्ष्मिणी |
तिथिरूपा वाररूपा तथा नक्षत्ररूपिणी || 127 ||
कामरूपधरा कम्रा कमनीया कविप्रिया |
कंजानना कंजहस्ता कंजपत्रायतेक्षणा || 128 ||
कुलांगना कुलाराध्या कुलमार्गरतेश्वरी |
दिगंबरा मुक्तकेशी वज्रमुष्टिर्निरिंधनी || 129 ||
कामप्रिया कामदूती कालघ्नी कालरूपिणी |
कराघोरा कामाक्षी भैरावस्था पराजिता || 130 ||
काकिनी कामरूपस्था कामरूपप्रकाशिनी |
कोलाविध्वंसिनी कंका कलंकार्ककलंकिनी || 131 ||
काशीस्थिता काशकन्या काशी चक्षुःप्रिया कुथा |
कल्पांतकारिणी भीमा ज्वालामालिन्यवामया || 132 ||
क्षेमंकरी शांकरी च सर्वसम्मोहकारिणी |
ऊर्द्ध्वतेजस्विनी क्लिन्ना महातेजस्विनी तथा || 133 ||
कादंबिनी नीलदेहा काली कादंबरीप्रिया |
माननीया महादेवी महामंडलवर्तिनी || 134 ||
कारुण्यसागरोद्भूता कारुण्यसिंधुवासिनी |
कात्तीकेशी कात्तीकस्था कात्तीकप्राणपालनी || 135 ||
कामप्रिया कामकरा कामांगी रमणी रतिः |
रतिप्रिया रति रती रतिसेव्या रतिप्रिया || 136 ||
कालकूटादिकूटस्था किटिशब्दांतरस्थिता |
कंकपक्षिनादमुखा कामधेनूद्भवा कला || 137 ||
काष्ठा सर्वांतरस्थाऽपि चिच्छक्तिश्चात्रिलालिता |
सर्वा सर्वात्मिका विश्वा ज्योतीरूपाऽक्षराऽमृता || 138 ||
कालिका स्फुटकर्त्री च कांबोजा कामला कुला |
कुशलाख्या काककुष्ठा कर्मस्था कूर्ममध्यगा || 139 ||
कामधेनुबृहद्गर्भा धीमती मौननाशिनी |
निःसंकल्पा निरातंका विनया विनयप्रदा || 140 ||
काहोड। काहड। काड। कंकला भाषकारिणी |
कनका कनकाभा च कनकाद्रिनिवासिनी || 141 ||
कालकर्त्री कला कल्या कलिनी कुलभामिनी |
कामरूपा काम्यमाना कामदेवकृपाधरा || 142 ||
कारुण्यजननी नित्या कल्याणी करुणाकरा |
कामाधारा कामरूपा कालदंडस्वरूपिणी || 143 ||
कामदा करुणाधारा कालिका कामदा शुभा |
चंडवीरा चंडमाया चंडमुंडविना || 144 ||
काळिका कल्मषघ्नी च कमनीयजटान्विता |
करपद्मा कराभीष्टप्रदा क्रतुफलप्रदा || 145 ||
काम्यालका कामदुघा कामिनी कामपालिनी |
कंथाधरा कृपाकर्त्री ककाराक्षरमातृका || 146 ||
काली कामकला काशी काशपुष्पसमप्रभा |
किन्नरी कुमुदाह्लादकारिणी कपिलाकृतिः || 147 ||
कांता काम्या कामजाता कामाक्षी किंकिणीयुता |
कीनाशनायिका कुब्जकन्यका कुंकुमाकृतिःb|| 148 ||
कार्पासयज्ञसूत्रस्था कूटब्रह्मार्थसाधिनी |
कलंजभक्षिणी क्रूरा क्रोधपुंजा कपिस्थिता || 149 ||
कामदा कनका कांता कंजगर्भप्रभा तथा |
पुण्यदा कालकेशा च भोक्त्त्री पुष्करिणी तथा || 150 ||
कामरूपा कांतरता कामरूपस्य सिद्धिदा |
कामरूपपीठदेवी कामरूपांकुजा कुजा || 151 ||
काष्ठा मुहूर्ता निमिषा अनिमेषा ततः परं |
अर्द्धमासा च मासा च सँवत्सरस्वरूपिणी || 152 ||
कामरूपा कामविद्या कामरूपादिकालिका |
कामरूपकला काम्या कामरूपकुलेश्वरी || 153 ||
