मंगलवार व्रत कथा: हनुमान जी, ब्राह्मण दंपती और बालक मंगलिया
संक्षेप में:मंगलवार का व्रत हनुमान जी के लिए रखा जाता है और लगातार 21 मंगलवार करने की परंपरा है। इसकी कथा एक निःसंतान ब्राह्मण दंपती की है, जिन्हें हनुमान जी की कृपा से पुत्र मंगल मिला और जिनके संदेह को स्वयं बजरंगबली ने दूर किया।
मंगलवार का व्रत संकटमोचन हनुमान जी को समर्पित है। उत्तर भारत में स्त्री-पुरुष दोनों यह व्रत रखते हैं, ज़्यादातर लगातार 21 मंगलवार तक, और किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष के पहले मंगलवार से इसे शुरू करना अच्छा माना जाता है। लोग इसे संतान की कामना, कर्ज़ और मुकदमे से छुटकारे, और मंगल ग्रह की पीड़ा शांत करने के लिए रखते हैं। दिन में एक बार गेहूँ और गुड़ से बना भोजन, बिना नमक, लिया जाता है।
मंगलवार व्रत कथा
पुराने समय में एक गाँव में एक ब्राह्मण और उसकी पत्नी रहते थे। घर में किसी चीज़ की कमी नहीं थी, पर आँगन सूना था। बरसों बीत गए, संतान नहीं हुई। इस दुख ने दोनों को भीतर से तोड़ दिया था।
एक दिन ब्राह्मण ने तय किया कि वह वन में जाकर हनुमान जी की तपस्या करेगा। वह जंगल में एक पुराने हनुमान मंदिर के पास बैठ गया और रोज़ पूजा करके पुत्र की प्रार्थना करने लगा। उधर घर पर उसकी पत्नी ने हर मंगलवार का व्रत शुरू कर दिया। वह सुबह नहाकर हनुमान जी को लाल फूल चढ़ाती, शाम को अपने हाथ से भोग बनाती, पहले बजरंगबली को भोग लगाती और तब जाकर खुद एक बार भोजन करती।
एक मंगलवार ऐसा आया कि किसी कारण से वह भोग नहीं बना पाई। उसने मन ही मन सोचा, जब तक अगले मंगलवार को हनुमान जी को भोग नहीं लगा लूँगी, अन्न का एक दाना मुँह में नहीं डालूँगी। छह दिन वह भूखी-प्यासी रही। सातवें दिन, यानी अगले मंगलवार को, भोग बनाते-बनाते वह कमज़ोरी से बेहोश होकर गिर पड़ी।
उसकी लगन देखकर हनुमान जी प्रसन्न हुए और उसके सामने प्रकट हुए। उन्होंने कहा, “बेटी, मैं तुम्हारी श्रद्धा से बहुत खुश हूँ। तुम्हें एक सुंदर, गुणवान बालक देता हूँ, जो तुम्हारी हर तरह से सेवा करेगा।” इतना कहकर उन्होंने उसकी गोद में एक बालक दे दिया और अंतर्धान हो गए। मंगलवार के दिन मिलने के कारण ब्राह्मणी ने बेटे का नाम मंगल रखा। गाँव वाले प्यार से उसे मंगलिया बुलाने लगे।
कुछ समय बाद ब्राह्मण तपस्या पूरी करके घर लौटा। आँगन में खेलते बच्चे को देखकर उसने पूछा, “यह किसका लड़का है?” पत्नी ने खुशी से सारी बात सुनाई कि कैसे व्रत के दिन हनुमान जी ने स्वयं यह बालक दिया। ब्राह्मण को विश्वास नहीं हुआ। उसके मन में शक बैठ गया कि पत्नी कुछ छिपा रही है और यह बच्चा किसी और का है।
यह शक दिन-ब-दिन बढ़ता गया। एक दिन ब्राह्मण पानी भरने कुएँ पर जाने लगा तो पत्नी ने कहा, “मंगल को भी साथ ले जाइए।” रास्ते में ब्राह्मण के मन में बुरा विचार आया। कुएँ पर पहुँचकर उसने चुपचाप बालक को कुएँ में धकेल दिया और अकेला घर लौट आया।
घर आते ही पत्नी ने पूछा, “मंगल कहाँ है?” ब्राह्मण कुछ जवाब देता, उससे पहले ही पीछे से मंगल दौड़ता हुआ आया और हँसते हुए माँ से लिपट गया। ब्राह्मण यह देखकर सन्न रह गया। उसे समझ नहीं आया कि जिसे वह अभी कुएँ में छोड़ आया था, वह घर कैसे पहुँच गया।
उसी रात हनुमान जी ने ब्राह्मण को सपने में दर्शन दिए और कहा, “यह बालक मैंने ही तुम्हारी पत्नी के व्रत से प्रसन्न होकर दिया है। तुम अपनी पत्नी पर व्यर्थ संदेह कर रहे हो। उसका मन पवित्र है।” सुबह उठते ही ब्राह्मण ने पत्नी से क्षमा माँगी और सारी बात बताई। उस दिन से दोनों पति-पत्नी साथ मिलकर हर मंगलवार का व्रत रखने लगे और हनुमान जी की कृपा से उनका घर सुख-शांति से भर गया।
कथा के बाद बड़े-बुज़ुर्ग यही कहते हैं कि जो भी श्रद्धा से मंगलवार का व्रत रखता है और यह कथा सुनता है, उसके संकट हनुमान जी हर लेते हैं।
दूसरी कथा: बुढ़िया, मंगलिया और साधु की परीक्षा
