मोक्षदा एकादशी
मोक्षदा एकादशी क्या है
मोक्षदा एकादशी का अर्थ है मोक्ष देने वाली एकादशी। मान्यता है कि इस व्रत का पुण्य पितरों को अर्पित करने से उन्हें सद्गति मिलती है। इसी दिन गीता जयंती भी मनाई जाती है, क्योंकि कुरुक्षेत्र में श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश इसी तिथि को दिया था।
किस तिथि को आती है
यह मार्गशीर्ष (अगहन) शुक्ल पक्ष की एकादशी है। शुक्ल पक्ष होने के कारण पूर्णिमांत और अमांत दोनों पंचांगों में महीने का नाम एक ही रहता है। व्रत सूर्योदय के समय वाली एकादशी पर रखा जाता है।
कथा संक्षेप में
चंपक नगर के राजा वैखानस ने सपने में अपने पिता को नरक में कष्ट भोगते देखा। वे बहुत दुखी हुए और पर्वत मुनि के आश्रम पहुँचे। मुनि ने बताया कि पिता के किसी पुराने पाप का फल है और उपाय के रूप में मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी का व्रत करके उसका पुण्य पिता को देने को कहा। राजा ने परिवार सहित व्रत किया और उनके पिता को मुक्ति मिली। पूरी कथा मोक्षदा एकादशी व्रत कथा में है।
कैसे मनाते हैं
सुबह स्नान के बाद विष्णु जी और श्रीकृष्ण की पूजा करें, तुलसी दल और पीले फूल चढ़ाएँ। बहुत से घरों में इस दिन गीता का पाठ होता है, कम से कम ग्यारहवाँ या अठारहवाँ अध्याय। व्रत का संकल्प लेते समय पितरों का स्मरण करें और अगले दिन पारण के बाद ब्राह्मण या ज़रूरतमंद को भोजन कराएँ। कुरुक्षेत्र और ब्रज में गीता जयंती के बड़े आयोजन होते हैं। घर पर पाठ का तरीका गीता जयंती पर गीता पाठ में देखें। पूरे साल की एकादशियाँ एकादशी कैलेंडर पर हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मोक्षदा एकादशी कब होती है?
मोक्षदा एकादशी और गीता जयंती एक ही दिन क्यों?
इस व्रत का फल क्या बताया गया है?
इस दिन क्या पढ़ें?
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