काम्या कामप्रदा कृष्णा कल्याणी कल्पकारिणी |
काली कला कलिहरा काशिः कलिमलापहा || 154 ||
कामरूपजनानंदा कामरूपकुशाग्रधीः |
कामरूपकराकाशा कामरूपतरुस्थिता || 155 ||
काशाभा काशिका काशी काश्मीरचंदनार्चिता |
वंशीकरप्रियावंशी वंशीवादनहर्षिता || 156 ||
काष्ठा कला कुरुक्षेत्रभूमिः कलितदानवा |
कुल्या कलावती कीर्तिः केशिघ्नी कीर्तिदायिनी || 157 ||
कांचनोत्तमशोभाढ्या कनकाक्लृप्तपादुका |
कंठीरवसमासीना कंठीरवपराक्रमा || 158 ||
कामाक्षी कुंतहस्ता च कुलविद्या च कौलिकी |
काव्यशक्तिः केलिपरा कलहा कांतिलोचना || 159 ||
कामिनी कामरूपा च काम्या कामप्रदायिनी |
कमौळी कामदा कर्त्री क्रतुकर्मफलप्रदा || 160 ||
काव्यशक्तिः कवित्वज्ञा कविरूपा कविप्रिया |
शिवा शिवंकरी कंबुकंठी सर्वांगसुंदरी || 161 ||
कामात्मजा कामकला कामरूपविहारिणी |
कामशास्त्रार्थमध्यस्था कामरूपक्रियाकला || 162 ||
कामसंदीपिणी कामा सदा कौतूहलप्रिया |
जटाजूटधरा मुक्ता सूक्ष्मा शक्तिविभूषणा || 163 ||
कामाकरश्रीकल्याणी गौडकल्याणमिश्रिता |
रामसंजीवनी हेला मंदारी कामरूपिणी || 164 ||
कात्यायनी कालरात्रिः किन्नरी कीर्तिदायिनी |
कुरुकुल्ला कुवलयदलनीलायतेक्षणा || 165 ||
कांता कांतमुखी काली कचनिर्जितभृंगिका |
कंजाक्षी कंजवदना कस्तूरीतिलकोज्ज्वला || 166 ||
कार्यकारणनिर्मुक्ता कृमिकीटांतमोक्षदा |
किरातवनिता कांतिः कार्यकारणरूपिणी || 167 ||
कामाख्या मोक्षदानंदा नारसिंही जयप्रदा |
महादेवरता चंडी चंडमुंडविनाशिनी || 168 ||
कामरूपा कामकला कमनीया कलावती |
वैकुंठपत्नी कमला शिवपत्नी च पार्वती || 169 ||
कारा कारुण्यरूपा च भगमालाविभूषणा |
भगेश्वरी भगस्था च कुरुकुल्ला कृशोदरी || 170 ||
कामाक्षी कामप्रिया कीरा कमनीया कपर्दिनी |
कालिका भद्रकाली च कालकामांतकारिणी || 171 ||
कादंबरी पटोत्कृष्टा परमा परमेश्वरी |
सती सरस्वती सत्या सत्यासत्यस्वरूपिणी || 172 ||
काम्यश्रीर्गारुडीविद्या विश्वसूर्वीरसूर्दितिः |
माहेश्वरी वैष्णवी च ब्राह्मी ब्राह्मणपूजिता || 173 ||
कालिका कालरात्रिश्च कुटुंबजनतर्पिता |
कंजपत्राक्षिणी कल्यारोपिणी कालतोषिता || 174 ||
कालांतका कालमुखी कठोरा करुणामयी |
नीला नाभी च वागीशी दूर्वा नीलवर्णिनि || 175 ||
कादंबिनी करिगतिः करिचक्रसमर्चिता |
कंजेश्वरी कृपारूपा करुणामृतवर्षिणी || 176 ||
कालराज्ञी प्रजाराज्ञी तेजोराज्ञी हराश्रया |
पृथ्वीराज्ञी पयोराज्ञी वायुराज्ञी मदालसा || 177 ||
कामतारा स्पर्शतारा शब्दतारा रसाश्रया |
रूपतारा गंधतारा महायोगिनिपार्वति || 178 ||
कामरूपमहाकाली कामरूपयशोमयी |
कामरूपपरमानंदा कामरूपादिकामिनी || 179 ||
काश्यपी कालसर्पाभवेणिका शास्त्रयोनिका |
त्रयीमूर्तिः क्रियामूर्तिश्चतुर्वर्गा च दर्शिनी || 180 ||
