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श्री अरुणाचलाष्टकम्

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स्तोत्र
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श्री  अरुणाचलाष्टकम्

दर्शनादभ्रसदसि जननात्कमलालये |
काश्यां तु मरणान्मुक्तिः स्मरणादरुणाचले || 1 ||

करुणापूरितापांगं शरणागतवत्सलम् |
तरुणेंदुजटामौलिं स्मरणादरुणाचलम् || 2 ||

समस्तजगदाधारं सच्चिदानंदविग्रहम् |
सहस्ररथसोपेतं स्मरणादरुणाचलम् || 3 ||

कांचनप्रतिमाभासं वांछितार्थफलप्रदम् |
मां च रक्ष सुराध्यक्षं स्मरणादरुणाचलम् || 4 ||

बद्धचंद्रजटाजूटमर्धनारीकलेबरम् |
वर्धमानदयांभोधिं स्मरणादरुणाचलम् || 5 ||

कांचनप्रतिमाभासं सूर्यकोटिसमप्रभम् |
बद्धव्याघ्रपुरीध्यानं स्मरणादरुणाचलम् || 6 ||

शिक्षयाखिलदेवारि भक्षितक्ष्वेलकंधरम् |
रक्षयाखिलभक्तानां स्मरणादरुणाचलम् || 7 ||

अष्टभूतिसमायुक्तमिष्टकामफलप्रदम् |
शिष्टभक्तिसमायुक्तान् स्मरणादरुणाचलम् || 8 ||

विनायकसुराध्यक्षं विष्णुब्रह्मेंद्रसेवितम् |
विमलारुणपादाब्जं स्मरणादरुणाचलम् || 9 ||

मंदारमल्लिकाजातिकुंदचंपकपंकजैः |
इंद्रादिपूजितां देवीं स्मरणादरुणाचलम् || 10 ||

संपत्करं पार्वतीशं सूर्यचंद्राग्निलोचनम् |
मंदस्मितमुखांभोजं स्मरणादरुणाचलम् || 11 ||              
     
इति श्रीअरुणाचलाष्टकम् ||

अर्थ

श्री अरुणाचलाष्टकम् भगवान अरुणाचलेश्वर की महिमा का स्तुतिगान करने वाला एक अत्यंत पवित्र स्तोत्र है। दक्षिण भारत के तिरुवन्नामलाई में स्थित अरुणाचल पर्वत को साक्षात् भगवान शिव का स्वरूप माना जाता है। यह अष्टकम् अरुणाचल के दिव्यत्व, उसके स्मरण के महत्व और भक्तों को मिलने वाली मुक्ति का वर्णन करता है। यह मन को शांति और आध्यात्मिक उत्थान प्रदान करने वाली एक शक्तिशाली प्रार्थना है।

हिंदू धर्म में, मोक्ष या मुक्ति प्राप्त करने के कई मार्ग बताए गए हैं। यह माना जाता है कि भगवान शिव स्वयं अरुणाचल के रूप में विराजमान हैं, और इस पर्वत का स्मरण मात्र ही मुक्ति दिलाता है। 'काश्यां तु मरणान्मुक्तिः स्मरणात् अरुणाचले' श्लोक के अनुसार, जहां काशी में मृत्यु से मुक्ति मिलती है, वहीं अरुणाचल का स्मरण मात्र ही मुक्ति प्रदान करता है, जो इसके असाधारण महत्व को दर्शाता है। यह केवल एक पर्वत नहीं, बल्कि ज्ञान, वैराग्य और मोक्ष प्रदान करने वाली एक जीवंत दिव्य शक्ति है।

यह अष्टकम् अरुणाचलेश्वर को करुणापूर्ण दृष्टि वाले, शरणागत भक्तों के प्रति वत्सल, युवा चंद्रमा को अपनी जटाओं में धारण करने वाले के रूप में वर्णित करता है। यह स्तोत्र उन्हें समस्त जगत का आधार, सच्चिदानंद स्वरूप, करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी और सुनहरी आभा वाले के रूप में पूजता है। अर्धनागेश्र्वर रूप में विद्यमान, दया के सागर, भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करने वाले, दुष्टों का संहार कर भक्तों की रक्षा करने वाले के रूप में इस स्तोत्र में उनके दिव्य गुणों को उजागर किया गया है।

