ऋण विमोचक अंगारक स्तोत्रं
स्कंद उवाच:
ऋण ग्रस्त नराणांतु ऋणमुक्तिः कधं भवेत् |
ब्रह्मोवाच :
वक्ष्येहं सर्वलोकानां हितार्थं हितकामदम् |
ओ अस्य श्री अंगारक स्तोत्र महा मंत्रस्य | गौतम ऋषिः | अनुष्टुप् च्छंदः | अंगारको देवता | मम ऋण विमोचनार्थे जपे विनियोगः |
ध्यानम् :
रक्त माल्यांबर धरः शूल शक्ति गदाधरः |
चतुर्भुजो मेषगतो वरदश्चधरा सुतः ||
मंगळो भूमि पुत्रश्च ऋणहर्ता कृपाकरः |
धरात्मजः कुजो बौमो भूमिजो भूमि नंदनः ||
अंगारको यमश्चैव सर्व रोगापहारकः |
स्रष्टा कर्ताच हर्ताच सर्वदेवैश्च पूजितः ||
एतानि कुज नामानि नित्यं यः प्रयतः पठेत् |
ऋणं नजायते तस्य धनं प्राप्नोत्यसंशयः ||
अंगारक महीपुत्र भगवन् भक्तवत्सल |
नमोस्तुते ममाशेष ऋणमाशु विमोचय ||
रक्त गंधैश्च पुष्पैश्च धूप दीपै र्गुडोदनैः |
मंगळं पूजयित्वातु मंगळाहनि सर्वदा ||
एक विंशति नामानि पठित्वातु तदंतिके |
ऋणरेखाः प्रकर्तव्या अंगारेण तदग्रतः ||
ताश्च प्रमार्जयेत् पश्चात् वामपादेन संस्पृशन्
मूलमंत्रः
अंगारक महीपुत्र भगवन् भक्तवत्सल |
नमोस्तुते ममाशेष ऋण माशु विमोचय ||
एवं कृते न संदेहो ऋणं हित्वा धनं लभेत्|
महतीं श्रिय माप्नोति ह्यपरो धनदो युवा ||
अर्घ्यम् :
अंगारक मही पुत्र भगवन् भक्त वत्सल |
नमोस्तु ते ममाशेष ऋणमाशु विमोचय ||
भूमि पुत्र महा तेज स्स्वेदोद्भव पिनाकिनः |
ऋणार्तस्त्वां प्रपन्नोस्मि गृहाणार्घ्यं नमोस्तुते ||
|| इति ऋण विमोचक अंगारक स्तोत्रं संपूर्णं ||
अर्थ
ऋण विमोचक अंगारक स्तोत्रम भगवान मंगलदेव को समर्पित एक अत्यंत शक्तिशाली प्रार्थना है, जो भक्तों को सभी प्रकार के ऋणों, विशेषकर आर्थिक और कार्मिक ऋणों से मुक्ति दिलाने में सहायक है। इसका उल्लेख स्कंद पुराण में मिलता है, जहाँ स्कंद भगवान ब्रह्मा से पूछते हैं कि ऋणग्रस्त मनुष्य ऋणों से कैसे मुक्त हो सकते हैं। तब ब्रह्माजी लोक कल्याण के लिए इस महान स्तोत्र का उपदेश देते हैं। इस स्तोत्र के ऋषि गौतम, छंद अनुष्टुप और देवता अंगारक हैं। 'मम ऋण विमोचनार्थे जपे विनियोगः' के संकल्प के साथ, अपने ऋणों की निवृत्ति के लिए इसका जप किया जाता है।
इस स्तोत्र का ध्यान श्लोक अंगारक के दिव्य स्वरूप का वर्णन करता है। वे रक्त वर्ण की मालाएँ और वस्त्र धारण किए हुए हैं, शूल, शक्ति और गदा धारण किए हुए हैं, चतुर्भुज हैं, मेष राशि पर आरूढ़ हैं और वरदान देने वाले पृथ्वी के पुत्र हैं। मंगल साहस, ऊर्जा और इच्छाशक्ति का प्रतीक हैं। ज्योतिष में मंगल की स्थिति व्यक्ति के ऋण और शत्रुओं पर प्रभाव डालती है। यह स्तोत्र मंगल की कृपा का आह्वान करके बाधाओं को दूर करने और आर्थिक स्थिरता लाने में मदद करता है।
