2026

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि: पारण 2026

गुरुवार, जुलाई 23, 2026

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आषाढ़ गुप्त नवरात्रि: पारण

गुप्त नवरात्रि पारण क्या है

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का व्रत आषाढ़ शुक्ल दशमी को खोला जाता है, इसे ही पारण कहते हैं। नवमी तिथि समाप्त होने और दशमी लगने के बाद माँ की पूजा करके, कलश और जवारे का विसर्जन कर और प्रसाद लेकर व्रत पूरा किया जाता है।

पारण का नियम

पारण के लिए दशमी तिथि का होना ज़रूरी माना गया है। अगर नवमी तिथि सुबह कुछ देर तक चल रही हो, तो उसके खत्म होने के बाद ही अन्न ग्रहण करें। यही कारण है कि यह पेज दशमी शुरू होने के समय से जुड़ा है। जिन परिवारों में नवमी को हवन और कन्या पूजन के बाद ही व्रत खोलने की रीत है, वे वैसा करते हैं; दोनों परंपराएँ उत्तर भारत में चलती हैं।

पारण कैसे करें

  1. स्नान के बाद कलश के सामने दीपक जलाएँ और माँ को प्रणाम करें।
  2. सर्वमंगला मंत्र पढ़कर नौ दिनों की पूजा में हुई भूल-चूक के लिए क्षमा माँगें।
  3. कलश का जल घर में छिड़कें और बचा जल तुलसी या किसी पेड़ में डाल दें। नारियल प्रसाद के रूप में बाँटें।
  4. जौ के जवारे बहते जल में प्रवाहित करें, या कुछ हिस्सा तिजोरी, अनाज के डिब्बे में रख लें, जैसी घर की रीत हो।
  5. पहले माँ का प्रसाद लें, फिर सादा सात्विक भोजन करें; बहुत तला-भुना एकदम से न खाएँ।

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

आगे क्या आता है

गुप्त नवरात्रि खत्म होते ही अगले दिन आषाढ़ शुक्ल एकादशी को देवशयनी एकादशी आती है, जिससे चातुर्मास शुरू होता है और विवाह जैसे मांगलिक काम चार महीने के लिए रुक जाते हैं। इसके बाद आषाढ़ पूर्णिमा, यानी गुरु पूर्णिमा आती है। एकादशी व्रत रखने वाले पारण के दिन भी भोजन हल्का रखें। एकादशी से जुड़े नियम एकादशी में क्या खाएं में देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का पारण कब होता है?
आषाढ़ शुक्ल दशमी को, नवमी तिथि समाप्त होने के बाद। कुछ परिवार नवमी को हवन के बाद ही व्रत खोल लेते हैं।
पारण में सबसे पहले क्या खाएं?
पहले माँ का प्रसाद, जैसे हलवा, चना या नारियल लें, फिर सादा सात्विक भोजन करें।
कलश और जवारे का क्या करें?
कलश का जल घर में छिड़ककर बाकी पौधों में डाल दें, नारियल प्रसाद में बाँटें और जवारे बहते जल में प्रवाहित करें या कुछ अनाज के भंडार में रखें।
गुप्त नवरात्रि के बाद कौन सा व्रत आता है?
अगले दिन आषाढ़ शुक्ल एकादशी को देवशयनी एकादशी आती है, जिससे चातुर्मास शुरू होता है।
अगर नवमी सुबह तक चल रही हो तो क्या करें?
नवमी तिथि खत्म होने तक प्रतीक्षा करें और दशमी लगने के बाद ही अन्न ग्रहण करें।

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