ॐ नमः शिवाय: अर्थ और जाप विधि

ॐ नमः शिवाय शिव जी का पंचाक्षर मंत्र है, जिसका सीधा अर्थ है 'शिव को नमस्कार'। यह यजुर्वेद के श्री रुद्रम् से आया है; इसे कोई भी, कभी भी जप सकता है, पर सुबह स्नान के बाद रुद्राक्ष की माला से 108 बार जाप और सोमवार-सावन में जाप विशेष माना जाता है।

N. R. Sharma (Nutalapati Rajeshwara Sharma)
लेखन: · वेद पण्डित, लेखकअद्यतन · 5 मिनट का पाठ
कोई रेटिंग नहीं
0 व्यूज़

ॐ नमः शिवाय शिव जी का सबसे सरल और सबसे प्रसिद्ध मंत्र है। "नमः शिवाय" के पाँच अक्षरों के कारण इसे पंचाक्षर मंत्र कहते हैं, और आगे ॐ जुड़ने पर इसे षडक्षर (छह अक्षर का) भी कहा जाता है। इसका सीधा अर्थ है "शिव को नमस्कार", यानी मैं अपने आपको कल्याणकारी शिव को समर्पित करता हूँ। इसके जाप के लिए किसी ख़ास दीक्षा की ज़रूरत नहीं मानी जाती; बच्चे, बुज़ुर्ग, स्त्री-पुरुष, सब इसे जपते हैं।

पंचाक्षर मंत्र का स्रोत

यह मंत्र किसी बाद के ग्रंथ की रचना नहीं, बल्कि वेद से आया है। कृष्ण यजुर्वेद की तैत्तिरीय संहिता में श्री रुद्रम् (रुद्राध्याय) का पाठ है, जिसके आठवें अनुवाक में यह पंक्ति आती है: "नमः शिवाय च शिवतराय च", यानी शिव को नमस्कार, और उनसे भी अधिक कल्याणकारी को नमस्कार। श्री रुद्रम् के बीच में आने के कारण पंचाक्षर को रुद्राध्याय का हृदय कहा जाता है।

शिव पुराण की विद्येश्वर संहिता में पंचाक्षर की बहुत महिमा बताई गई है और कहा गया है कि इसे हर व्यक्ति, हर अवस्था में जप सकता है। बाद में आदि शंकराचार्य ने "शिव पंचाक्षर स्तोत्र" रचा, जिसके पाँच श्लोक न, म, शि, वा, य से शुरू होते हैं: "नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय..."। दक्षिण भारत के तमिल शैव संतों ने भी इसे "नमच्चिवाय" के रूप में गाया।

अक्षरों का अर्थ

शब्दों के हिसाब से "ॐ" परब्रह्म का नाद है, "नमः" का अर्थ है नमन या समर्पण (न-मम, "मेरा नहीं"), और "शिवाय" यानी शिव के लिए, जो कल्याण और शुभता के स्वरूप हैं।

शैव परंपरा में पाँच अक्षरों को पाँच तत्वों से भी जोड़ा जाता है। यह व्याख्या परंपरा पर आधारित है, ग्रंथों में अलग-अलग क्रम भी मिलते हैं:

अक्षरतत्वएक अर्थ
नपृथ्वीस्थिरता
मजलप्रवाह, शुद्धि
शिअग्निस्वयं शिव, तेज
वावायुशक्ति, कृपा
यआकाशजीवात्मा, विस्तार

इस तरह मंत्र जपना पूरे शरीर और सृष्टि को शिव के चरणों में रखने जैसा माना जाता है।

जाप विधि

ॐ नमः शिवाय इतना सरल है कि चलते-फिरते, काम करते, बस में बैठे भी मन में जपा जा सकता है। फिर भी नियम से बैठकर जाप करना हो तो यह तरीका अपनाएँ:

  1. समय: सुबह स्नान के बाद, ब्रह्म मुहूर्त से लेकर सूर्योदय के कुछ देर बाद तक, या शाम को प्रदोष के समय। रोज़ एक ही समय रखें।
  2. स्थान: घर के मंदिर के सामने, या शिवलिंग के पास। ऊनी या कुश के आसन पर बैठें, ज़मीन पर सीधे नहीं।
  3. दिशा: पूर्व या उत्तर की ओर मुँह करें।
  4. तैयारी: दीपक जलाएँ, हो सके तो शिवलिंग पर जल और बेलपत्र चढ़ाएँ। शिवलिंग पर क्या चढ़ाएँ और क्या नहीं, यह शिवलिंग पर क्या चढ़ाएं लेख में देखें।
  5. माला: रुद्राक्ष की 108 मनकों की माला सबसे उपयुक्त मानी जाती है। माला दाहिने हाथ में, मध्यमा उंगली पर रखकर अंगूठे से मनके आगे बढ़ाएँ; तर्जनी से माला न छुएँ। सुमेरु (बड़ा मनका) पार न करें, वहाँ पहुँचकर माला पलट लें।
  6. उच्चारण: "ॐ नमः शिवाय" साफ़ और धीमे बोलें। "शिवाय" में "वा" थोड़ा लंबा है।
  7. संख्या: रोज़ कम से कम एक माला (108)। संकल्प लेकर सवा लाख जाप का अनुष्ठान भी किया जाता है, जिसे दिनों में बाँटकर पूरा करते हैं।
  8. समापन: जाप के बाद कुछ पल शांत बैठें, फिर शिव जी को प्रणाम करें।

जाप के तीन तरीके

  • वाचिक: बोलकर, ताकि पास बैठा सुन सके। शुरुआत में मन लगाने के लिए अच्छा।
  • उपांशु: होंठ हिलें, पर आवाज़ बहुत धीमी, लगभग फुसफुसाहट जैसी।
  • मानसिक: बिना होंठ हिलाए, केवल मन में। परंपरा में इसे सबसे श्रेष्ठ माना गया है।