यह स्तोत्र अंगारक के कई नामों और गुणों का गुणगान करता है: मंगल, भूमि पुत्र, ऋणहर्ता (ऋणों को हरने वाले), कृपाकर (दयालु), धरात्मज, कुज, भौम, भूमिज, भूमि नंदन। इसके अतिरिक्त, अंगारक को यम (नियंत्रक), सर्व रोगोपहारक (सभी रोगों को हरने वाले), स्रष्टा (सृष्टिकर्ता), कर्ता (करने वाले) और हर्ता (संहारकर्ता) भी कहा जाता है, और वे सभी देवताओं द्वारा पूजित हैं। ये नाम मंगल की बहुमुखी शक्ति और क्षमताओं को दर्शाते हैं। मंगल केवल ऋणों का निवारण ही नहीं करते, बल्कि स्वास्थ्य, शक्ति और समग्र कल्याण भी प्रदान करते हैं।
इस स्तोत्र के नियमित पाठ से प्राप्त होने वाले फल अद्भुत बताए गए हैं। 'एतानि कुज नामानि नित्यं यः प्रयतः पठेत् | ऋणं न जायते तस्य धनं प्राप्नोत्यसंशयः ||' अर्थात्, जो व्यक्ति इन कुज के नामों का नित्य श्रद्धापूर्वक पाठ करता है, उसे ऋण नहीं होता और वह निःसंदेह धन प्राप्त करता है। मंगलवार के दिन, लाल चंदन, पुष्प, धूप, दीप और गुड़ के चावल (गुड़ोदन) से मंगल की पूजा करके, उनके समीप इन इक्कीस नामों का पाठ करने से ऋणों का निवारण होता है। यह प्रार्थना न केवल आर्थिक संकटों से, बल्कि पूर्वजों के कर्मों या पिछले जन्मों के ऋणों से भी मुक्ति दिलाती है।
लाभ (Benefits):
- ऋण मुक्ति: आर्थिक ऋणों और अन्य प्रकार के ऋण भार से मुक्ति पाने में सहायता करता है, जिससे आर्थिक स्थिरता और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
- स्वास्थ्य सुधार: अंगारक 'सर्व रोगोपहारक' हैं, इसलिए इस स्तोत्र का पाठ शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने तथा रोगों को दूर करने में सहायक है।
- साहस और आत्मविश्वास: मंगल साहस और शक्ति के अधिपति हैं। यह स्तोत्र व्यक्ति में आत्मविश्वास और संकल्प शक्ति को बढ़ाता है, जिससे जीवन की चुनौतियों का सामना करने में मदद मिलती है।
- धन और समृद्धि: ऋण से मुक्ति दिलाने के साथ-साथ, 'धनं प्राप्नोत्यसंशयः' के अनुसार, यह धन और समृद्धि को आकर्षित करता है, जिससे जीवन में आर्थिक उन्नति होती है।
- कर्म बंधनों से मुक्ति: यह स्तोत्र केवल भौतिक ऋणों से ही नहीं, बल्कि कार्मिक ऋणों और पूर्वजों के ऋणों से भी मुक्ति दिलाने की आध्यात्मिक शक्ति रखता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ऋण विमोचक अंगारक स्तोत्रं क्या है?
इस स्तोत्र का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?
ऋण विमोचक अंगारक स्तोत्रं के पाठ से क्या लाभ होते हैं?
किसे इस स्तोत्र का पाठ करना चाहिए?
इस स्तोत्र का पाठ कितनी बार करना चाहिए?
इस स्तोत्र का मूल या उद्गम क्या है?
टिप्पणियाँ
टिप्पणी लिखने के लिए लॉगिन करें
टिप्पणियाँ लोड हो रही हैं...
