2026

गंगा सप्तमी 2026

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मुख्य विवरण

दिल्ली के लिए

गंगा सप्तमी

गंगा सप्तमी वैशाख शुक्ल सप्तमी को मनाई जाती है। मान्यता है कि इसी दिन गंगा जी का पुनर्जन्म हुआ, जब ऋषि जह्नु ने उन्हें अपने कान से फिर से प्रवाहित किया। इसलिए इसे गंगा जयंती और जह्नु सप्तमी भी कहते हैं।

क्या है और क्यों मनाते हैं

कथा है कि राजा भगीरथ की तपस्या से गंगा पृथ्वी पर उतरीं। रास्ते में उनके तेज़ बहाव से ऋषि जह्नु का आश्रम बह गया। क्रोधित होकर ऋषि ने पूरी गंगा को पी लिया। भगीरथ और देवताओं की प्रार्थना पर उन्होंने वैशाख शुक्ल सप्तमी को गंगा को अपने कान से बाहर निकाला। तभी से गंगा का एक नाम जाह्नवी, यानी जह्नु की पुत्री, पड़ा।

किस तिथि को

वैशाख मास, शुक्ल पक्ष, सप्तमी। स्नान के लिए वह दिन लिया जाता है जिसमें मध्याह्न के समय सप्तमी हो। ध्यान रहे, गंगा के धरती पर अवतरण का पर्व गंगा दशहरा अलग है, जो ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को आता है।

कैसे मनाते हैं

  • गंगा स्नान: हरिद्वार, ऋषिकेश, प्रयागराज, वाराणसी और गढ़मुक्तेश्वर में भीड़ रहती है।
  • घर पर स्नान के पानी में थोड़ा गंगाजल डालकर स्नान और गंगा जी का ध्यान।
  • गंगा तट पर दीपदान, फूल और दूध अर्पण।
  • शाम को गंगा मैया की आरती; हर की पौड़ी और दशाश्वमेध घाट की आरती विशेष होती है।
  • जल, सत्तू, फल और वस्त्र का दान।

बहुत से परिवार इस दिन घर का पुराना गंगाजल बदलकर नया भरते हैं और नदी में कचरा न डालने का संकल्प लेते हैं, जो आज के समय में गंगा की सच्ची सेवा है। तिथि की शुरुआत और समाप्ति आज का पंचांग में देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गंगा सप्तमी कब होती है?
वैशाख शुक्ल सप्तमी को। इस साल की तारीख इसी पृष्ठ पर ऊपर दी गई है।
गंगा सप्तमी और गंगा दशहरा में क्या अंतर है?
गंगा सप्तमी को जह्नु ऋषि के कान से गंगा के फिर प्रकट होने का दिन माना जाता है, जबकि ज्येष्ठ शुक्ल दशमी का गंगा दशहरा गंगा के धरती पर अवतरण का पर्व है।
गंगा को जाह्नवी क्यों कहते हैं?
क्योंकि ऋषि जह्नु ने गंगा को पीकर फिर अपने कान से प्रवाहित किया, इसलिए गंगा उनकी पुत्री जाह्नवी कहलाईं।
गंगा तक न जा सकें तो क्या करें?
घर पर नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें, गंगा जी का ध्यान करें, आरती करें और दान दें।

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