महिलाएँ मासिक धर्म के दिनों में भी मानसिक जाप कर सकती हैं, इस पर कोई रोक नहीं बताई जाती; मूर्ति-स्पर्श के नियम परिवार की परंपरा के अनुसार रखें।

जाप के समय ध्यान रखने की बातें

  • गिनती पूरी करने की जल्दी में मंत्र को तेज़ी से न दौड़ाएँ। धीमे और साफ़ 27 जाप, जल्दबाज़ी के 108 से बेहतर हैं।
  • अपनी माला दूसरों को जपने के लिए न दें, और जाप के बाद उसे गोमुखी (कपड़े की थैली) या साफ़ डिब्बे में रखें।
  • मन भटके तो परेशान न हों। ध्यान वापस मंत्र की आवाज़ पर ले आएँ; यही अभ्यास है।
  • जाप शुरू करने से पहले मन में एक छोटा संकल्प लें कि आज कितनी माला करेंगे, और उसे पूरा करें।
  • सफ़र में या अस्पताल में हों तो बिना माला, बिना आसन के मानसिक जाप करें; पंचाक्षर के लिए स्थान की कोई बंदिश नहीं है।

बहुत से लोग यह भी पूछते हैं कि घर में शिवलिंग न हो तो जाप कैसे करें। शिव जी का एक चित्र, या बस एक दीपक जलाकर उसकी लौ की ओर देखते हुए जाप करना भी पूरी तरह मान्य है। भक्ति परंपरा में भाव को ही प्रधान माना गया है, साधन को नहीं।

सोमवार और सावन में जाप

सोमवार शिव जी का दिन माना जाता है। जो लोग सोमवार का व्रत रखते हैं, वे सुबह शिवलिंग पर जल चढ़ाकर कम से कम एक माला पंचाक्षर का जाप करते हैं और सोमवार व्रत कथा सुनते हैं। सावन के महीने में बहुत से परिवार पूरे महीने रोज़ जाप का संकल्प लेते हैं, और कांवड़ यात्रा में तो "बोल बम" के साथ ॐ नमः शिवाय ही गूँजता है। सावन के बाकी नियम सावन मास के नियम में देखें।

प्रदोष व्रत, मासिक शिवरात्रि और महाशिवरात्रि की रात भी जाप के लिए विशेष मानी जाती है। जाप के बाद श्री शिव चालीसा का पाठ कर सकते हैं।

अन्य प्रमुख शिव मंत्र

मंत्रनामकब जपते हैं
ॐ नमः शिवायपंचाक्षररोज़, कभी भी
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥महामृत्युंजयसंकट, बीमारी, भय के समय; रोज़ भी
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि। तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥रुद्र गायत्रीसुबह-शाम की संध्या में
ॐ नमो भगवते रुद्रायरुद्र मंत्रअभिषेक के समय

महामृत्युंजय मंत्र का अर्थ और उसके नियम विस्तार से महामृत्युंजय मंत्र वाले लेख में हैं। पंचाक्षर की ख़ास बात यह है कि इसमें कोई कठिन नियम नहीं; श्रद्धा से, मन लगाकर जपना ही इसकी विधि का सार है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ॐ नमः शिवाय का अर्थ क्या है?

इसका सीधा अर्थ है 'शिव को नमस्कार'। ॐ परब्रह्म का नाद है, नमः यानी समर्पण, और शिवाय यानी कल्याणकारी शिव के लिए।

ॐ नमः शिवाय मंत्र कहाँ से आया है?

यह कृष्ण यजुर्वेद की तैत्तिरीय संहिता के श्री रुद्रम् से आया है, जिसमें 'नमः शिवाय च शिवतराय च' पंक्ति है। शिव पुराण में इसकी विस्तार से महिमा बताई गई है।

ॐ नमः शिवाय का जाप कितनी बार करें?

रोज़ कम से कम एक माला यानी 108 बार जाप करना अच्छा माना जाता है। अनुष्ठान के रूप में सवा लाख जाप का संकल्प भी लिया जाता है।

क्या ॐ नमः शिवाय के लिए दीक्षा ज़रूरी है?

आम मान्यता है कि पंचाक्षर मंत्र के लिए दीक्षा ज़रूरी नहीं; शिव पुराण भी इसे सबके लिए सुलभ बताता है। गुरु से दीक्षा ली हो तो उनके बताए नियम मानें।

ॐ नमः शिवाय जाप के लिए कौन सी माला लें?

रुद्राक्ष की 108 मनकों की माला सबसे उपयुक्त मानी जाती है। वह न हो तो स्फटिक या कोई भी साफ़ माला, या उंगलियों पर गिनती भी चल जाती है।

N. R. Sharma (Nutalapati Rajeshwara Sharma)
लेखक के बारे में

नूतलपाटि राजेश्वर शर्मा

वेद पण्डित, लेखक

नूतलपाटि राजेश्वर शर्मा जी वेद पण्डित और लेखक हैं। अनेक वर्षों से वे दुर्गा देवी की आराधना का अध्ययन और आचरण करते आ रहे हैं। पूजा विधि, मंत्रों और स्तोत्रों को सामान्य भक्तों के लिए सरलता से समझाना उनका लक्ष्य है। वे “श्री दुर्गा नित्याराधना” ग्रंथ के लेखक हैं। इस साइट के लेख उनकी रचनाएँ हैं, या उनके ग्रंथों पर आधारित हैं।

लेखक पेज →

टिप्पणियाँ

टिप्पणी लिखने के लिए लॉगिन करें

टिप्पणियाँ लोड हो रही हैं...