प्रत्येक श्लोक अरुणाचल के स्मरण से प्राप्त होने वाले अद्भुत फलों पर जोर देता है। यह भगवान शिव की अनंत शक्ति और करुणा को मन में लाता है। अरुणाचल अष्टकम् भक्तों को भय, दुख और बंधनों से मुक्ति दिलाकर आध्यात्मिक साक्षात्कार की ओर मार्गदर्शन करता है। इस स्तोत्र का पाठ मन को शुद्ध करता है, शांति प्रदान करता है और परम पद तक पहुंचने में सहायता करता है।

लाभ (Benefits):

  • मोक्ष की प्राप्ति: अरुणाचल का स्मरण मात्र ही मोक्ष दिलाता है, यह इस स्तोत्र का प्रमुख प्रतिपादन है। यह जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति प्रदान करता है।
  • शांति और सुकून: अरुणाचलेश्वर के दिव्य स्वरूप का स्मरण करने से मन को अपार शांति और सुकून मिलता है, आंतरिक संघर्ष शांत होते हैं।
  • मनोकामना पूर्ति: स्तोत्र में वर्णित है कि अरुणाचलेश्वर भक्तों की सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाले देव हैं।
  • रक्षा और निर्भयता: भगवान शिव दुष्ट शक्तियों का नाश कर भक्तों की रक्षा करते हैं। इस स्तोत्र का पाठ सभी भयों से मुक्ति दिलाकर सुरक्षा प्रदान करता है।
  • आध्यात्मिक उन्नति: अरुणाचल ज्ञान और वैराग्य का प्रतीक है। इसका स्मरण भक्तों को आध्यात्मिक ज्ञान में वृद्धि करने और दिव्य सान्निध्य प्राप्त करने में सहायता करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्री अरुणाचलाष्टकम् क्या है?
श्री अरुणाचलाष्टकम् भगवान शिव के एक अन्य रूप, अरुणाचलेश्वर की महिमा का स्तुतिगान करने वाला आठ श्लोकों का एक पवित्र स्तोत्र है। यह अरुणाचल पर्वत की दिव्यता और उसके स्मरण के महत्व का वर्णन करता है।
श्री अरुणाचलाष्टकम् का पाठ कब करना चाहिए?
इस स्तोत्र का पाठ किसी भी समय किया जा सकता है, विशेष रूप से सुबह स्नान के बाद या शाम को पूजा के समय। सोमवार या शिव को समर्पित अन्य शुभ दिनों में पाठ करना अधिक फलदायी होता है।
श्री अरुणाचलाष्टकम् का पाठ करने के क्या लाभ हैं?
इस स्तोत्र का पाठ करने से मोक्ष की प्राप्ति, मानसिक शांति, मनोकामना पूर्ति, रक्षा और आध्यात्मिक उन्नति मिलती है। यह जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति दिलाने की शक्ति रखता है।
श्री अरुणाचलाष्टकम् का पाठ कौन कर सकता है?
शिव भक्त, आध्यात्मिक साधक और जीवन में शांति, सुकून तथा मोक्ष की कामना करने वाला कोई भी व्यक्ति इस स्तोत्र का पाठ कर सकता है। इसमें कोई जाति, धर्म या लिंग भेद नहीं है।
श्री अरुणाचलाष्टकम् का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
प्रतिदिन कम से कम एक बार या 11, 21, 108 बार पाठ करना उत्तम माना जाता है। भक्ति और एकाग्रता से पाठ करना महत्वपूर्ण है। नियमित पाठ से अधिक आध्यात्मिक फल प्राप्त होते हैं।
श्री अरुणाचलाष्टकम् का मूल क्या है?
यह माना जाता है कि श्री अरुणाचलाष्टकम् भगवान रमण महर्षि द्वारा रचित है, हालांकि इस स्तोत्र के सटीक मूल के बारे में कई मत हैं। यह अरुणाचल की महिमा को दर्शाने वाले प्राचीन स्तोत्रों में से एक है।

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