2026

मार्गशीर्ष पूर्णिमा 2026

…

मुख्य विवरण

दिल्ली के लिए

मार्गशीर्ष पूर्णिमा

मार्गशीर्ष पूर्णिमा क्या है

अगहन यानी मार्गशीर्ष महीने की पूर्णिमा को मार्गशीर्ष पूर्णिमा कहते हैं। गीता में श्रीकृष्ण कहते हैं, "मासानां मार्गशीर्षोऽहम्", यानी महीनों में मैं मार्गशीर्ष हूँ। इसलिए यह पूरा महीना श्रीकृष्ण और विष्णु भक्ति का माना जाता है, और इसकी पूर्णिमा पर स्नान, दान और सत्यनारायण पूजा का विशेष फल बताया गया है। इसी दिन दत्तात्रेय जयंती भी मनाई जाती है।

किस तिथि को

मार्गशीर्ष शुक्ल पूर्णिमा। स्नान-दान उदया तिथि में होता है। दत्तात्रेय जयंती की पूजा परंपरा से प्रदोष काल यानी शाम को होती है, इसलिए जिस शाम पूर्णिमा हो, उसी दिन जयंती मानी जाती है। पूर्णिमांत पंचांग में इसके अगले दिन से पौष मास शुरू होता है।

कैसे मनाते हैं

  • सुबह नदी स्नान या घर पर गंगाजल मिलाकर स्नान, फिर तुलसी और श्रीकृष्ण की पूजा।
  • सत्यनारायण व्रत कथा और ॐ जय जगदीश हरे की आरती।
  • सर्दी शुरू हो चुकी होती है, इसलिए कंबल, गर्म कपड़े, तिल-गुड़ और अन्न का दान।
  • शाम को चंद्रमा को अर्घ्य और व्रत का पारण।

दत्तात्रेय और अन्नपूर्णा जयंती

अत्रि ऋषि और माता अनसूया के पुत्र भगवान दत्तात्रेय में ब्रह्मा, विष्णु और महेश, तीनों का अंश माना जाता है। उन्होंने पृथ्वी, जल, पशु-पक्षी जैसे चौबीस गुरुओं से सीख ली, यह कथा भागवत में आती है। महाराष्ट्र, गुजरात और कर्नाटक में दत्त जयंती बड़े उत्सव से मनती है, उत्तर भारत में दत्त मंदिरों और गिरनार परंपरा से जुड़े भक्त इसे मनाते हैं। कई क्षेत्रों में इसी दिन माँ अन्नपूर्णा की जयंती मानकर रसोई और अन्न की पूजा भी होती है। अपनी तिथि के लिए पूर्णिमा कैलेंडर देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मार्गशीर्ष पूर्णिमा का क्या महत्व है?
गीता में श्रीकृष्ण ने मार्गशीर्ष को अपना रूप बताया है, इसलिए इस महीने की पूर्णिमा पर स्नान, दान और विष्णु-कृष्ण पूजा को बहुत पुण्यदायी माना जाता है।
दत्तात्रेय जयंती कब होती है?
मार्गशीर्ष पूर्णिमा को, उस शाम जब प्रदोष काल में पूर्णिमा तिथि हो।
इस पूर्णिमा पर क्या दान करें?
कंबल, गर्म कपड़े, तिल, गुड़, अन्न और घी का दान इस मौसम में सबसे उपयोगी और पुण्यदायी माना जाता है।
क्या मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर सत्यनारायण कथा कर सकते हैं?
हाँ, हर पूर्णिमा की तरह इस दिन भी सत्यनारायण कथा की जाती है और इसे विशेष शुभ माना जाता है।
इसके बाद कौन-सा महीना आता है?
उत्तर भारत के पूर्णिमांत पंचांग में अगले दिन से पौष मास शुरू होता है। इसी समय के आसपास धनु संक्रांति से खरमास भी लगता है।

टिप्पणियाँ

टिप्पणी लिखने के लिए लॉगिन करें

टिप्पणियाँ लोड हो रही हैं...