गीता जयंती मार्गशीर्ष (अगहन) शुक्ल एकादशी को मनाई जाती है, वही दिन जो मोक्षदा एकादशी भी है। मान्यता है कि इसी दिन कुरुक्षेत्र के युद्ध मैदान में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को भगवद्गीता का उपदेश दिया था। 2026 में गीता जयंती 20 दिसंबर को और 2027 में 9 दिसंबर को है (नई दिल्ली)। इस दिन घरों में गीता की पूजा और पाठ होता है, और कई लोग किसी को गीता भेंट करते हैं।
कब और क्यों
महाभारत के भीष्म पर्व के 18 अध्याय ही भगवद्गीता हैं। युद्ध शुरू होने से ठीक पहले जब अर्जुन ने दोनों सेनाओं में अपने गुरु, दादा, भाई और मित्रों को देखा, तो उनका मन बैठ गया और उन्होंने धनुष रख दिया। तब श्रीकृष्ण ने उन्हें कर्तव्य, आत्मा, कर्म, भक्ति और ज्ञान का जो उपदेश दिया, वही 700 श्लोकों की गीता है।
परंपरा इस उपदेश की तिथि अगहन शुक्ल एकादशी मानती है। चूँकि श्रीकृष्ण ने स्वयं गीता में कहा है कि "महीनों में मैं मार्गशीर्ष हूँ", इसलिए इस महीने और इस तिथि को गीता से जोड़ना भक्तों को बहुत स्वाभाविक लगता है। तिथि और पारण का समय गीता जयंती पृष्ठ पर देखें।
कुरुक्षेत्र का गीता महोत्सव
हरियाणा का कुरुक्षेत्र गीता की जन्मभूमि माना जाता है। शहर से कुछ दूर ज्योतिसर नाम का स्थान है, जहाँ एक प्राचीन वट वृक्ष के नीचे गीता उपदेश दिए जाने की मान्यता है। गीता जयंती के आसपास हरियाणा सरकार और कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड मिलकर अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव आयोजित करते हैं।
- ब्रह्म सरोवर के घाटों पर दीपदान और संध्या आरती होती है।
- हज़ारों लोग एक साथ बैठकर गीता के श्लोकों का सामूहिक पाठ करते हैं।
- शिल्प मेला, झाँकियाँ और देश भर से आए कलाकारों के कार्यक्रम चलते हैं।
- ज्योतिसर, सन्निहित सरोवर और भद्रकाली शक्तिपीठ में भी दर्शन के लिए भीड़ रहती है।
महोत्सव की तारीखें और कार्यक्रम हर साल बदलते हैं, इसलिए यात्रा से पहले कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड या हरियाणा पर्यटन की आधिकारिक सूचना देख लें।
18 अध्याय एक नज़र में
| अध्याय | नाम | श्लोक | मुख्य बात |
|---|---|---|---|
| 1 | अर्जुन विषाद योग | 47 | अर्जुन का मोह और शोक |
| 2 | सांख्य योग | 72 | आत्मा अमर है, स्थितप्रज्ञ के लक्षण |
| 3 | कर्म योग | 43 | निष्काम कर्म, यज्ञ भाव से काम |
| 4 | ज्ञान कर्म संन्यास योग | 42 | अवतार का कारण, ज्ञान की महिमा |
| 5 | कर्म संन्यास योग | 29 | कर्म और संन्यास में संतुलन |
| 6 | आत्मसंयम (ध्यान) योग | 47 | ध्यान की विधि, मन का संयम |
| 7 | ज्ञान विज्ञान योग | 30 | भगवान की परा-अपरा प्रकृति |
| 8 | अक्षर ब्रह्म योग | 28 | अंत समय का स्मरण, उत्तरायण-दक्षिणायन |
| 9 | राजविद्या राजगुह्य योग | 34 | भक्ति से भगवान सुलभ हैं |
| 10 | विभूति योग | 42 | भगवान की विभूतियाँ |
| 11 | विश्वरूप दर्शन योग | 55 | अर्जुन को विराट रूप का दर्शन |
| 12 | भक्ति योग | 20 | प्रिय भक्त के लक्षण |
| 13 | क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग | 34 | शरीर और आत्मा का भेद |
| 14 | गुणत्रय विभाग योग | 27 | सत्त्व, रज, तम तीन गुण |
| 15 | पुरुषोत्तम योग | 20 | संसार रूपी उल्टा पीपल, पुरुषोत्तम |
| 16 | दैवासुर संपद विभाग योग | 24 | दैवी और आसुरी स्वभाव |
| 17 | श्रद्धात्रय विभाग योग | 28 | तीन तरह की श्रद्धा, भोजन, तप, दान |
