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श्री कामाक्ष्यष्टकं

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स्तोत्र
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श्री कामाक्ष्यष्टकं

श्रीकांचीपुरवासिनीं भगवतीं श्रीचक्रमध्ये स्थितां
कल्याणीं कमनीयचारुमकुटां कौसुंभवस्त्रान्वितां |
श्रीवाणीशचिपूजितांघ्रियुगलां चारुस्मितां सुप्रभां
कामाक्क्षीं करुणामयीं भगवतीं वंदे परां देवतां ||1||

मालामौक्तिककंधरां शशिमुखीं शंभुप्रियां सुंदरीं
शर्वाणीं शरचापमंडितकरां शीतांशुबिंबाननां |
वीणागानविनोदकेलिरसिकां विद्युत्प्रभाभासुरां
कामाक्षीं करुणामयीं भगवतीं वंदे परां देवतां ||2||

श्यामां चारुनितंबिनीं गुरुभुजां चंद्रावतंसां शिवां
शर्वालिंगितनीलचारुवपुषीं शांतां प्रवालाधरां |
बालां बालतमालकांतिरुचिरां बालार्कबिंबोज्ज्वलां
कामाक्षीं करुणामयीं भगवतीं वंदे परां देवतां ||3||

लीलाकल्पितजीवकोटिनिवहां चिद्रूपिणीं शंकरीं
ब्रह्माणीं भवरोगतापशमनीं भव्यात्मिकां शाश्वतीं |
देवीं माधवसोदरीं शुभकरीं पंचाक्षरीं पावनीं
कामाक्षीं करुणामयीं भगवतीं वंदे परां देवतां ||4||

वामां वारिजलोचनां हरिहरब्रह्मेंद्रसंपूजितां
कारुण्यामृतवर्षिणीं गुणमयीं कात्यायनीं चिन्मयीं |
देवीं शुंभनिषूदिनीं भगवतीं कामेश्वरीं देवतां
कामाक्षीं करुणामयीं भगवतीं वंदे परां देवतां ||5||

कांतां कांचनरत्नभूषितगलां सौभाग्यमुक्तिप्रदां
कौमारीं त्रिपुरांतकप्रणयिनीं कादंबिनीं चंडिकां |
देवीं शंकरहृत्सरोजनिलयां सर्वाघहंत्रीं शुभां
कामाक्षीं करुणामयीं भगवतीं वंदे परां देवतां ||6||

शांतां चंचलचारुनेत्रयुगलां शैलेंद्रकन्यां शिवां
वाराहीं दनुजांतकीं त्रिनयनीं सर्वात्मिकां माधवीं |
सौम्यां सिंधुसुतां सरोजवदनां वाग्देवतामंबिकां
कामाक्षीं करुणामयीं भगवतीं वंदे परां देवतां ||7||

चंद्रार्कानललोचनां गुरुकुचां सौंदर्यचंद्रोदयां
विद्यां विंध्यनिवासिनीं पुरहरप्राणप्रियां सुंदरीं |
मुग्धस्मेरसमीक्षणेन सततं सम्मोहयंतीं शिवां
कामाक्षीं करुणामयीं भगवतीं वंदे परां देवतां ||8||

इति श्रीकामाक्ष्यष्टकं संपूर्णं |

अर्थ

श्री कामाक्षी अष्टकम, कांचीपुरम में निवास करने वाली परम पावन देवी श्री कामाक्षी अम्मन की स्तुति में आठ श्लोकों (अष्टकम) का एक स्तोत्र है। यह स्तोत्र देवी के दिव्य सौंदर्य, अगाध शक्ति, अपार करुणा और सृष्टि, स्थिति, लय के कार्यों का मनोहारी वर्णन करता है। भक्त इस स्तोत्र का भक्तिपूर्वक पाठ करके देवी की कृपा प्राप्त करते हैं और आध्यात्मिक तथा भौतिक लाभ पाते हैं।

श्री कामाक्षी देवी साक्षात् परब्रह्म स्वरूपिणी हैं और श्रीचक्र के मध्य में विराजमान हैं। वह सभी जीवों की सृष्टिकर्ता, पालक और संहारक हैं। उनकी करुणा अनंत है और वे भक्तों के कष्टों को दूर कर मोक्ष प्रदान करने की शक्ति रखती हैं। वह ज्ञान, धन, सौंदर्य और शक्ति का प्रतीक हैं। यह अष्टकम देवी के विभिन्न गुणों और लीलाओं का विस्तार से वर्णन करता है, जिससे भक्तों को उनके दिव्य स्वरूप का अनुभव होता है और उनमें गहरी भक्ति का संचार होता है।

पहले श्लोक में, कांचीपुरम में श्रीचक्र के मध्य में स्थित, शुभप्रद, लाल रेशमी वस्त्रों से सुशोभित, सरस्वती और इंद्रानी द्वारा पूजित, मंद मुस्कान से प्रकाशित, करुणामयी कामाक्षी देवी को नमस्कार किया गया है। वह सभी मंगलों की दाता और सौंदर्य तथा सौम्यता का प्रतीक हैं। दूसरा श्लोक उनके सुंदर रूप का और अधिक वर्णन करता है; मोतियों के हार से सुसज्जित, चंद्रमा के समान शांत मुख वाली, शिव की प्रियतमा, फूलों का धनुष धारण करने वाली, वीणा के संगीत का आनंद लेने वाली, बिजली की तरह चमकीली कामाक्षी देवी कला और रचनात्मकता का स्रोत हैं। तीसरे श्लोक में, तमाल वृक्ष के समान श्यामवर्णी, शिव द्वारा आलिंगित, शांत, लाल अधरों वाली, उगते सूर्य के समान तेजस्वी, नित्य युवा कामाक्षी देवी की स्तुति की गई है। वह सौंदर्य और विवेक का साक्षात् रूप हैं।

