विभुवन संकष्टी चतुर्थी
विभुवन संकष्टी क्या है
विभुवन संकष्टी चतुर्थी वह संकष्टी है जो अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) के कृष्ण पक्ष में पड़ती है। साल की बारह संकष्टियों के अपने-अपने गणेश रूप हैं; अधिक मास आने पर जो तेरहवीं संकष्टी बनती है, उसमें गणेश जी के "विभुवन" रूप — सारे लोकों में व्याप्त गणपति — की पूजा होती है। इसलिए यह हर साल नहीं, लगभग ढाई-तीन साल में एक बार आती है।
किस तिथि को
नियम वही है जो हर संकष्टी का है — कृष्ण पक्ष की चतुर्थी, जो चंद्रोदय के समय चल रही हो। अंतर सिर्फ़ इतना है कि यह चतुर्थी अधिक मास में होती है। अधिक मास किस महीने के साथ जुड़ेगा, यह हर बार बदलता है, और पूर्णिमांत तथा अमांत पंचांग में अधिक मास के कृष्ण पक्ष की गिनती भी अलग ढंग से होती है। इसलिए इस पृष्ठ पर दिखाई गई तारीख़ ही देखें। अधिक मास के बारे में विस्तार से अधिक मास क्या है में पढ़ें।
पूजा कैसे करें
- सुबह स्नान कर संकल्प लें और दिन भर फलाहार या निर्जल व्रत रखें।
- शाम को गणेश जी को दूर्वा, लाल फूल, मोदक और तिल-गुड़ चढ़ाएँ।
- संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा सुनें और गणेश जी की आरती करें।
- चंद्रोदय पर अर्घ्य देकर व्रत खोलें।
अधिक मास भगवान विष्णु (पुरुषोत्तम) को समर्पित है और इसमें जप, दान और व्रत का फल बढ़ा हुआ माना जाता है, इसलिए कई भक्त इस संकष्टी को खास नियम से रखते हैं। बाकी महीनों की संकष्टी संकष्टी चतुर्थी कैलेंडर पर देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
विभुवन संकष्टी चतुर्थी कब आती है?
क्या विभुवन संकष्टी हर साल आती है?
विभुवन का अर्थ क्या है?
इसकी पूजा अन्य संकष्टी से अलग है क्या?
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