| 18 | मोक्ष संन्यास योग | 78 | पूरे उपदेश का सार, शरणागति |
कुल मिलाकर 700 श्लोक। कुछ संस्करणों में 13वें अध्याय की शुरुआत में अर्जुन का एक प्रश्न जोड़कर 701 श्लोक भी गिने जाते हैं।
घर पर गीता पाठ की विधि
- तैयारी: सुबह स्नान करके पूजा घर में चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं। श्रीकृष्ण का चित्र (हो सके तो अर्जुन को उपदेश देते हुए) और गीता की पुस्तक रखें। गीता को सीधे ज़मीन पर न रखें।
- दीपक और संकल्प: घी का दीपक जलाएं, गणेश जी का स्मरण करें और मन में संकल्प लें कि आप कितना पाठ करेंगे।
- गीता पूजन: पुस्तक पर रोली-अक्षत, पीले फूल और तुलसी दल चढ़ाएं।
- ध्यान श्लोक: "वसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम्। देवकीपरमानन्दं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्॥" बोलकर श्रीकृष्ण को प्रणाम करें।
- पाठ: साफ़ और धीमे स्वर में पढ़ें। संस्कृत कठिन लगे तो श्लोक के साथ उसका हिंदी अर्थ भी पढ़ें; भाव समझना उच्चारण जितना ही ज़रूरी है।
- बीच में न उठें: एक अध्याय शुरू करें तो उसे पूरा करके ही उठें।
- समापन: पाठ के बाद ॐ जय जगदीश हरे या गीता जी की आरती करें, तुलसी दल डालकर माखन-मिश्री या पंचामृत का भोग लगाएं।
- गीता दान: सामर्थ्य हो तो किसी विद्यार्थी, मंदिर या पुस्तकालय को गीता भेंट करें।
पूरा पाठ न हो सके तो
- परिवार में बाँट लें: चार-पाँच लोग हों तो हर कोई तीन-चार अध्याय पढ़े, इस तरह एक-डेढ़ घंटे में पूरी गीता हो जाती है।
- 12वाँ अध्याय: भक्ति योग केवल 20 श्लोकों का है और रोज़ के पाठ के लिए सबसे प्रिय है।
- 15वाँ अध्याय: पुरुषोत्तम योग भी 20 श्लोकों का है; कई घरों में इसे भोजन से पहले पढ़ने की परंपरा है।
- पद्म पुराण का गीता माहात्म्य: हर अध्याय के माहात्म्य की कथा पढ़ने का भी चलन है।
रोज़ के लिए कुछ छोटे श्लोक
गीता जयंती से शुरुआत करके आप रोज़ एक श्लोक याद करने का नियम बना सकते हैं। ये चार श्लोक सबसे ज़्यादा बोले जाते हैं:
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥ (2.47)
तुम्हारा अधिकार केवल कर्म पर है, फल पर नहीं। फल के लालच में काम मत करो, और काम छोड़ भी मत दो।
यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥ (4.7)
जब-जब धर्म घटता है और अधर्म बढ़ता है, तब-तब मैं प्रकट होता हूँ।
पत्रं पुष्पं फलं तोयं यो मे भक्त्या प्रयच्छति।
तदहं भक्त्युपहृतमश्नामि प्रयतात्मनः॥ (9.26)
जो प्रेम से मुझे एक पत्ता, फूल, फल या थोड़ा जल भी अर्पित करता है, मैं उसे स्वीकार करता हूँ। घर की पूजा का यही आधार है।
सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।
अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः॥ (18.66)
सब कुछ छोड़कर मेरी शरण में आ जाओ, मैं तुम्हें सब पापों से मुक्त कर दूँगा, शोक मत करो।
मोक्षदा एकादशी से संबंध
गीता जयंती और मोक्षदा एकादशी एक ही दिन पड़ती हैं, इसलिए ज़्यादातर भक्त इस दिन एकादशी का व्रत रखते हुए गीता पाठ करते हैं। मोक्षदा एकादशी की कथा में राजा वैखानस पर्वत मुनि की सलाह पर यह व्रत करके अपने पिता को नरक से मुक्त कराते हैं; पूरी कथा मोक्षदा एकादशी व्रत कथा में पढ़ें। व्रत का पारण अगले दिन द्वादशी को निर्धारित समय में किया जाता है।
शाम को कीर्तन में अच्युतम् केशवम् जैसे भजन गाकर दिन पूरा करें। अगहन मास के बाकी पर्वों के लिए मार्गशीर्ष मास का महत्व देखें।