कार्यकारणनिर्मुक्ता लीलाविग्रहधारिणी |
सर्वशृंगारशोभाढ्या सर्वायुधसमन्विता || 181 ||
कामदा कामिनी कुल्ला कुरुकुल्ला विरोधिनी |
उग्रा उग्रप्रभा दीप्ता प्रभा दंष्ट्रा मनोजवा || 182 ||
कामक्रांतमनोवृत्तिः कामकेलि कलारता |
कर्पूरवीटिकाप्रीता कामिनीजनमोहिनी || 183 ||
कात्यायनी काचलस्था कामचंद्रानना कथा |
काश्मीरदेशनिरता काश्मीरी कृषिकर्मजा || 184 ||
कांचनाभा कांचनदा कामदा क्रमदा कदा |
कांतभिन्ना कांतचिंता कमलासनवासिनी || 185 ||
कादंबरी कांतिमती कांता कादंबराशना |
मधुदानवविद्रावी मधुपा पाटलारुणा || 186 ||
कालिदासवाक्यगता कालिदाससुसिद्धिदा |
कलिशिक्षा कालशिक्षा कंदशिक्षापरायणा || 187 ||
कामांगनेडिता काम्या कामलोला कलावती |
कांक्षाहीना कामकला किंशुकाभरदच्छदा || 188 ||
काष्ठा सर्वांतरस्था च चिच्छक्तिरतिलालसा |
नंदा सर्वात्मिका विद्या ज्योतीरूपाऽमृताक्षरा || 189 ||
कांता चित्रांबरधरा दिव्याबरणभूषिता |
हंसाख्या व्योमनिलया जगत्सृष्टिविवर्द्धिनी || 190 ||
कालवारिप्रिया कामा काव्यवाक्यप्रिया क्रुधा |
कंजलता कौमुदी च कुज्योत्स्ना कलनप्रिया || 191 ||
कामधेनुर्बृहद्गर्भा धीमती मोहनाशिनी |
निःसंकल्पा निरातंका विनया विनयप्रिया || 192 ||
कामाक्षी ललिताभावा परापरविभूतिदा |
परांतजातमहिमा बडवा वामलोचना || 193 ||
कालसूक्ष्मा कालयज्ञा कालहारकरी कहा |
कहलस्था कलहस्था कलहा कलहांकरी || 194 ||
क्षालिनी सन्मयी व्याप्ता तैजसी पद्मबोधिका |
महामायाश्रया मान्या महादेवमनोरमा || 195 ||
ll इति श्री शांतमहाऋषि विरचित श्री कामाक्षि देवि सहस्रनाम स्तोत्रं संपूर्ण ll
अर्थ
श्री कामाक्षि देवी मूलाक्षर सहस्रनाम स्तोत्रम् देवी कामाक्षी के एक हजार नामों का एक दिव्य संग्रह है। यह केवल नामों की एक सूची नहीं है, बल्कि मूलाक्षरों की शक्ति के साथ देवी के विभिन्न रूपों, गुणों, शक्तियों और कल्याणकारी पहलुओं की स्तुति करने वाली एक मंत्रमय प्रार्थना है। यह स्तोत्र कांचीपुरम में निवास करने वाली जगन्माता श्री कामाक्षी देवी की सुंदरता, ज्ञान, करुणा, सुरक्षा और मोक्ष प्रदान करने वाली शक्तियों का व्यापक रूप से वर्णन करता है। प्रत्येक नाम देवी के एक अद्वितीय गुण या अवतार का प्रतिनिधित्व करता है, जो भक्तों को उनकी दिव्य उपस्थिति का अनुभव करने में मदद करता है।
यह सहस्रनाम देवी के विविध भावों और विशेषताओं को समाहित करता है। उदाहरण के लिए, 'कामाक्षी' का अर्थ इच्छाओं को पूर्ण करने वाली है, जबकि 'कलाधरा' का अर्थ कलाओं को धारण करने वाली और 'कालदैत्यनिकृंतनी' का अर्थ काल जैसे असुरों का नाश करने वाली है। 'कामिनी' और 'कमनीया' जैसे नाम देवी की मनमोहक सुंदरता का वर्णन करते हैं, वहीं 'कृष्णांगी नीलदेहा च पिंगकेशी कृशोदरी' जैसे नाम उनके विभिन्न रूपों को दर्शाते हैं, जो कभी सौम्य तो कभी उग्र होते हैं। 'कामधुक्' नाम कामधेनु के समान भक्तों की इच्छाओं को पूरा करने की शक्ति को दर्शाता है। इस प्रकार, प्रत्येक नाम उनकी सर्वव्यापकता और सर्वशक्तिमानता को प्रतिबिंबित करता है।