कई घरों में एक और कथा सुनाई जाती है। एक बुढ़िया हनुमान जी की बड़ी भक्त थी और हर मंगलवार व्रत रखती थी। उसका एक ही बेटा था, नाम मंगलिया। एक मंगलवार हनुमान जी साधु का रूप लेकर उसके द्वार आए और बोले, “माई, मुझे भोजन बनाना है, थोड़ी ज़मीन लीप दे।” बुढ़िया ने हाथ जोड़कर कहा, “महाराज, आज मंगलवार है, मेरा नियम है कि आज न मिट्टी खोदती हूँ न लीपती हूँ। और कोई सेवा बताइए।” साधु ने कहा, “तो अपने बेटे को बुला, उसकी पीठ पर आग जलाकर मैं भोजन बनाऊँगा।” बुढ़िया का कलेजा काँप गया, पर वचन दे चुकी थी, सो उसने मंगलिया को बुला दिया। साधु ने बालक को औंधा लिटाकर उसकी पीठ पर अँगीठी जलाई और भोजन बनाया। फिर बोले, “अब मंगलिया को आवाज़ दे, वह भी भोग खाए।” रोती हुई बुढ़िया ने पुकारा और मंगलिया हँसता हुआ दौड़ा चला आया, उसके शरीर पर आँच का एक निशान तक नहीं था। तब साधु ने अपना असली रूप दिखाया और बुढ़िया को आशीर्वाद दिया। कुछ इलाकों में यही परीक्षा घर की नई बहू की बताई जाती है, जिसने मंगलवार के नियम को किसी भी हाल में नहीं तोड़ा। भाव एक ही है: नियम और भरोसा दोनों साथ हों तो बजरंगबली परीक्षा लेकर भी अपने भक्त को खाली हाथ नहीं लौटाते।
मंगलवार व्रत की पूजा विधि
- सुबह जल्दी नहाकर लाल या केसरिया कपड़े पहनें। घर के मंदिर में हनुमान जी की मूर्ति या चित्र के सामने बैठकर हाथ में जल, अक्षत और लाल फूल लेकर 21 मंगलवार व्रत का संकल्प लें।
- हनुमान जी को लाल फूल (गुड़हल या लाल गुलाब), सिंदूर, चमेली का तेल, जनेऊ और लाल चोला चढ़ाएँ। जहाँ मंदिर में चोला चढ़ता हो, वहाँ पुजारी जी से चढ़वा सकते हैं।
- भोग में बूंदी या बूंदी के लड्डू, गुड़-चना, या गुड़ और गेहूँ के आटे का चूरमा रखें। कई परिवारों में केले भी चढ़ाते हैं।
- घी का दीपक जलाकर मंगलवार व्रत कथा पढ़ें या सुनें। इसके बाद हनुमान चालीसा का पाठ करें; समय हो तो सुंदरकांड या संकटमोचन हनुमान अष्टक भी पढ़ें।
- पूजा पूरी होने पर आरती कीजै हनुमान लला की गाएँ और प्रसाद बाँटें।
- दिन में एक बार, आम तौर पर शाम की पूजा के बाद, गेहूँ और गुड़ से बना भोजन लें। उस दिन नमक नहीं खाया जाता।
नियम और उद्यापन
- व्रत के दिन नमक, मांस-मदिरा, प्याज़-लहसुन से परहेज़ रखें और ब्रह्मचर्य का पालन करें।
- किसी से कटु वचन न बोलें; हनुमान जी के व्रत में संयम और सेवा भाव ही असली पूजा है।
- लगातार 21 मंगलवार पूरे होने पर 22वें मंगलवार को उद्यापन करें: हवन, ब्राह्मण भोजन, और लाल वस्त्र, गुड़, मसूर दाल या ताँबे का दान।
- महिलाएँ मासिक धर्म के दिनों में पूजा किसी और से करवा दें और गिनती आगे जारी रखें, ऐसा अधिकांश घरों में माना जाता है।
हनुमान जी का जन्मोत्सव कब है, यह हनुमान जयंती पृष्ठ पर देखें। शनिवार को भी बजरंगबली की पूजा का चलन है, इसलिए शनिवार व्रत कथा भी पढ़ सकते हैं। व्रत शुरू करने से पहले आज की तिथि और शुभ समय आज के पंचांग में देख लें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मंगलवार का व्रत कितने मंगलवार रखना चाहिए?
सबसे प्रचलित परंपरा 21 मंगलवार की है। कुछ लोग 11 या 45 मंगलवार का संकल्प भी लेते हैं, और कई भक्त जीवन भर यह व्रत रखते हैं।
मंगलवार के व्रत में क्या खाना चाहिए?
दिन में एक बार गेहूँ और गुड़ से बना भोजन, जैसे गुड़ की रोटी या चूरमा, लिया जाता है। नमक नहीं खाया जाता।
मंगलवार व्रत किस दिन से शुरू करें?
किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष के पहले मंगलवार से शुरू करना शुभ माना जाता है। पितृपक्ष और खरमास में नया व्रत शुरू करने से लोग बचते हैं।
मंगलवार को हनुमान जी को क्या चढ़ाएँ?
लाल फूल, सिंदूर, चमेली का तेल, लाल चोला और भोग में बूंदी, गुड़-चना या चूरमा चढ़ाया जाता है।
मंगलवार व्रत कथा में बालक का नाम क्या है?
हनुमान जी की कृपा से जन्मे बालक का नाम मंगल था, जिसे गाँव वाले प्यार से मंगलिया कहते थे।