चौथा श्लोक उनकी सृजन शक्ति को बताता है; लीला से करोड़ों जीवों का सृजन करने वाली, चैतन्य स्वरूपिणी, भव रोगों को शांत करने वाली, शाश्वत, विष्णु की बहन, शुभकारी, पंचाक्षरी स्वरूपिणी पावन कामाक्षी देवी सभी दुःखों को दूर कर मुक्ति प्रदान करने वाली हैं। पाँचवें श्लोक में, ब्रह्मा, विष्णु और इंद्र आदि देवताओं द्वारा पूजित, अमृत के समान कृपा बरसाने वाली, शुंभ-निशुंभ जैसे राक्षसों का संहार करने वाली, परम चैतन्य स्वरूपिणी कामेश्वरी के रूप में शासन करने वाली देवी का वर्णन किया गया है। वह अनंत करुणा का सागर हैं। छठा श्लोक उनकी ऐश्वर्य और मोक्ष प्रदान करने की शक्ति को बताता है; सोने के आभूषणों से सुसज्जित, लौकिक धन और आध्यात्मिक मुक्ति प्रदान करने वाली, शिव के हृदय में निवास करने वाली, चंडिका रूप में भक्तों की रक्षा करने वाली कामाक्षी देवी को प्रणाम है।

सातवें श्लोक में, पर्वतराज की पुत्री, त्रिनेत्री, राक्षसों का संहार करने वाली, सागर के समान शांत, वाणी और ज्ञान की देवी के समान चमकीली, संपूर्ण ब्रह्मांड की नित्य माता कामाक्षी देवी की स्तुति की गई है। आठवां श्लोक बताता है कि उनकी आँखें सूर्य, चंद्रमा और अग्नि के समान चमकती हैं। शिव की प्रियतमा, विंध्य पर्वत में निवास करने वाली, सदा मंद मुस्कान वाली कामाक्षी देवी सभी जीवों को मोहित करने वाली हैं और सदा भक्तों की रक्षा करती हैं।

लाभ (Benefits):

  • आध्यात्मिक उन्नति: इस अष्टकम का नियमित पाठ देवी की करुणा को आकर्षित कर मन को शांति, स्थिरता और आध्यात्मिक प्रगति प्रदान करता है।
  • सभी मनोकामनाओं की पूर्ति: भक्तों की लौकिक इच्छाओं जैसे धन, उत्तम स्वास्थ्य, संतान सुख, वैवाहिक आनंद और सफलता को प्राप्त करने में सहायता करता है।
  • बुरी शक्तियों का निवारण: देवी की शक्ति बुरी शक्तियों, नकारात्मक प्रभावों और किसी भी प्रकार की बाधाओं से भक्तों की रक्षा करती है।
  • ज्ञान और बुद्धि: सरस्वती द्वारा पूजित देवी ज्ञान, कला, रचनात्मकता और शैक्षणिक सफलता को बढ़ाती हैं। यह छात्रों और कलाकारों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है।
  • मोक्ष प्राप्ति: देवी की कृपा से सांसारिक बंधनों से मुक्ति पाकर मोक्ष प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त होता है, जो अंतिम आध्यात्मिक लक्ष्य है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्री कामाक्षी अष्टकम क्या है?
श्री कामाक्षी अष्टकम कांचीपुरम में निवास करने वाली श्री कामाक्षी देवी की स्तुति में आठ श्लोकों का एक पवित्र स्तोत्र है। यह देवी के सौंदर्य, शक्ति और करुणा का वर्णन करता है।
श्री कामाक्षी अष्टकम का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
इस स्तोत्र का पाठ प्रतिदिन सुबह या शाम स्नान के बाद शुद्ध मन से किया जा सकता है। देवी के चित्र या विग्रह के सामने बैठकर भक्तिपूर्वक पाठ करना उत्तम माना जाता है।
श्री कामाक्षी अष्टकम का पाठ करने के क्या लाभ हैं?
इसका पाठ करने से आध्यात्मिक उन्नति, सभी मनोकामनाओं की पूर्ति, बुरी शक्तियों का निवारण, ज्ञान और बुद्धि की प्राप्ति तथा मोक्ष प्राप्ति होती है। यह मन को शांति और स्थिरता प्रदान करता है।
श्री कामाक्षी अष्टकम का पाठ किसे करना चाहिए?
जाति, लिंग या किसी अन्य भेद के बिना कोई भी व्यक्ति इस स्तोत्र का पाठ कर सकता है। विशेष रूप से आध्यात्मिक प्रगति चाहने वाले, कष्टों से मुक्ति पाने वाले और देवी की कृपा प्राप्त करने वाले इसका पाठ कर सकते हैं।
श्री कामाक्षी अष्टकम का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
सामान्यतः, दैनिक पूजा में एक बार पाठ किया जा सकता है। विशेष फल के लिए, 11, 21, या 108 बार पाठ कर सकते हैं, या किसी निश्चित अवधि के लिए नियमित रूप से पाठ कर सकते हैं।
श्री कामाक्षी अष्टकम का उद्गम या स्रोत क्या है?
श्री कामाक्षी अष्टकम एक प्राचीन स्तोत्र है, जिसके रचयिता के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं है। हालांकि, इसे आदि शंकराचार्य या शक्ति परंपरा के अन्य महान संतों से संबंधित माना जाता है।

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