इस स्तोत्र का केंद्रीय बिंदु 'मूलाक्षर' शक्ति है। प्रत्येक नाम एक मंत्र के रूप में कार्य करता है, जो देवी की चेतना के साथ सीधा संबंध स्थापित करता है। इस सहस्रनाम का भक्तिपूर्वक पाठ करने से भक्तों का मन शुद्ध होता है, कर्मबंधन ढीले पड़ते हैं और आध्यात्मिक ज्ञानोदय का मार्ग प्रशस्त होता है। यह केवल एक प्रार्थना नहीं है, बल्कि देवी की शक्ति को अपने भीतर समाहित करने का एक माध्यम है। देवी के कल्याणकारी स्वरूपों जैसे अन्नपूर्णा, कामधेनु, मंगला और उनके संरक्षक रूपों जैसे काली, दुर्गा, भैरवी जैसे सभी पहलुओं को ये नाम आमंत्रित करते हैं।
परंपरागत रूप से, इन नामों का नियमित पाठ और ध्यान मन को शुद्ध करता है, बाधाओं को दूर करता है, समृद्धि और वाक् सिद्धि प्रदान करता है, और अंततः मोक्ष (मुक्ति) का समर्थन करता है। यह एक भक्तिपूर्ण स्तुतिगान है जो देवी की उपस्थिति का अनुभव करने और उनकी कृपा प्राप्त करने का एक शक्तिशाली साधन है। कामाक्षी देवी कांचीपुरम के हृदय में विराजमान होकर ब्रह्मांड पर शासन करने वाली परम शक्ति हैं, और यह सहस्रनाम उनकी अनंत महिमा का बखान करता है।
लाभ (Benefits):
- सभी इच्छाओं की पूर्ति: इस स्तोत्र का भक्तिपूर्वक पाठ करने से भक्तों की सभी लौकिक और आध्यात्मिक इच्छाएं पूर्ण होती हैं।
- समृद्धि और सौभाग्य: कामाक्षी देवी ऐश्वर्य और सौभाग्य की अधिष्ठात्री देवी हैं, अतः इस स्तोत्र के पाठ से जीवन में समृद्धि और धन की प्राप्ति होती है।
- रोगों से मुक्ति और सुरक्षा: देवी के उग्र रूपों के नामों का पाठ करने से सभी रोग दूर होते हैं और दुष्ट शक्तियों तथा बाधाओं से सुरक्षा मिलती है।
- ज्ञान और वाक् सिद्धि: कामाक्षी देवी ज्ञान और विद्या की देवी भी हैं, इसलिए यह स्तोत्र उत्तम बुद्धि, स्पष्ट वाणी और वाक् सिद्धि प्रदान करता है।
- आध्यात्मिक शांति और मोक्ष: नियमित पाठ मन को शांति प्रदान करता है, आध्यात्मिक प्रगति में सहायता करता है और अंततः मोक्ष के मार्ग को सुगम बनाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्री कामाक्षी देवी मूलाक्षर सहस्रनाम स्तोत्रं क्या है?
यह स्तोत्र कब और कैसे पढ़ना चाहिए?
इस स्तोत्र के पाठ से क्या लाभ प्राप्त होते हैं?
यह स्तोत्र किसे पढ़ना चाहिए?
यह स्तोत्र कितनी बार पढ़ना चाहिए?
इस स्तोत्र का मूल या पृष्ठभूमि क्या है?
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